Rajasthan UCC Bill 2026: राजस्थान में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी बिल 2026 को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विधेयक में बेटियों को विवाहित या अविवाहित होने की स्थिति में पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। वहीं अलग-अलग धर्मों के युवक-युवतियों के लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर विधि विशेषज्ञों ने स्पष्टता की कमी बताई है।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने हाल ही में विधानसभा में यह विधेयक पेश किया। इसमें 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं। विवाह और तलाक के मामलों में अनुसूचित जनजाति को छोड़कर सभी धर्म और जाति की महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिल सकेंगे।

Rajasthan UCC Bill 2026: बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार

यूसीसी विधेयक के अनुसार बेटी विवाहित हो या अविवाहित मायके में बेटों के समान उत्तराधिकार की हकदार होगी। वसीयत विरासत और पैतृक संपत्ति से जुड़े अधिकार महिलाओं को पुरुषों के बराबर मिलेंगे। इससे बेटियों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है। सभी धर्म और जाति की महिलाओं को ये अधिकार उपलब्ध होंगे। अनुसूचित जनजाति को इस प्रावधान से अलग रखा गया है।

लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चों को वैध संतान का दर्जा

विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान जन्मे बच्चों को वैध संतान यानी धर्मज माना जाएगा। ऐसे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति और भरण-पोषण का पूर्ण अधिकार मिलेगा। यह प्रावधान बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को भी शुरुआत और समाप्ति की लिखित सूचना देकर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने पर जुर्माना हो सकता है।

Rajasthan UCC Bill 2026: अलग धर्म के जोड़ों के लिव-इन पर स्पष्टता की कमी

विधि विशेषज्ञों के अनुसार स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर दूसरे धर्म के जीवनसाथी से शादी करना आसान होगा। लेकिन अलग-अलग धर्म के युवक-युवतियों के स्वेच्छा से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के मामलों में स्पष्टता का अभाव है। विशेषज्ञों ने इस बिंदु पर और विस्तार से प्रावधान की जरूरत बताई है। विधेयक में कई जगहों पर व्याख्या की मांग उठ रही है।

पुत्रवधू के अधिकारों को लेकर भी सवाल

विधि के जानकार पुत्रवधू को संपत्ति में मायके और ससुराल दोनों जगह मिलने वाले अधिकारों को लेकर स्पष्टता की कमी बता रहे हैं। विवाहित बेटी को मायके में और पुत्रवधू के रूप में ससुराल में समान अधिकार मिल सकेंगे। ऐसे में उसके दोनों पक्षों के प्रति दायित्व भी होंगे। इस पहलू पर और विस्तार से प्रावधान की जरूरत महसूस की जा रही है।

Rajasthan UCC Bill 2026: विवाह पंजीकरण अनिवार्य और जुर्माना प्रावधान

विवाह संपन्न होने के 60 दिन के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसकी पालना न होने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना होगा। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों को भी शुरुआत और समाप्ति के बारे में लिखित सूचना देकर पंजीकरण कराना जरूरी है। ये नियम सामाजिक व्यवस्था को व्यवस्थित रखने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। पंजीकरण से कानूनी सुरक्षा बढ़ेगी।

आरजीएचएस योजना पर कर्मचारी संगठनों की मांग

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विवाहित बेटी को मायके और पुत्रवधू के रूप में ससुराल दोनों जगह समान अधिकार मिल सकेंगे। ऐसे में महिला कार्मिक के मामले में राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना में मां-बाप और सास-ससुर दोनों को स्वास्थ्य कवरेज का लाभ देना चाहिए। सरकार ने पहले दोनों में से एक का चयन करने का विकल्प लिया था जिसे वापस लिया जाए।

Rajasthan UCC Bill 2026: विधेयक की संरचना और आगे की प्रक्रिया

यूसीसी विधेयक में 404 धाराएं और विभिन्न प्रावधानों के संबंध में सात अनुसूचियां हैं। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इसे विधानसभा में पेश किया। विधेयक पर अब चर्चा और संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाले प्रावधानों पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। साथ ही कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता की मांग भी उठ रही है।

राजस्थान यूसीसी बिल 2026 में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार दिए गए हैं चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित। लिव-इन में जन्मे बच्चों को वैध संतान का दर्जा मिलेगा और उन्हें संपत्ति व भरण-पोषण का पूर्ण अधिकार होगा। विवाह और लिव-इन दोनों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। अलग-अलग धर्म के जोड़ों के लिव-इन और पुत्रवधू के दोहरे अधिकारों को लेकर विधि विशेषज्ञों ने स्पष्टता की कमी बताई है। विधेयक में 404 धाराएं हैं और इसे विधानसभा में पेश किया जा चुका है। महिलाओं के समान अधिकारों की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है लेकिन कुछ प्रावधानों पर और स्पष्टता की जरूरत बनी हुई है।

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