Ladakh Flower Garden: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का स्मरण होते ही अमूमन आंखों के सम्मुख बर्फ की सफेद चादर ओढ़े उत्तुंग पर्वत शिखर, सर्द हवाएं और मीलों दूर तक फैला भूरा और बंजर शीत मरुस्थल उभर आता है। हालांकि अब लद्दाख प्रशासन ने प्रकृति के इस कठोर परिदृश्य में रंगों का एक ऐसा मनोहारी संसार रच दिया है, जिसने बंजर वादियों की पूरी परिभाषा ही बदल दी है। लेह जनपद के चोगलमसर और स्टकना में समुद्र तल से लगभग 10,600 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर दो विशाल पुष्प क्षेत्र (ट्विन फ्लावर फील्ड्स) विकसित किए गए हैं, जहां 25 लाख से अधिक रंग-बिरंगे फूल अपनी खुशबू बिखेर रहे हैं।

शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 से इन दोनों मनोहारी पुष्प वाटिकाओं को आम जनता, स्थानीय नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए औपचारिक रूप से खोल दिया गया है। लद्दाख प्रशासन ने इन दोनों क्षेत्रों को विश्व में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित ‘ट्विन फ्लावर फील्ड्स’ घोषित किया है। शीत मरुस्थल के सीने पर खिला यह पुष्प संसार न केवल पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा है, बल्कि लद्दाख के पर्यटन और ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर भी सिद्ध होने जा रहा है।

Ladakh Flower Garden: 40 एकड़ में 25 लाख फूलों की बहार

चोगलमसर और स्टकना में विकसित किए गए इन जुड़वां पुष्प उद्यानों का कुल भौगोलिक विस्तार लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पूरे भूभाग पर 25 लाख से अधिक सजावटी और व्यावसायिक प्रजातियों के फूल रोपे गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से करीब 24 लाख लिलियम और लगभग एक लाख बहुमूल्य ग्लैडियोलस के पौधे सम्मिलित हैं।

गार्डन में कदम रखते ही चारों ओर पीले, दूधिया सफेद, चटक नारंगी और गहरे लाल रंगों की कतारबद्ध क्यारियां सैलानियों का मन मोह लेती हैं। कठोर पर्वतीय हवाओं और विरल ऑक्सीजन के बीच इन नाज़ुक फूलों का इतनी सघनता से लहलहाना आधुनिक फ्लोरीकल्चर तकनीक और लद्दाख कृषि विभाग के अथक वैज्ञानिक परिश्रम का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

मात्र ₹25 में विश्वस्तरीय दीदार: रखरखाव में प्रयुक्त होगा टिकट शुल्क

लद्दाख प्रशासन ने इस अद्वितीय पर्यटन स्थल को समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए सुलभ और किफायती बनाए रखने के उद्देश्य से प्रवेश शुल्क की दरें अत्यंत सांकेतिक रखी हैं। वयस्क पर्यटकों और नागरिकों के लिए प्रवेश टिकट की दर मात्र 25 रुपये निर्धारित की गई है, जबकि बच्चों के लिए यह शुल्क केवल 10 रुपये रखा गया है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि टिकट खिड़की से एकत्र होने वाला यह संपूर्ण राजस्व किसी व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि इन फूलों के मैदानों के दैनिक रखरखाव, ड्रिप इरिगेशन प्रणाली के संचालन, जैविक पोषण और साफ-सफाई की व्यवस्था को सुदृढ़ रखने में व्यय किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि यह परियोजना वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनी रहे।

चोगलमसर में खिले फूल, स्टकना में अक्टूबर तक सजेगा संसार

इन जुड़वां पुष्प क्षेत्रों की रोपाई और विकास की कार्ययोजना को दो अलग-अलग चरणों में वैज्ञानिक ढंग से क्रियान्वित किया गया है। चोगलमसर फ्लावर फील्ड में पौधारोपण की प्रक्रिया 16 जुलाई से प्रारंभ की गई थी। ठंडे मौसम के अनुकूल विशेष किस्मों के चयन के चलते मात्र दो माह के भीतर यानी सितंबर के पहले सप्ताह से ही यहां लिलियम और ग्लैडियोलस की कलियां चटकने लगीं और वर्तमान में यह क्षेत्र पूरी तरह पुष्पित हो चुका है।

दूसरी ओर स्टकना स्थित फ्लावर फील्ड में अगस्त माह के दौरान लगभग 14 लाख लिलियम के कंद रोपे गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार स्टकना में इन फूलों के खिलने का चरम काल अक्टूबर के अंतिम सप्ताह के आसपास प्रारंभ होगा। इस क्रमिक रोपण व्यवस्था का लाभ यह होगा कि लद्दाख आने वाले पर्यटकों को सितंबर से लेकर नवंबर के शुरुआती दिनों तक दोनों क्षेत्रों में बारी-बारी से फूलों की जीवंत छटा देखने का निरंतर अवसर मिलता रहेगा।

व्यावसायिक फ्लोरीकल्चर और किसानों की आय बढ़ाने का मॉडल

इस परियोजना का खाका केवल एक पर्यटन स्थल के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में लद्दाख के किसानों की आय को बहुगुणित करने का एक बड़ा आर्थिक दृष्टिकोण समाहित है। लद्दाख में पारंपरिक रूप से जौ, गेहूं और कुछ स्थानीय सब्जियों की ही सीमित खेती हो पाती है, जिसकी उत्पादकता और बाजार मूल्य सीमित रहता है।

प्रशासन इस परियोजना के माध्यम से लद्दाख के किसानों और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों यानी फ्लोरीकल्चर की ओर प्रेरित कर रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय थोक पुष्प बाजारों में लिलियम के एक डंठल (कट फ्लावर) की कीमत 60 से 70 रुपये तक प्राप्त होती है। यदि स्थानीय किसान अपनी छोटी जोतों में भी वैज्ञानिक पद्धति से इन विदेशी फूलों की खेती प्रारंभ करते हैं, तो वे अपनी पारंपरिक उपज की तुलना में कई गुना अधिक शुद्ध लाभ अर्जित करने में सक्षम होंगे।

प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र: युवाओं को सिखाई जाएगी आधुनिक तकनीक

चोगलमसर के पुष्प क्षेत्र को भविष्य में एक आधुनिक कृषि प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक प्रदर्शन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां लेह और कारगिल के युवा किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और कृषि स्नातकों को फ्लोरीकल्चर से जुड़े प्रत्येक चरण का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस केंद्र में वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी का शोधन, ग्रीनहाउस प्रबंधन, लिलियम, ग्लैडियोलस और ट्यूलिप जैसी विदेशी प्रजातियों का अंकुरण, कोल्ड स्टोरेज तकनीक और फसल कटाई के उपरांत फूलों की वैज्ञानिक पैकेजिंग (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट) की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इससे युवा केवल फूलों का उत्पादन ही नहीं करेंगे, बल्कि वे देश के प्रमुख महानगरों और विदेशों में निर्यात के लिए आवश्यक गुणवत्ता मानकों को भी समझ सकेंगे।

प्रथम वर्ष कृषि विभाग की देखरेख, आगे स्वयं सहायता समूहों को कमान

परियोजना की स्थिरता और सामाजिक सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने एक त्रिस्तरीय परिचालन मॉडल तैयार किया है। प्रथम वर्ष में इस विशाल परियोजना के तकनीकी विकास, सिंचाई, पोषण और प्राथमिक प्रबंधन का संपूर्ण जिम्मा लद्दाख का कृषि विभाग स्वयं संभाल रहा है।

फूलों के पूर्ण विकसित होने और बाजार व्यवस्था सुचारू होने के उपरांत इस पूरी परियोजना का दैनिक संचालन स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और पंजीकृत कृषि सहकारी समितियों को सौंप दिया जाएगा। कृषि विभाग इन समितियों को ब्रांडिंग, मार्केटिंग और लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान करेगा, जिससे अगले वर्ष से स्थानीय समुदाय स्वयं खेती, कटाई, पैकेजिंग और विक्रय का कार्य संभालकर सामूहिक आर्थिक समृद्धि की दिशा में अग्रसर हो सकेगा।

Ladakh Flower Garden: निष्कर्ष

10,600 फीट की बर्फीली ऊंचाई पर 25 लाख फूलों का यह अद्भुत संगम लद्दाख के विकास और पर्यटन इतिहास का एक नया स्वर्णिम अध्याय है। मात्र 25 रुपये के नाममात्र टिकट पर दुनिया के सबसे ऊंचे ट्विन फ्लावर फील्ड्स का यह अनुभव सैलानियों के लिए अविस्मरणीय स्मृति बन रहा है। प्रकृति, विज्ञान और जनभागीदारी का यह अनूठा प्रयोग यह सिद्ध करता है कि दूरदर्शी सोच और आधुनिक कृषि तकनीकों के सहारे बंजर पहाड़ियों को भी रंग-बिरंगे उपवनों में बदला जा सकता है। आने वाले समय में यह पहल लद्दाख को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले कट-फ्लावर निर्यात का भी एक प्रमुख केंद्र बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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