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PM Surya Ghar Yojana: पीएम सूर्य घर योजना का आवेदन रिजेक्ट हो गया? घबराएं नहीं, ये गलतियां सुधारकर दोबारा करें अप्लाई

PM Surya Ghar Yojana: पीएम सूर्य घर योजना का आवेदन रिजेक्ट हो गया? घबराएं नहीं, ये गलतियां सुधारकर दोबारा करें अप्लाई
PM Surya Ghar Yojana

सारांश

  • PM Surya Ghar Yojana: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में सब्सिडी पाने के लिए हजारों लोगों ने आवेदन किया है।
  • पैनल की गुणवत्ता भी जांच में आती है। योजना के तहत सिर्फ सरकार की एएलएमएम सूची में शामिल सोलर मॉडल और मेड इन इंडिया यानी डीसीआर पैनल ही मान्य हैं।
  • अगर बिजली बिल पर स्वीकृत लोड दो किलोवाट है और किसी ने पांच किलोवाट का सोलर प्लांट लगा लिया तो डिस्कॉम की फिजिबिलिटी रिपोर्ट रिजेक्ट हो जाएगी।
  • एक ही पते पर कई कनेक्शन होने पर डुप्लीकेट एप्लीकेशन का फ्लैग लग जाता है।

PM Surya Ghar Yojana: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में सब्सिडी पाने के लिए हजारों लोगों ने आवेदन किया है। लेकिन कई आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया जा रहा है। छोटी-मोटी कागजी गलती या तकनीकी खामी की वजह से सब्सिडी अटक जाती है। घबराने की जरूरत नहीं है। ज्यादातर कारण ऐसे हैं जिन्हें सुधारकर दोबारा सबमिट किया जा सकता है। आखिर किन वजहों से अर्जी खारिज हो रही है?

केंद्र सरकार की इस योजना में अब तक लाखों लोग आवेदन कर चुके हैं। बिजली वितरण कंपनियां और नेशनल पोर्टल सख्त जांच करते हैं। टाटा पावर की वेबसाइट के अनुसार कई अर्जियों को हरी झंडी नहीं मिल पाती। सही जानकारी होने पर दोबारा मौका मिल जाता है।

PM Surya Ghar Yojana: वेंडर और सोलर पैनल से जुड़ी सबसे बड़ी गलतियां

सबसे आम वजह है गलत वेंडर का चुनाव। अगर किसी ने एमएनआरई या अपनी डिस्कॉम के पोर्टल पर रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर के अलावा किसी लोकल वेंडर से सोलर सिस्टम लगवाया है तो सब्सिडी नहीं मिलेगी। हमेशा आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्टर्ड वेंडर का ही चुनाव करना जरूरी है।

पैनल की गुणवत्ता भी जांच में आती है। योजना के तहत सिर्फ सरकार की एएलएमएम सूची में शामिल सोलर मॉडल और मेड इन इंडिया यानी डीसीआर पैनल ही मान्य हैं। सस्ते या गैर-प्रमाणित पैनल लगाने पर रिपोर्ट खारिज हो जाती है। जानकार बताते हैं कि कई लोग कीमत कम करने के चक्कर में यह गलती कर बैठते हैं।

दस्तावेज और नाम में मिसमैच की समस्या

आधार कार्ड, बिजली बिल और बैंक पासबुक में नाम की स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी होनी चाहिए। थोड़ा सा भी अंतर या उपनाम न होना आवेदन रद्द करा सकता है। कई लोगों के नाम में छोटे-मोटे फर्क की वजह से अर्जी अटक जाती है।

बिजली बिल पर दर्ज कंज्यूमर नंबर की जगह मीटर नंबर डालने से सिस्टम उसे अमान्य कर देता है। बैंक खाते का गलत या पुराना आईएफएससी कोड डालने पर सब्सिडी ट्रांसफर फेल हो जाता है। कमीशनिंग रिपोर्ट अपलोड करते समय धुंधली छत की फोटो या बिना सीरियल नंबर वाले पैनल की तस्वीर भी परेशानी खड़ी कर देती है। जांच टीम ऐसे आवेदनों को पेंडिंग में डाल देती है।

कनेक्शन और स्वीकृत भार से जुड़ी कमियां

अगर बिजली बिल पर स्वीकृत लोड दो किलोवाट है और किसी ने पांच किलोवाट का सोलर प्लांट लगा लिया तो डिस्कॉम की फिजिबिलिटी रिपोर्ट रिजेक्ट हो जाएगी। पुराना बकाया बिल होने पर भी क्लियरेंस नहीं मिलता। आवेदन से पहले पूरा बकाया जमा करना अनिवार्य है।

यह योजना सिर्फ आवासीय ग्राहकों के लिए है। कमर्शियल या कृषि श्रेणी का कनेक्शन होने पर अर्जी खारिज हो जाती है। मामला कुछ इस तरह से है कि लोग अपनी कैटेगरी चेक किए बिना आवेदन कर देते हैं। बाद में रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है।

बैंक खाता और संपत्ति से जुड़े कारण

बैंक खाता आधार से लिंक होने के साथ-साथ एनपीसीआई मैपर पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के लिए एक्टिव होना चाहिए। अगर यह व्यवस्था नहीं है तो सब्सिडी नहीं पहुंचती। संयुक्त संपत्ति या पुश्तैनी मकान होने पर अन्य सह-मालिकों का अनापत्ति प्रमाण पत्र अपलोड न करने पर ओनरशिप चेक फेल हो जाता है।

एक ही पते पर कई कनेक्शन होने पर डुप्लीकेट एप्लीकेशन का फ्लैग लग जाता है। एक परिवार या एक मकान के लिए सिर्फ एक सब्सिडी मान्य है। यहां एक अप्रत्याशित बात सामने आती है। कई लोग सोचते हैं कि अलग-अलग कनेक्शन पर अलग सब्सिडी मिल जाएगी, लेकिन नियम साफ है।

ज्यादातर रिजेक्शन छोटी गलतियों की वजह से होते हैं। नाम की स्पेलिंग सुधारना, सही कंज्यूमर नंबर डालना, बकाया चुकाना या सही वेंडर से काम कराना जैसे कदम उठाकर दोबारा आवेदन किया जा सकता है। पोर्टल पर सुधार का विकल्प उपलब्ध है। दस्तावेज साफ-सुथरे अपलोड करने और तस्वीरें स्पष्ट रखने से जांच आसानी से पास हो जाती है।

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में आवेदन रिजेक्ट होने पर घबराने की जरूरत नहीं। वेंडर, दस्तावेज, बैंक या कनेक्शन से जुड़ी ज्यादातर गलतियां सुधारी जा सकती हैं। सही जानकारी और सावधानी से दोबारा अप्लाई करने पर सब्सिडी मिलने का रास्ता खुल जाता है। आवेदकों को अपने दस्तावेज और कनेक्शन की स्थिति एक बार जरूर जांच लेनी चाहिए। आगे की प्रक्रिया पर नजर बनाए रखना होगा।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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