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अहोई अष्टमी पूजा सामग्री: 1 नवंबर के व्रत के लिए पूरी सूची, भोग और तैयारी का आसान तरीका

अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026 को है। पूजा से एक दिन पहले सामग्री तैयार कर लें। जानिए पूजा की पूरी सूची, भोग में क्या बनाएं, बायना की परंपरा और आखिरी समय की भागदौड़ से बचने के टिप्स।

अहोई अष्टमी पूजा सामग्री की सूची का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • अहोई अष्टमी का व्रत माताएं संतान के कल्याण के लिए रखती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार 2026 में यह व्रत रविवार, 1 नवंबर को है।
  • पूजा के बाद सास या घर की बड़ी महिला को बायना देने की परंपरा है।
  • शाम को पूजा का समय अपने शहर के पंचांग से देखें। पूजा के बाद कथा सुनें, फिर तारे दिखने पर अर्घ्य दें।
  • हां, कई परिवारों में करवा चौथ वाला करवा ही अहोई अष्टमी की पूजा में इस्तेमाल होता है।

अहोई अष्टमी का व्रत माताएं संतान के कल्याण के लिए रखती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार 2026 में यह व्रत रविवार, 1 नवंबर को है। पूजा शाम को होती है और फिर तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। व्रत के दिन सामग्री जुटाने की भागदौड़ से बचने के लिए एक दिन पहले तैयारी कर लेना अच्छा है। यहां अहोई अष्टमी पूजा सामग्री की पूरी सूची दी गई है।

पूजा स्थान के लिए

  • अहोई माता का चित्र, जो दीवार पर बनाया या कागज पर लगाया जाता है
  • गेरू और चावल का घोल, अगर चित्र खुद बनाना है
  • चौकी या पाटा
  • लाल कपड़ा
  • गंगाजल या साफ जल
मुख्य बातें: अहोई अष्टमी पूजा सामग्री की सूची का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

पूजा की थाली

  • दीपक और घी या तेल
  • रूई की बाती
  • धूप या अगरबत्ती
  • रोली, कुमकुम और हल्दी
  • अक्षत, यानी साबुत चावल
  • फूल और माला
  • कलावा
  • सिंदूर

व्रत से जुड़ी खास चीजें

  • स्याहु माला, जो चांदी के मोतियों या स्याहु की आकृति वाली होती है
  • जल से भरा करवा या लोटा, जिसका जल तारों को अर्घ्य देने में काम आता है
  • कथा सुनते समय हाथ में रखने के लिए गेहूं या चावल के कुछ दाने
  • कई परिवारों में चांदी का छोटा सिक्का

यह भी पढ़ें: अहोई माता का चित्र और स्याहु माला: अहोई अष्टमी की पूजा में इनका महत्व और तैयारी का तरीका | अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य: व्रत खोलने का तरीका, करवे के जल की परंपरा और जरूरी नियम

भोग की सामग्री

भोग परिवार की परंपरा के अनुसार बनता है। आमतौर पर ये चीजें बनाई जाती हैं:

  • पूड़ी
  • सूजी या आटे का हलवा
  • पुए या गुलगुले
  • चने या कोई सूखी सब्जी
  • मिठाई और फल

बायना की तैयारी

पूजा के बाद सास या घर की बड़ी महिला को बायना देने की परंपरा है। इसमें आमतौर पर ये चीजें होती हैं:

  • भोग के पकवान
  • कुछ मिठाई और फल
  • कपड़े या श्रृंगार का सामान, अपनी सामर्थ्य के अनुसार
  • दक्षिणा

सास न हों, तो परिवार की किसी बुजुर्ग महिला या पुरोहित की पत्नी को बायना देने की परंपरा है।

एक दिन पहले क्या करें

  • पूजा स्थान साफ करें और चित्र तैयार रखें
  • स्याहु माला निकालकर साफ करें
  • भोग की सामग्री खरीद लें और आटा या सूजी पहले से निकाल लें
  • थाली सजाकर रख लें
  • करवा या लोटा धोकर रखें

पूजा के दिन

शाम को पूजा का समय अपने शहर के पंचांग से देखें। पूजा के बाद कथा सुनें, फिर तारे दिखने पर अर्घ्य दें। व्रत के बाद पहले पानी और फिर हल्का भोजन लें।

सेहत का ध्यान

गर्भवती महिलाएं, नई माताएं या बीमार महिलाएं निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। ऐसी स्थिति में फलाहार के साथ भी व्रत रखा जा सकता है।

क्या अहोई अष्टमी पर करवा चौथ वाला करवा इस्तेमाल कर सकते हैं?

हां, कई परिवारों में करवा चौथ वाला करवा ही अहोई अष्टमी की पूजा में इस्तेमाल होता है। अपने परिवार की परंपरा देख लें।

अहोई अष्टमी पर क्या दान करें?

कई परिवार इस दिन बच्चों के कपड़े, किताबें या भोजन किसी जरूरतमंद परिवार को दान करते हैं। व्रत का भाव संतान का कल्याण है, इसलिए दूसरे बच्चों की मदद करना भी इस दिन अच्छा माना जाता है।

स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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