CAG Report: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट ने झारखंड सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को विधानसभा में रखी गई इस रिपोर्ट में कई विभागों की लापरवाही और नियमों की अनदेखी का खुलासा हुआ है। राज्य को राजस्व का बड़ा नुकसान हुआ है और योजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उनका सही उपयोग प्रमाणित नहीं हो सका। परिवहन विभाग में नाबालिगों को गियर वाली बाइक का लाइसेंस जारी करने से लेकर मनरेगा में अधूरे काम और पीएम आवास योजना में अपात्र लाभुकों तक कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मार्च 2025 तक 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित पाए गए। पूंजीगत व्यय में कमी और विभिन्न योजनाओं में लक्ष्य हासिल न होने से विकास कार्यों पर असर पड़ा है। रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन की कमजोरियों को रेखांकित किया गया है जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

CAG Report: परिवहन विभाग में नियमों की अनदेखी से राजस्व प्रभावित

सीएजी रिपोर्ट में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता जताई गई है। ऑडिट के दौरान पांच जिलों में 18 साल से कम उम्र के 305 युवाओं को गियर वाली मोटरसाइकिल चलाने का लाइसेंस जारी किए जाने का मामला सामने आया। सारथी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण कानूनी उम्र से पहले ही लाइसेंस दे दिए गए। अस्थायी पंजीकरण की वैधता छह महीने के बजाय एक महीने रखने से 327.35 करोड़ रुपये के राजस्व पर असर पड़ा। 6640 वाहनों का अस्थायी पंजीकरण होने के बाद स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया जिससे कर वसूली रुक गई। इसके अलावा 1.24 लाख वाहनों का टैक्स बकाया मिला जिससे 11.24 करोड़ रुपये की संभावित वसूली प्रभावित हुई। ये लापरवाहियां न सिर्फ नियमों का उल्लंघन हैं बल्कि सड़क सुरक्षा और सरकारी खजाने दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हुई हैं।

मनरेगा में अधूरे काम और मजदूरी का लंबित भुगतान

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में काम पूरा होने की रफ्तार बेहद धीमी पाई गई। 2019 से 2024 के दौरान प्रस्तावित कार्यों में से सिर्फ 27 प्रतिशत ही पूरे हो सके। करीब 50.21 लाख काम अधूरे रह गए जिन पर पहले ही 2633 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। मार्च 2025 तक मजदूरों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी लंबित थी। रिपोर्ट में मनरेगा की राशि से वाहनों की मरम्मत कराने और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मियों को भुगतान करने के मामले भी पकड़े गए। नियमों के विपरीत खर्च होने से योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की प्रक्रिया बाधित हुई और लाभुकों को समय पर भुगतान न मिलने से आर्थिक परेशानी बढ़ी। इन खामियों ने योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीएम आवास योजना में पात्र और अपात्र लाभुकों का मामला

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की ऑडिट में लाभुकों के चयन और लक्ष्य निर्धारण दोनों में बड़ी चूक सामने आई। राज्य ने 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की थी लेकिन केंद्र से सिर्फ 16.02 लाख परिवारों का लक्ष्य मिला। इससे 6.32 लाख पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए जो कुल पात्रों का करीब 28 प्रतिशत है। दूसरी तरफ लाभुक सूची में 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम शामिल कर दिए गए जिन्हें बाद में हटाया गया। योजना के तहत पूरे हो चुके करीब आठ प्रतिशत आवासों में शौचालय की सुविधा नहीं मिली। यह स्थिति तब है जब राज्य को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। पात्र परिवारों को घर न मिलने और अपात्रों के शामिल होने से योजना की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।

CAG Report: जल जीवन मिशन में लक्ष्य से काफी पीछे राज्य

जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में भी लक्ष्य और उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर पाया गया। राज्य के केवल 55 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक ही नल से जल पहुंच पाया जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 80 प्रतिशत है। 24 प्रतिशत गांवों में एक भी घर में नल का कनेक्शन नहीं था। योजना के बावजूद बड़ी आबादी पाइप से पानी की सुविधा से वंचित रही। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। रिपोर्ट में इस अंतर को गंभीर माना गया है क्योंकि पानी की कमी से स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी दोनों प्रभावित होती हैं। विभाग को लक्ष्य हासिल करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत बताई गई है।

उत्पाद और वाणिज्य कर विभाग में राजस्व वसूली की चूक

उत्पाद विभाग में निर्धारित न्यूनतम स्टॉक नहीं रखने वाले शराब विक्रेताओं पर 8.35 करोड़ रुपये का जुर्माना नहीं लगाया गया। नियमों के उल्लंघन के बावजूद दंडात्मक कार्रवाई न होने से सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ। वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी और ई-वे बिल के आंकड़ों की जांच में 343.58 करोड़ रुपये की कर देयता और इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित विसंगतियां सामने आईं। 23 बड़े करदाताओं ने आयकर रिटर्न में 95.43 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई लेकिन जीएसटी के तहत उनका पंजीकरण नहीं था। विभाग इन मामलों की समय पर पहचान कर कार्रवाई नहीं कर सका जिससे कर वसूली प्रभावित हुई। इन खामियों ने राजस्व संग्रहण प्रणाली की कमजोरी को उजागर किया है।

CAG Report: वित्तीय प्रबंधन और उपयोगिता प्रमाण-पत्रों की समस्या

राज्य की वित्तीय स्थिति पर सीएजी रिपोर्ट में पूंजीगत व्यय को लेकर चिंता जताई गई। वर्ष 2024-25 में पूंजीगत व्यय पिछले साल की तुलना में 2160 करोड़ रुपये कम हुआ। इसका असर परिसंपत्तियों के निर्माण और विकास योजनाओं की गति पर पड़ा। सबसे बड़ा सवाल उपयोगिता प्रमाण-पत्रों को लेकर है। मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे। बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद संबंधित विभाग यह प्रमाणित नहीं कर पाए कि राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ है। वित्तीय अनुशासन की कमी से पारदर्शिता प्रभावित हुई है और भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

सीएजी रिपोर्ट में उजागर हुई ये अनियमितताएं झारखंड के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन की कमजोरियों को साफ दर्शाती हैं। विभिन्न योजनाओं में लक्ष्य हासिल न होना, नियमों की अनदेखी और राजस्व नुकसान राज्य के विकास को प्रभावित कर रहे हैं। विधानसभा में रिपोर्ट पेश होने के बाद इन मुद्दों पर चर्चा और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विभागों को समयबद्ध कार्रवाई कर खामियों को दूर करने की जरूरत है ताकि योजनाओं का लाभ सही लाभुकों तक पहुंचे और राजस्व व्यवस्था मजबूत हो। पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाकर ही भविष्य में ऐसे घाटे से बचा जा सकता है।

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