Unnao News: उन्नाव जिले के बीघापुर विकासखंड में आज रोजगार की नई उम्मीद जगी। रैथाना गांव के एक गेस्ट हाउस में विशाल रोजगार मेला लगा। पडरी गांव के अनुराग त्रिवेदी ने इस मेले का आयोजन किया। हजारों युवा सुबह से ही यहां जुटने लगे। देखने पर लगता है कि बेरोजगारी से जूझ रहे युवाओं के लिए यह मेला राहत की किरण बनकर आया। आयोजक का लक्ष्य करीब 2000 युवाओं को नौकरी दिलाना है।

आज दोपहर तक करीब 500 युवाओं का चयन हो चुका है। अब सवाल यह है कि बाकी लक्ष्य कैसे पूरा होगा और कंपनियां कितने और उम्मीदवार चुनेंगी।

मेले की शुरुआत और युवाओं की भारी भीड़

बीघापुर क्षेत्र में रोजगार के अवसर लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। आज रैथाना गांव के गेस्ट हाउस में जब मेला शुरू हुआ तो युवा सुबह से ही पहुंचने लगे। पडरी गांव निवासी अनुराग त्रिवेदी ने खुद इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने बताया कि उनका मकसद लगभग एक हजार युवाओं को विभिन्न कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराना है। शनिवार और रविवार की शाम तक यह लक्ष्य पूरा हो जाने की उम्मीद है।

दोपहर तक पचास युवाओं को नौकरी मिल चुकी थी। भीड़ इतनी थी कि पंजीकरण की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। स्थानीय युवाओं के चेहरे पर उम्मीद साफ झलक रही थी। कई लोग दूर-दूर से आए थे। मामला कुछ इस तरह से था कि एक तरफ मौका था तो दूसरी तरफ प्रक्रिया में समय लग रहा था।

Unnao News: बड़ी कंपनियों की भागीदारी और चयन की प्रक्रिया

इस रोजगार मेले में कई नामी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। टाटा डेलराइव, केप इलेक्ट्रिक, पीएनजी, फ्लिपकार्ट, मारुति, इंस्ट्रामार्ट और टाटा इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियां अपने प्रतिनिधि भेजकर युवाओं का चयन कर रही हैं। चयन प्रक्रिया अलग-अलग बेंचों पर चल रही है। इसी वजह से पंजीकरण में ज्यादा समय लग रहा है। फिर भी चयन शुरू हो चुका है। राजकुमार का चयन हैदराबाद स्थित पीएनजी कंपनी में हुआ। जमीपुर निवासी गौरव तिवारी फ्लिपकार्ट कंपनी में चुने गए। अमन को एसबीआई में गार्ड के पद पर जगह मिली। ये नाम स्थानीय स्तर पर चर्चा में आ गए हैं।

जानकार बताते हैं कि कंपनियां अलग-अलग पदों के लिए उम्मीदवार देख रही हैं। कुछ पद तकनीकी हैं तो कुछ सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े। युवा अपना बायोडाटा लेकर कतार में खड़े दिख रहे थे। प्रक्रिया में देरी जरूर हो रही है लेकिन चयन जारी है।

स्थानीय युवाओं के लिए नई उम्मीद की किरण

उन्नाव जैसे इलाके में रोजगार हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। बीघापुर के आसपास के गांवों से युवा शहरों की ओर पलायन करते दिखते हैं। आज का यह मेला उसी पलायन को रोकने की दिशा में एक प्रयास लगता है। अनुराग त्रिवेदी जैसे स्थानीय लोगों के प्रयास से युवाओं को घर के पास मौका मिल रहा है। शनिवार दोपहर तक पचास चयन हो जाना छोटी उपलब्धि नहीं। बाकी युवा अब इंतजार कर रहे हैं कि उनकी बारी कब आएगी। कुछ युवा पहली बार ऐसे मेले में शामिल हुए थे।

उनका कहना था कि पहले कभी इतनी कंपनियां एक जगह नहीं आईं। मेला दो दिन का है। रविवार शाम तक लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर एक हजार युवाओं को नौकरी मिल गई तो इलाके में सकारात्मक संदेश जाएगा।

Unnao News: पंजीकरण में देरी और आयोजकों की चुनौतियां

पंजीकरण प्रक्रिया अलग-अलग बेंचों पर होने से चयन में कुछ देरी आ रही है। युवा लंबी कतारों में खड़े हैं। फिर भी माहौल उत्साही बना हुआ है। अनुराग त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे और रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे। उनका मकसद ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक पहुंच बनाना है। एक दिन में इतनी भीड़ संभालना आसान नहीं। व्यवस्थाएं सीमित संसाधनों के साथ चल रही हैं। गेस्ट हाउस का परिसर युवाओं से भरा पड़ा है। पानी और बैठने की व्यवस्था भी की गई है।

देरी के बावजूद चयन रुक नहीं रहा। कंपनियों के प्रतिनिधि लगातार इंटरव्यू ले रहे हैं। कुछ युवा चयन के बाद खुशी जाहिर कर रहे थे। उनका सपना अब हकीकत बनने वाला है।

रोजगार मेले का स्थानीय प्रभाव और आगे की राह

बीघापुर जैसे विकासखंड में जब कोई स्थानीय व्यक्ति खुद आगे आकर ऐसा आयोजन करता है तो असर अलग होता है। अनुराग त्रिवेदी पडरी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने क्षेत्र की जरूरत समझी और मेला लगाया। हजारों युवा पहुंचना साबित करता है कि मांग कितनी ज्यादा है। कंपनियां भी रुचि दिखा रही हैं। टाटा, मारुति, फ्लिपकार्ट जैसी नामी कंपनियों का आना युवाओं का भरोसा बढ़ाता है। पीएनजी जैसी कंपनी हैदराबाद से जुड़ी है। दूर के शहरों में नौकरी का मौका मिलना कई परिवारों के लिए बड़ी बात है।

एसबीआई में गार्ड की नौकरी स्थानीय स्तर पर स्थिरता देगी। मेला अभी जारी है। रविवार को और चयन होने की उम्मीद है। अगर लक्ष्य पूरा हुआ तो यह इलाके के लिए मिसाल बन सकता है।

Unnao News: भविष्य में और मेले की योजना

अनुराग त्रिवेदी ने साफ कहा कि यह आखिरी मेला नहीं है। आगे भी ऐसे आयोजन होंगे। ज्यादा युवाओं को मौका मिले। बेरोजगारी की समस्या एक दिन में नहीं सुलझेगी। लेकिन लगातार प्रयास से बदलाव आ सकता है। बीघापुर क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। आज का मेला उसी दिशा में एक कदम है। युवा अपना भविष्य संवारने के लिए तैयार दिख रहे हैं। कंपनियां भी स्थानीय प्रतिभा तलाश रही हैं।

प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। पंजीकरण को तेज किया जा सकता है। फिर भी शुरुआत अच्छी रही। दोपहर तक पचास चयन हो जाना उत्साह बढ़ाने वाला है।

मेले में शामिल युवा अलग-अलग गांवों से आए हैं। कुछ पढ़े-लिखे हैं तो कुछ स्किल वाले। कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से चुन रही हैं। राजकुमार, गौरव तिवारी और अमन जैसे नाम अब उदाहरण बन गए हैं। बाकी युवा भी उन्हीं की तरह मौका पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। माहौल सकारात्मक है। थोड़ी देरी के बावजूद कोई निराश नहीं दिख रहा। आयोजक लगातार निगरानी कर रहे हैं। व्यवस्था सुचारू रखने की कोशिश हो रही है।

उन्नाव जिले में रोजगार के ऐसे प्रयास पहले भी हुए हैं लेकिन इतने बड़े स्तर पर स्थानीय स्तर से आयोजन कम ही दिखता है। अनुराग त्रिवेदी का यह कदम सराहनीय है। युवा अब घर बैठे इंतजार करने के बजाय मौके तलाश रहे हैं। मेला दो दिन चलेगा। रविवार शाम तक तस्वीर और साफ होगी। कितने युवाओं को अंतिम रूप से नौकरी मिली यह आंकड़ा महत्वपूर्ण होगा।

बीघापुर के रैथाना गांव में आज शुरू हुए रोजगार मेले ने हजारों युवाओं को एक मंच पर ला दिया। अनुराग त्रिवेदी के आयोजन में एक हजार नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है। शनिवार दोपहर तक पचास युवाओं का चयन हो चुका है।

टाटा डेलराइव, फ्लिपकार्ट, मारुति समेत कई कंपनियां भाग ले रही हैं। पंजीकरण में देरी जरूर हो रही है लेकिन चयन जारी है। भविष्य में और मेले लगाने की योजना है। अब सबकी नजर रविवार के चयन और अंतिम आंकड़ों पर टिकी है। मेले की आगे की प्रगति अभी सामने आनी बाकी है।

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