ताज़ा खबर
बिग बॉस 20 प्रोमो में लव गिल को सुपरपावर, काजी से कराई दोहरी एक्टिंग IRCTC North East Tour: 7 दिन में घूमें शिलांग, चेरापूंजी और काजीरंगा JPSC Exam Scam: सीआईडी जांच में 15 लाख देकर डीएसपी बनने का खुलासा Google Fitbit Air: भारत में लॉन्च, बिना स्क्रीन का फिटनेस ट्रैकर Oppo K15s Price: 8000mAh तक की बैटरी, 45W फास्ट चार्जिंग और रग्ड बिल्ड वाले दो नए 5G स्मार्टफोन UP Rajya Sabha Election: सपा का तीसरा उम्मीदवार अभी घोषित नहीं, सलीम शेरवानी के नाम पर सस्पेंस Jitiya Vrat 2026: पहली बार रखने वाली महिलाएं जानें जरूरी नियम Gold-Silver Price 1 October 2026: त्योहारी सीजन से पहले सर्राफा बाजार में हलचल, 24 और 22 कैरेट सोने समेत चांदी के ताजा रेट जारी
ट्रेंडिंग
धर्म

Nag Panchami 2026: 17 अगस्त को सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और काल सर्प दोष के उपाय

Nag Panchami 2026: 17 अगस्त को सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और काल सर्प दोष के उपाय
Nag Panchami 2026: भारतीय सनातन संस्कृति में नाग पंचमी का त्योहार अत्यंत पवित्र, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विशेष प्रभाव रखने वाला माना गया है। श्रावण यानी सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पावन पर्व नाग देवताओं की आराधना, संरक्षण और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। वर्ष 2026 में नाग पंचमी का यह पर्व 17 अगस्त, सोमवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस बार नाग पंचमी पर एक बेहद दुर्लभ और मंगलकारी संयोग बन रहा है, क्योंकि यह पावन तिथि सावन के सोमवार के दिन पड़ रही है।
ज्योतिष शास्त्र में सावन सोमवार का दिन देवों के देव महादेव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है, और नाग देवता भगवान शिव के गले का आभूषण बनकर उनके साथ सदैव विराजमान रहते हैं। ऐसे में सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ होना शिव भक्तों और ज्योतिषीय उपायों की दृष्टि से अत्यंत फलदायी सिद्ध होने वाला है। इस दिन भगवान भोलेनाथ और नाग देव की एक साथ पूजा करने से साधकों को दोहरे पुण्य की प्राप्ति होगी। विशेष रूप से जो जातक कुंडली में राहु-केतु के अशुभ प्रभाव या काल सर्प दोष से पीड़ित हैं, उनके लिए यह दिन कष्टों से मुक्ति पाने का एक स्वर्णिम अवसर माना जा रहा है।

Nag Panchami 2026: नाग पंचमी 2026 की सही तिथि और पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग की सूक्ष्म गणनाओं के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का शुभारंभ 16 अगस्त 2026 को सायंकाल 04 बजकर 52 मिनट पर हो जाएगा। इस तिथि का समापन 17 अगस्त 2026 को सायंकाल 05 बजकर 00 मिनट पर होगा। शास्त्र सम्मत मान्यताओं और उदया तिथि के नियमों के अनुसार, सूर्योदय के समय पंचमी तिथि 17 अगस्त को ही विद्यमान रहेगी, इसलिए नाग पंचमी का व्रत, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान 17 अगस्त को ही संपन्न किए जाएंगे।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार नाग देवताओं की पूजा प्रातःकाल के प्रथम प्रहर में करना सर्वाधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। 17 अगस्त 2026 की सुबह नाग पूजन के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त प्रातः 05 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर सुबह 08 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए लगभग 2 घंटे 38 मिनट की समयावधि प्राप्त होगी। इस शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से किया गया पूजन गृह क्लेश को समाप्त करता है और साधक को भयमुक्त जीवन का आशीर्वाद प्रदान करता है।

नाग पंचमी का पौराणिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

सनातन परंपरा में नागों को केवल साधारण जीव न मानकर दिव्य शक्तियों, सुरक्षा और कुंडलिनी जागरण की ऊर्जा का प्रतीक स्वीकार किया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जगत के पालनहार भगवान विष्णु क्षीरसागर में अनंत शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं, जबकि सृष्टि संहारक भगवान शिव वासुकि नाग को अपने कंठ में धारण करते हैं। इस दिन नाग देव की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का स्थायी वास होता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से नाग पंचमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्योतिष में राहु को सर्प का मुख और केतु को सर्प की पूंछ माना गया है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं, तो ‘काल सर्प दोष’ का निर्माण होता है। इस दोष के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक तनाव, व्यापार में हानि, वैवाहिक जीवन में अकारण बाधाएं और अज्ञात भय सताता रहता है। नाग पंचमी का दिन इस दोष की शांति के लिए पूरे वर्ष में सबसे प्रभावकारी माना जाता है।

सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग: कैसे करें शिव और नाग देव की संयुक्त पूजा

वर्ष 2026 में नाग पंचमी का सोमवार को पड़ना एक दुर्लभ घटना है, जो शिव भक्ति के महत्व को कई गुना बढ़ा देती है। सावन के महीने की पवित्रता, सोमवार की आध्यात्मिक ऊर्जा और पंचमी तिथि की शक्ति मिलकर इस दिन को महासंयोग बना रही हैं। इस पावन अवसर पर पूजा की शुरुआत हमेशा भगवान शिव के जलाभिषेक से करनी चाहिए, क्योंकि नाग देव अपने स्वामी शिव जी की पूजा से अति प्रसन्न होते हैं।
पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के साथ करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर चंदन, हल्दी या गेरू की मदद से नाग देव की प्रतीकात्मक आकृतियां बनाएं। यदि घर में मिट्टी या चांदी की नाग प्रतिमा है, तो उसे पूजा स्थान पर स्थापित करें। सबसे पहले शिवलिंग पर जल, गंगाजल, कच्चा दूध और बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद नाग देव की प्रतिमा पर जल और दूध का प्रतीकात्मक छिड़काव करें। उन्हें रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, दूर्वा, मदार के फूल और मिष्ठान का भोग लगाएं। पूजन के दौरान “ॐ नागदेवताभ्यो नमः” या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का निरंतर जाप करते रहें। अंत में आरती उतारकर प्रसाद का वितरण करें।

काल सर्प दोष और राहु-केतु से राहत पाने के अचूक ज्योतिषीय उपाय

यदि आपकी कुंडली में काल सर्प दोष, राहु-केतु की महादशा या पितृदोष का प्रभाव है, तो नाग पंचमी के इस दुर्लभ संयोग पर कुछ विशेष उपाय करके इन परेशानियों से राहत पाई जा सकती है। इस दिन शिवलिंग पर जल और कच्चे दूध का अभिषेक करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।
इसके अलावा, चांदी से बने नाग-नागिन का छोटा जोड़ा शिवलिंग पर अर्पित करना या उसे किसी पवित्र नदी के बहते जल में प्रवाहित करना काल सर्प दोष को शांत करने का अचूक तरीका है। इस पावन दिन पर शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर तांबे का लोटा, दूध, उड़द, काले तिल और नीले वस्त्र का दान करने से राहु और केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। जरूरतमंदों और गरीबों को भोजन कराना भी ग्रहों के दोष को शांत करता है।

नाग पंचमी पर क्या करें और किन गलतियों से बचें

नाग पंचमी के दिन धार्मिक नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है। इस दिन जीवित सांपों को जबरन दूध पिलाने की गलती न करें, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और जानलेवा हो सकता है। दूध केवल प्रतिमा, चित्र या शिवलिंग पर ही चढ़ाएं। इस दिन पृथ्वी को खोदना, खेत जोतना या साग-सब्जी तोड़ना वर्जित माना जाता है, क्योंकि इससे जमीन के अंदर रहने वाले जीवों को क्षति पहुंच सकती है।
इसके अतिरिक्त, इस दिन लोहे के तवे या कड़ाही में खाना पकाने से बचना चाहिए और घर में पूरी तरह सात्विक भोजन ही तैयार करना चाहिए। सुई, धागा, कैंची और चाकू जैसी नुकीली या धारदार वस्तुओं का प्रयोग भी इस दिन कम से कम करने की सलाह दी जाती है। मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाकर मन में शुद्ध विचार रखें।

Nag Panchami 2026: पर्यावरण संरक्षण और जीव दया का संदेश देता पर्व

नाग पंचमी का यह पावन पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव समाज को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति दयाभाव रखने का एक महान संदेश देता है। वर्षा ऋतु के दौरान जब जलभराव के कारण सर्प अपने बिलों से बाहर आते हैं, तब यह त्योहार हमें सिखाता है कि हम प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने वाले इन जीवों को नुकसान न पहुंचाएं। 17 अगस्त को सावन सोमवार के इस अलौकिक संयोग पर भक्ति, श्रद्धा और पूर्ण सावधानी के साथ नाग देव की आराधना करें और अपने जीवन को सुख-समृद्धि से परिपूर्ण बनाएं।

Read More Here

लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X