Anaj Mandi Bhav 14 October 2026: देशभर की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में 14 अक्टूबर 2026 को अनाज और तिलहन का कारोबार संतुलित व सक्रिय रहा। खरीफ फसलों की नई आवक मंडियों में सुचारू रूप से जारी रहने और त्योहारी सीजन की मांग के बीच ज्यादातर अनाजों के दाम सीमित दायरे में स्थिर दर्ज किए गए। जहां गेहूं और मोटे अनाजों के भावों में मजबूती के साथ ठहराव देखा गया, वहीं दूसरी ओर तेल मिलों की मजबूत लिवाली के चलते सरसों सहित प्रमुख तिलहन फसलों में हल्की तेजी का रुख बना रहा। मंडियों में अपनी उपज लेकर पहुंच रहे किसानों को अधिकांश फसलों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर मिल रहे हैं, जिससे उत्पादकों के बीच संतोष का माहौल है।
Anaj Mandi Bhav 14 October 2026: गेहूं के भाव में स्थिरता का माहौल
उत्तर और मध्य भारत की प्रमुख अनाज मंडियों में गेहूं की दैनिक आवक सामान्य स्तर पर दर्ज की गई। आटा मिलों और थोक व्यापारियों की स्थिर मांग के चलते भावों में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिला। प्रमुख मंडियों में गेहूं का व्यापार 2,500 रुपये से लेकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में घूमता नजर आया।
उच्च गुणवत्ता वाले शरबती और लोकवन जैसे प्रीमियम गेहूं के लॉट 2,900 रुपये से ऊपर के स्तर पर बिके, जबकि सामान्य मिल क्वालिटी गेहूं का औसत मोडल रेट 2,650 रुपये से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किया गया। चूंकि रबी सीजन की नई बुवाई का समय करीब आ रहा है और घरेलू बाजार में गेहूं की खपत नियमित बनी हुई है, इसलिए किसान बाजार की मजबूती को देखते हुए अपनी जरूरत के अनुसार ही माल निकाल रहे हैं।
धान और बासमती किस्मों में भारी मांग: 1718 और 1509 के मिले अच्छे दाम
खरीफ धान की नई आवक अब पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान की मंडियों में पूरी गति पकड़ चुकी है। मंडियों में आवक का दबाव बढ़ने के बावजूद कीमतों में किसी भी प्रकार की गिरावट नहीं देखी गई, जो मांग की मजबूती को दर्शाता है। विशेष रूप से प्रीमियम बासमती किस्मों की खरीद में निर्यातकों और राइस मिलर्स की ओर से भारी दिलचस्पी दिखाई दे रही है।
हरियाणा और पंजाब की प्रमुख मंडियों में पूसा बासमती की लोकप्रिय किस्मों जैसे 1718 और 1509 के सौदे 4,000 रुपये से लेकर 4,600 रुपये प्रति क्विंटल तक के स्तर पर दर्ज किए गए। वहीं सामान्य मोटे धान (कॉमन पैडी) और पीआर किस्मों की बिक्री 2,200 रुपये से 2,800 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में हुई। सरकारी खरीद केंद्रों के साथ-साथ खुले बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतें मिलने के कारण किसान अपनी उपज को हाथों-हाथ बेचने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
सरसों और तिलहन फसलों में तेजी बरकरार: तेल मिलों की लिवाली मजबूत
तिलहन खंड में सरसों के भावों में तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। त्योहारी मांग और स्थानीय तेल पेराई इकाइयों के पास पुराने स्टॉक की कमी के कारण सॉल्वेंट प्लांट और कोल्हू संचालक सक्रिय रूप से खरीदारी कर रहे हैं। राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश की बेंचमार्क मंडियों में सरसों की ट्रेडिंग 7,400 रुपये से लेकर 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के ऊंचे स्तरों पर बनी रही।
अच्छी कंडीशन और 40 से 42 प्रतिशत तक ऑयल कंटेंट वाले सूखे दानों को 7,700 रुपये से 7,900 रुपये प्रति क्विंटल के प्रीमियम भाव मिले। इसी प्रकार मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की मंडियों में सोयाबीन के भाव भी मजबूत रुख के साथ टिके रहे। मक्का की आवक में बढ़ोतरी के बावजूद इसका व्यापार 1,800 रुपये से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में बना रहा, जिसे पोल्ट्री और स्टार्च उद्योगों से लगातार सहारा मिल रहा है।
मोटे अनाजों में कारोबार स्थिर: बाजरा और ज्वार के ताजा मंडी भाव
पोषक अनाजों (मिलेट्स) के बाजार में भी कारोबार सामान्य और संतुलित दर्ज किया गया। राजस्थान और हरियाणा की मंडियों में नई फसल आने के साथ बाजरा 2,100 रुपये से 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर स्थिर कारोबार कर रहा है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग में मोटे अनाजों की खपत बढ़ने से इसके भावों को नीचे से सहारा मिल रहा है।
ज्वार की बिक्री प्रमुख उत्पादक मंडियों में 2,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज की गई। मक्का की दैनिक आवक बढ़ने के बावजूद पोल्ट्री फीड निर्माताओं की निरंतर मांग ने कीमतों में बड़ा करेक्शन नहीं आने दिया। किसान स्थानीय स्तर पर अपने नजदीकी विपणन केंद्रों पर इन अनाजों की बिक्री सुचारू रूप से कर रहे हैं।
Anaj Mandi Bhav 14 October 2026: किसानों के लिए जरूरी बाजार सलाह और आगामी दिनों का दृष्टिकोण
कृषि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर भारत में मौसम साफ और अनुकूल रहने से आगामी दिनों में मंडियों में धान और मोटे अनाजों की आवक और अधिक बढ़ सकती है। जो किसान अपनी फसल को तुरंत बेचने की स्थिति में नहीं हैं, वे अच्छी तरह सुखाकर और छानकर भंडारण कर सकते हैं ताकि ग्रेडिंग के आधार पर और बेहतर भाव मिल सके।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था मंडियों में एक सुरक्षा घेरा प्रदान कर रही है, लेकिन खुले बाजार में मिल रहे ऊंचे दाम किसानों के लिए बेहतर आय सुनिश्चित कर रहे हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे फसल बेचने से पहले अपने जिले की कृषि उपज मंडी समिति (APMC) के आधिकारिक दैनिक भाव पोर्टल और ई-नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म पर ताजा दरों का मिलान अवश्य करें, क्योंकि गुणवत्ता, नमी के स्तर और स्थानीय मांग के आधार पर विभिन्न मंडियों के भावों में अंतर संभव है।
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