परिचय

श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के प्रेम व रक्षा के वचन का प्रतीक है।

शुभ मुहूर्त एवं समय

श्रावण पूर्णिमा के दिन, भद्रा काल टालकर शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जाती है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • राखी
  • रोली-अक्षत
  • मिठाई
  • आरती की थाली

पूजा विधि (चरण दर चरण)

  1. बहन भाई को आसन पर बिठाकर तिलक करे।
  2. अक्षत लगाकर राखी बांधे।
  3. आरती उतारकर मिठाई खिलाए।
  4. भाई रक्षा का वचन देकर बहन को उपहार दे।

मंत्र

मुख्य मंत्र: येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

लाभ एवं महत्व

भाई-बहन के रिश्ते में मजबूती आती है, भाई की सुरक्षा व दीर्घायु की कामना पूर्ण होती है।

सावधानियां

भद्रा काल में राखी बांधना वर्जित माना जाता है, पंचांग देखकर शुभ समय चुनें।

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