Ambala Building Collapse: हरियाणा के अंबाला जिले से रविवार को एक हृदयविदारक औद्योगिक व निर्माण हादसा सामने आया है। अंबाला शहर के अंतर्गत आने वाले धूलकोट गांव में एक तीन मंजिला निर्माणाधीन व्यावसायिक-आवासीय इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमींदोज हो गई। हादसा इतना भीषण और अप्रत्याशित था कि वहां निर्माण कार्य में जुटे मजदूरों को संभलने या भागने का लेशमात्र भी अवसर नहीं मिल सका। कंक्रीट, लोहे के सरियों और भारी ईंटों के मलबे के नीचे कई श्रमिक दब गए। घटना की तेज आवाज सुनते ही समूचे धूलकोट इलाके में कोहराम मच गया और भारी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
ताजा प्रशासनिक आंकड़ों और राहत दलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस भयावह मलबे से निकाले गए दो मजदूरों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। वहीं गंभीर रूप से घायल पांच अन्य श्रमिकों को स्थानीय नागरिकों और प्राथमिक बचाव दलों द्वारा बाहर निकालकर तत्काल सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है। मलबे के नीचे और भी श्रमिकों के दबे होने की आशंका के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पुलिस बल, दमकल विभाग के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टुकड़ियों को आधुनिक जीवन-रक्षक उपकरणों के साथ मौके पर तैनात कर दिया है।
Ambala Building Collapse: धूलकोट गांव में लेंटर डालते ही हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय श्रमिकों से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, धूलकोट गांव में स्थित इस भूखंड पर पिछले कुछ सप्ताह से तीन मंजिला भवन का द्रुत गति से निर्माण कार्य कराया जा रहा था। रविवार को शीर्ष मंजिल पर भारी कंक्रीट मिक्सर मशीनों के माध्यम से छत का लेंटर डालने की प्रक्रिया चल रही थी। उस दौरान करीब एक से डेढ़ दर्जन मजदूर भवन के विभिन्न तलों पर सरिया बांधने, सीमेंट डालने और शटरिंग संभालने के काम में संलग्न थे।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही कंक्रीट का भारी भार छत के केंद्र में पड़ा, नीचे लगाई गई अस्थाई शटरिंग और बल्लियां अचानक चटक गईं। लेंटर का वह विशालकाय हिस्सा एक झटके में नीचे गिरा और उसके प्रचण्ड दबाव से दूसरी व पहली मंजिल की कच्ची दीवारें और स्लैब भी एक-दूसरे पर गिरते चले गए। मात्र कुछ ही सेकंडों में बहुमंजिला संरचना धूल के विशाल गुबार के साथ मलबे के ढेर में तब्दील हो गई, जिससे पूरा क्षेत्र दहल उठा।
भारी जेसीबी और हाइड्रोलिक कटर से रेस्क्यू: NDRF और SDRF का मोर्चा
हादसे की सूचना मिलते ही अंबाला पुलिस के आला अधिकारी, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट और दमकल विभाग की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। संकरी गलियों और भारी कंक्रीट स्लैबों के कारण प्राथमिक बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मलबे को हटाने और फंसे हुए जीवित लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए कई जेसीबी एक्सकेवेटर और क्रेन मशीनों को तुरंत कार्य पर लगाया गया।
स्थिति की संवेदनशीलता को भांपते हुए प्रशासन ने त्वरित रूप से एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की विशेषज्ञ बचाव टीमों को तलब किया। बचाव कर्मियों ने मलबे के भीतर जीवित फंसे लोगों की हलचल का पता लगाने के लिए आधुनिक एकॉस्टिक लाइफ डिटेक्टर्स और थर्मल कैमरों का उपयोग किया। लोहे के मुड़े हुए सरियों को काटने के लिए हाइड्रोलिक कटर और स्प्रेडर की मदद ली गई ताकि मलबे के भीतर दबे लोगों को बिना किसी अतिरिक्त चोट के सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
दो मजदूरों की मौत, पांच की हालत गंभीर: अस्पतालों में अलर्ट
बचाव अभियान के शुरुआती घंटों के दौरान मलबे के निचले हिस्से में गहराई से दबे एक मजदूर को अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया, जिसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद एक अन्य श्रमिक का शव कंक्रीट स्लैब के नीचे से बरामद हुआ। दोनों मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम और शिनाख्त की विधिक कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है।
बचाए गए पांच घायल मजदूरों को एम्बुलेंस के जरिए अंबाला कैंट और सिटी के नागरिक अस्पतालों के आपातकालीन ट्रॉमा वार्ड में स्थानांतरित किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार घायलों में से दो की छाती और सिर में गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं, जिनकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को घायलों के संपूर्ण व निःशुल्क उपचार के कड़े निर्देश दिए हैं।
निर्माण मानकों की अनदेखी और सुरक्षा में चूक पर उठे गंभीर सवाल
धूलकोट की इस त्रासदी ने एक बार फिर अनियंत्रित निर्माण कार्यों, घटिया निर्माण सामग्री और श्रम सुरक्षा नियमों के खुले उल्लंघन को उजागर किया है। शुरुआती तकनीकी आकलन में यह बात सामने आ रही है कि कच्ची और हाल ही में निर्मित दीवारों पर समय से पूर्व अत्यधिक भार डाल दिया गया था, जबकि शटरिंग के लिए प्रयुक्त सपोर्टिंग जैक और लकड़ी की बल्लियां कमजोर व अपर्याप्त थीं।
नागरिकों का आरोप है कि रिहायशी क्षेत्रों में बिना स्वीकृत नक्शे, उचित संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र (Structural Stability Certificate) और बिना किसी योग्य सिविल इंजीनियर की सीधी निगरानी के बहुमंजिला ढांचे खड़े किए जा रहे हैं। निर्माण स्थल पर कार्य कर रहे मजदूरों के पास न तो सेफ्टी हेलमेट थे और न ही सुरक्षा बेल्ट जैसी कोई बुनियादी जीवन-रक्षक व्यवस्था मौजूद थी।
प्रशासनिक जांच के आदेश: दोषियों के विरुद्ध होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
अंबाला के जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद स्पष्ट किया है कि इस पूरी दुखद घटना की विस्तृत मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी। लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगर निगम के तकनीकी विशेषज्ञों की एक संयुक्त समिति इमारत के डिजाइन, प्रयुक्त सीमेंट-कंक्रीट के मिश्रण के नमूनों और संरचनात्मक खामियों का विस्तृत परीक्षण करेगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार भवन स्वामी और निर्माण का ठेका लेने वाले ठेकेदार के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं—जिसमें गैर-इरादतन मानव वध और निर्माण सुरक्षा में आपराधिक लापरवाही शामिल हैं—के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज करने की वैधानिक प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। जांच में जो भी पक्ष नियमों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
Ambala Building Collapse: मलबे की पूरी छंटाई तक अनवरत चलेगा बचाव अभियान
अंबाला के धूलकोट गांव में हुए इस वीभत्स हादसे ने कई गरीब परिवारों के भरण-पोषण करने वाले कामगारों को जीवन और मृत्यु के दोराहे पर ला खड़ा किया है। यद्यपि प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए बहुमूल्य जानें बचाने का हरसंभव प्रयास किया है, किंतु कंक्रीट के विशाल टीले की अंतिम परत हटने तक किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राहत दलों ने संकल्प व्यक्त किया है कि जब तक मलबे का एक-एक पत्थर हटाकर पूरे धरातल को साफ नहीं कर लिया जाता, तब तक यह तलाशी और बचाव अभियान निर्बाध रूप से जारी रहेगा। यह हादसा इस बात की गंभीर चेतावनी है कि निर्माण परियोजनाओं में मानकों और सुरक्षा से किया गया कोई भी समझौता अंततः निर्दोष जिंदगियों की बलि ले लेता है।
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