Lucknow Buffalo Auction: लखनऊ में पिछले कई दिनों से चले आ रहे विवाद और गहमागहमी के बीच नगर निगम मुख्यालय में जब्त की गई 243 भैंसों की नीलामी प्रक्रिया अंततः पूरी हो गई। राजधानी के पारा इलाके से जब्त की गई इन सभी भैंसों को सुरक्षा और रखरखाव के लिहाज से शहर के 6 अलग-अलग केंद्रों पर रखा गया था।
नीलामी की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 6 प्रमुख पशुपालकों ने हिस्सा लिया और बोलियां लगाईं। सभी 243 भैंसें कुल मिलाकर लगभग 58.89 लाख रुपये में नीलाम हो गईं, जिससे नगर निगम को एक बड़ा राजस्व प्राप्त हुआ है।
Lucknow Buffalo Auction: पारदर्शी प्रक्रिया और औसतन 26 हजार में बिकी एक भैंस
नगर निगम के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पूरी नीलामी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार संपन्न कराया गया है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इस नीलामी में औसतन एक भैंस की कीमत लगभग 25 से 26 हजार रुपये के बीच तय हुई।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कागजी कार्रवाई और सभी कानूनी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर ली जाएंगी। इसके तुरंत बाद ही सभी सफल बोलीदाताओं यानी खरीदारों को उनकी भैंसें आधिकारिक रूप से सौंप दी जाएंगी। इस कदम से नगर निगम कोष में 58.89 लाख रुपये जमा हुए हैं।
उपद्रवियों और हमलावरों पर सख्त रुख
नीलामी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही नगर निगम प्रशासन ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी थी। प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए थे कि नगर निगम की कार्रवाई के दौरान बाधा डालने वालों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह दूर रखा जाएगा।
विशेष रूप से जिन लोगों ने अधिकारियों और पुलिस टीम पर हमला करने या नगर निगम के वाहनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी, उन्हें नीलामी की बोली में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इस सख्त कदम का उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना था।
Lucknow Buffalo Auction: मुख्यालय पर पशुपालकों का विरोध और प्रदर्शन
एक तरफ जहां मुख्यालय के भीतर नीलामी चल रही थी, वहीं दूसरी तरफ बाहर पशुपालकों और प्रदर्शनकारियों ने जमकर विरोध जताया। प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग थी कि भैंसों की नीलाम करने के बजाय उनसे उचित जुर्माना लेकर पशुओं को वापस छोड़ दिया जाना चाहिए।
इसके साथ ही पशुपालकों ने सरकार से मांग की है कि शहर में उनके लिए एक निश्चित स्थान आवंटित किया जाए। उनका कहना है कि स्थायी जगह मिलने से उन्हें बार-बार विस्थापन और पशु जब्ती जैसी गंभीर समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
लखनऊ नगर निगम की यह कार्रवाई शहर में अतिक्रमण हटाने और अव्यवस्था को नियंत्रित करने के प्रशासनिक प्रयासों का हिस्सा है। हालांकि, 58.89 लाख रुपये का राजस्व मिलने और पारदर्शी नीलामी से नगर निगम को प्रशासनिक सफलता जरूर मिली है, लेकिन पशुपालकों का विरोध एक गहरे सामाजिक और आर्थिक पहलू को उजागर करता है। शहर में पशुपालकों के लिए एक व्यवस्थित और स्थायी स्थान उपलब्ध कराना भविष्य में इस तरह के विवादों को रोकने का दीर्घकालिक समाधान बन सकता है।
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