परिचय

करवा चौथ विवाहित स्त्रियों द्वारा पति की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला निर्जला व्रत है, जो कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाता है।

शुभ मुहूर्त एवं समय

प्रातः सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत रखा जाता है, चंद्रोदय के बाद पूजा व अर्घ्य दिया जाता है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • करवा (मिट्टी का पात्र)
  • छलनी
  • सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी)
  • मिठाई

पूजा विधि (चरण दर चरण)

  1. प्रातः सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करके व्रत का संकल्प लें।
  2. संध्या समय करवा माता की कथा सुनें/सुनाएं।
  3. चंद्रोदय के बाद छलनी से चंद्रमा को देखें, फिर पति को देखें।
  4. पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत का पारण करें।

मंत्र

मुख्य मंत्र: ॐ करवा चौथाय नमः

लाभ एवं महत्व

पति की दीर्घायु व दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सावधानियां

स्वास्थ्य समस्या होने पर निर्जला व्रत के स्थान पर फलाहार व्रत का विकल्प चुनें।

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