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Ganesh Chaturthi 2026: 9 साल बाद अद्भुत संयोग, इस बार 12 दिनों तक रहेगी गणेशोत्सव की धूम, जानें शुभ मुहूर्त

Ganesh Chaturthi 2026: 9 साल बाद अद्भुत संयोग, इस बार 12 दिनों तक रहेगी गणेशोत्सव की धूम, जानें शुभ मुहूर्त
Ganesh Chaturthi 2026

सारांश

  • Ganesh Chaturthi 2026: देशभर में गणेशोत्सव का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
  • शास्त्रों में भगवान गणेश के जन्मोत्सव की पूजा के लिए मध्याह्न काल यानी दोपहर का समय सबसे उत्तम माना गया है।
  • धार्मिक विद्वानों का मानना है कि उत्सव की अवधि बढ़ने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और समाज में खुशहाली आती है।
  • गणेश उत्सव केवल एक त्योहार नहीं बल्कि अटूट आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।

Ganesh Chaturthi 2026: देशभर में गणेशोत्सव का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से दस दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होती है। हालांकि, इस बार तिथियों की गणना और विशेष धार्मिक संयोग के कारण गणेशोत्सव का यह पावन पर्व 10 दिनों के बजाय पूरे 12 दिनों तक मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ऐसा दुर्लभ और शुभ संयोग लगभग 9 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बन रहा है।

भगवान श्री गणेश को सनातन धर्म में प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति की पूजा करने का विधान है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी की शुरुआत सितंबर महीने में होने जा रही है। बप्पा के स्वागत के लिए मंदिरों और भव्य पंडालों में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। श्रद्धालु अपने घरों में भी विघ्नहर्ता की स्थापना करने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।

गौतमी पंचांग और वैदिक तिथियों के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे होगा। यह तिथि अगले दिन यानी 15 सितंबर को सुबह 07:44 बजे तक मान्य रहेगी। उदया तिथि की मान्यताओं का पालन करते हुए गणेश चतुर्थी का व्रत और गणपति स्थापना 14 सितंबर को ही की जाएगी। इसी दिन से 12 दिनों के इस भव्य धार्मिक उत्सव का आगाज होगा।

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 2026 पर पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त

शास्त्रों में भगवान गणेश के जन्मोत्सव की पूजा के लिए मध्याह्न काल यानी दोपहर का समय सबसे उत्तम माना गया है। 14 सितंबर को गणपति स्थापना और पूजन के लिए श्रद्धालुओं को पर्याप्त समय मिलेगा। इस दिन दोपहर 11:02 बजे से लेकर 01:31 बजे तक पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा। पूजन की कुल अवधि लगभग 2 घंटे 28 मिनट की होगी।

धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से की गई पूजा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। पूजन के दौरान बप्पा को दूर्वा, मोदक, लड्डू और लाल पुष्प अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस दौरान निष्ठापूर्वक किए गए जप और आरती से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। भक्त इस समय सीमा के भीतर अपने घरों या पंडालों में प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं।

9 साल बाद बन रहा 12 दिनों का अद्भुत संयोग

आमतौर पर गणेशोत्सव का यह पावन त्यौहार 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है। तिथियों के उतार-चढ़ाव और घट-बढ़ के कारण इस साल यह उत्सव 12 कैलेंडर दिनों तक विस्तारित हो गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, ऐसा संयोग इससे पहले करीब 9 वर्ष पूर्व देखने को मिला था। इस वजह से भक्तों को बप्पा की सेवा और भक्ति करने का दो दिन अधिक अवसर प्राप्त होगा।

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि उत्सव की अवधि बढ़ने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और समाज में खुशहाली आती है। 14 सितंबर को स्थापना के बाद से ही शहर-शहर में भक्ति का माहौल बना रहेगा। सुबह और शाम के समय होने वाली महाआरती में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। उत्सव के लंबे चलने से व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय बाजारों में भी रौनक बनी रहेगी।

अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन की तिथि

12 दिनों तक चलने वाले इस गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा विसर्जन के साथ होगा। इस वर्ष मुख्य गणेश विसर्जन 25 सितंबर को बड़े पैमाने पर किया जाएगा। भक्त ढोल-नगाड़ों और गुलाल के साथ विघ्नहर्ता को भावुक मन से विदाई देंगे। इस दौरान नदियां, तालाब और विशेष रूप से बनाए गए कुंडों में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

पारिवारिक परंपराओं के अनुसार कई श्रद्धालु गणेश विसर्जन का नियम अलग-अलग दिनों पर भी अपनाते हैं। बहुत से लोग डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन या फिर सात दिन में भी प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। परंपरा चाहे जो भी हो, विसर्जन से पूर्व बप्पा को मोदक का भोग लगाकर आरती की जाती है। श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के साथ बप्पा को विदाई देते हैं।

Ganesh Chaturthi 2026: गणेशोत्सव का धार्मिक महत्व और पूजन विधि

गणेश उत्सव केवल एक त्योहार नहीं बल्कि अटूट आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। माना जाता है कि विसर्जन के साथ ही भगवान गणेश भक्तों के सभी दुखों, कष्टों और विघ्नों को अपने साथ ले जाते हैं। बदले में वे अपने श्रद्धालुओं को सुख, समृद्धि, ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यही कारण है कि इस उत्सव को लेकर देश भर में भारी उत्साह देखा जाता है।

पूजा की शुरुआत में संकल्प लेकर प्रतिमा को चौकी पर स्थापित किया जाता है। इसके बाद पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र, जनेऊ और चंदन अर्पित किया जाता है। भगवान को उनके प्रिय मोदक और मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। 12 दिनों तक नियमित रूप से सुबह-शाम आरती और मंत्रों का जाप करने से घर का वातावरण पवित्र और ऊर्जावान बना रहता है।

गणेश चतुर्थी का यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक समरसता के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 9 साल बाद बने 12 दिनों के इस अद्भुत संयोग ने श्रद्धालुओं के उत्साह को दोगुना कर दिया है। 14 सितंबर से शुरू हो रहे इस पावन उत्सव को लेकर तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। पूरा देश एक बार फिर गजानन के स्वागत में ‘जय देव, जय मंगल मूर्ति’ के भजनों से गुंजायमान होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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लेखक

Shobhit Pandey

शोभित पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव के शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) हैं। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत पाठकों की शिकायतें और सुधार संबंधी अनुरोध हमारे संपर्क पेज के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।

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