Rahul Gandhi Protest: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर शुक्रवार को उस समय भारी राजनीतिक हलचल मच गई, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अचानक थाने पहुंच गए। उनके साथ 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब और उनका परिवार भी मौजूद था। साहिल लोचब वही छात्र हैं, जिन्होंने आरोप लगाया है कि बीते 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा चलाई गई पैलेट गन के छर्रे लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। राहुल गांधी ने डीसीपी कार्यालय और थाना परिसर में अधिकारियों से मिलकर मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और अब तक की जांच प्रगति का ब्योरा मांगा। पुलिस प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई का ठोस आश्वासन न मिलने के बाद राहुल गांधी थाने के बाहर ही जमीन पर धरने पर बैठ गए।
यह पूरा घटनाक्रम राजधानी में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन और उस दौरान सुरक्षा बलों द्वारा किए गए बल प्रयोग के विवाद को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में अध्ययनरत नजफगढ़ निवासी साहिल लोचब का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उन पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिसमें उनके शरीर में सैकड़ों छर्रे धंस गए और उनकी एक आंख की रोशनी लगभग समाप्त होने के कगार पर पहुंच गई।
Rahul Gandhi Protest: जंतर-मंतर छात्र आंदोलन और पैलेट गन के उपयोग पर गहराया विवाद
इस पूरे मामले की जड़ें 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आयोजित हुए एक विशाल छात्र प्रदर्शन से जुड़ी हुई हैं। विभिन्न छात्र संगठनों और युवा मंचों के आह्वान पर देश भर से आए छात्र नीट (NEET) प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकालने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान संसद मार्ग के निकट पुलिस बैरिकेड्स पर छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच भारी गतिरोध उत्पन्न हो गया था।
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा लाठीचार्ज, पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया। इसी दौरान आरोप लगा कि भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन से छर्रे दागे गए। प्रदर्शन में शामिल साहिल लोचब गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मेडिकल जांच और अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार उनके शरीर में दो सौ से अधिक छर्रे पाए गए, जिनमें से तीन छर्रे सीधे उनकी आंख के नाजुक हिस्से में लगे। उन्हें तुरंत लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और बाद में एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने आंख की रोशनी स्थायी रूप से चले जाने की गंभीर आशंका व्यक्त की।
थाने पहुंचे राहुल गांधी, जांच में देरी और FIR न होने पर उठाए कड़े सवाल
शुक्रवार की सुबह राहुल गांधी पीड़ित छात्र साहिल, उनकी माता और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ पहले कनॉट प्लेस और फिर संसद मार्ग स्थित पुलिस उपायुक्त (DCP) कार्यालय पहुंचे। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार साहिल लोचब की ओर से घटना के संबंध में 14 अगस्त और 17 अगस्त को दो बार औपचारिक लिखित शिकायतें दी गई थीं, परंतु पुलिस ने न तो औपचारिक एफआईआर दर्ज की और न ही मामले की जांच के लिए किसी जांच अधिकारी (IO) की नियुक्ति की जानकारी साझा की।
अधिकारियों से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया में हो रही हीलाहवाली पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक युवा छात्र न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। राहुल गांधी ने साहिल के शरीर से निकाले गए छर्रों के नमूने और एम्स की मेडिकल रिपोर्ट्स को सार्वजनिक रूप से दिखाते हुए सवाल किया कि यदि पुलिस ने फायरिंग नहीं की तो छात्र के शरीर में इतने छर्रे कहां से आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक छात्र की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की सुरक्षा का प्रश्न है।
Rahul Gandhi Protest: थाने के बाहर जमीन पर शुरू हुआ धरना, प्रियंका गांधी सहित शीर्ष नेता पहुंचे
पुलिस अधिकारियों से संतोषजनक उत्तर न मिलने के पश्चात राहुल गांधी ने संसद मार्ग थाने के मुख्य द्वार के बाहर जमीन पर बैठकर शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक पीड़ित छात्र की शिकायत पर नियमित धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौके पर पहुंचीं और पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें हर संभव कानूनी और नैतिक सहयोग का भरोसा दिलाया।
कुछ ही देर में जयराम रमेश, सलमान खुर्शीद, अधीर रंजन चौधरी सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता संसद मार्ग थाने के बाहर एकत्रित हो गए। माहौल को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा घेरा तैयार किया तथा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को तैनात किया गया। धरने के दौरान कार्यकर्ताओं ने बापू के प्रिय भजनों का गायन और प्रतीकात्मक चरखा चलाकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया, जिससे संसद मार्ग का इलाका दिनभर छावनी में तब्दील नजर आया।
पीड़ित परिवार का दर्द और निष्पक्ष जांच की मांग
थाने के बाहर मौजूद साहिल लोचब ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे अपने हाथों में तिरंगा लेकर छात्रों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे, तभी अचानक उन पर छर्रे दागे गए। साहिल की मां ने रोते हुए कहा कि वे एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और बेटे की उच्च शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे थे, परंतु इस घटना ने पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया है।
साहिल के परिजनों ने आरोप लगाया कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पुलिस प्रशासन उनकी शिकायत दर्ज करने से लगातार बचता रहा है। राहुल गांधी ने इस संदर्भ में सोशल मीडिया पर भी बयान जारी कर कहा कि देश की राजधानी में अपने अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों पर इस प्रकार की क्रूरता किसी भी सभ्य लोकतंत्र में स्वीकार नहीं की जा सकती।
सत्तारूढ़ दल का पलटवार और दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण
इस पूरे राजनीतिक विवाद पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और दिल्ली पुलिस की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सत्ताधारी दल के प्रवक्ताओं ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह एक संवेदनशील मामले में अनावश्यक राजनीति कर रहा है और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है। भाजपा का कहना है कि सुरक्षा बलों ने केवल कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित मानकों के तहत न्यूनतम बल का प्रयोग किया था।
वहीं दिल्ली पुलिस ने अपने पूर्व बयानों को दोहराते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर भीड़ नियंत्रण के दौरान किसी भी प्रकार की गैर-कानूनी पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे प्राप्त शिकायतों की प्रारंभिक तकनीकी और कानूनी जांच कर रहे हैं तथा नियमों के अनुरूप ही विधिक कदम उठाए जाएंगे।
Rahul Gandhi Protest: संसद से सड़क तक गरमाया पैलेट गन विवाद, आगे की राह
यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट तक भी पहुंच चुका है, जहां नागरिक प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन और अत्यधिक बल प्रयोग के नियमन को लेकर याचिकाएं विचाराधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इससे पूर्व संबंधित एजेंसियों से भीड़ प्रबंधन और ‘ग्रेडेड यूज ऑफ फोर्स’ संबंधी स्पष्ट प्रोटोकॉल पेश करने को कहा था।
राहुल गांधी के धरने पर बैठने से यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्ष इस मुद्दे को आसानी से शांत नहीं होने देगा। साहिल लोचब का मामला अब छात्र सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों की राष्ट्रीय बहस में तब्दील हो चुका है। जब तक मामले में औपचारिक एफआईआर और विभागीय जांच की आधिकारिक रूपरेखा तय नहीं होती, तब तक राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह तकरार और तेज होने के पूरे आसार हैं।
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