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दशहरे पर क्या करें: बड़ों का आशीर्वाद, दान, नए संकल्प और घर में पूजा से जुड़ी सामान्य परंपराएं

विजयादशमी के दिन की सामान्य परंपराएं: स्नान और पूजा, बड़ों का आशीर्वाद, दान का महत्व, अपनी एक बुराई छोड़ने का संकल्प, औजार और किताबों की पूजा और क्या न करें।

दशहरे पर की जाने वाली परंपराओं की जानकारी देने वाला ग्राफिक
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सारांश

  • दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। विजयादशमी को साल के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है।
  • दशहरे पर घर और रिश्तेदारी के बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा बहुत पुरानी है।
  • रावण दहन बुराई के अंत का प्रतीक है। कई परिवार इस दिन बच्चों और बड़ों को अपनी एक बुरी आदत छोड़ने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करते हैं, जैसे गुस्सा, आलस, झूठ, तंबाकू या फिजूलखर्ची।
  • परंपरा में दशहरे को नई खरीदारी और नए काम के लिए शुभ माना जाता है।

दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। विजयादशमी को साल के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है। इस दिन के रीति-रिवाज परिवार और क्षेत्र के हिसाब से बदलते हैं, लेकिन कुछ परंपराएं लगभग हर जगह मिलती हैं। ये परंपराएं धार्मिक होने के साथ सामाजिक और नैतिक संदेश भी देती हैं। जानिए दशहरे पर क्या करें।

सुबह स्नान और पूजा

दिन की शुरुआत स्नान और घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाकर करें। भगवान राम, मां दुर्गा और भगवान गणेश का ध्यान करें। जिन घरों में नवरात्रि की पूजा हुई है, वहां देवी की उत्तर पूजा और विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है। पूजा की विधि अपने परिवार की परंपरा के अनुसार रखें और समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

मुख्य बातें: दशहरे पर की जाने वाली परंपराओं की जानकारी देने वाला ग्राफिक
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बड़ों का आशीर्वाद

दशहरे पर घर और रिश्तेदारी के बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा बहुत पुरानी है। कई जगह इस दिन रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं और मिठाई या शमी-आपटा के पत्ते देते हैं। यह परंपरा रिश्तों में मिठास बनाए रखने का मौका देती है। जो लोग दूर हैं, उन्हें फोन या वीडियो कॉल से शुभकामनाएं दें।

दान का महत्व

त्योहार पर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या जरूरी सामान देना हर परंपरा में अच्छा माना गया है। दान दिखावे के लिए नहीं, सच्चे मन से और सही जरूरतमंद को करना चाहिए। आप किसी गौशाला, अनाथालय, वृद्धाश्रम या पंजीकृत संस्था की मदद भी कर सकते हैं। ऑनलाइन दान करते समय संस्था की सच्चाई जरूर जांचें, क्योंकि त्योहारों पर नकली दान अपीलें भी आती हैं।

यह भी पढ़ें: दशहरा 2026 कब है: 20 अक्टूबर को विजयादशमी, पूजा विधि, शस्त्र पूजा और रावण दहन का महत्व | दशहरे की परंपराएं: नीलकंठ दर्शन, पान, जलेबी, सोना पत्ती और देश के अलग-अलग राज्यों के रीति-रिवाज

एक बुराई छोड़ने का संकल्प

रावण दहन बुराई के अंत का प्रतीक है। कई परिवार इस दिन बच्चों और बड़ों को अपनी एक बुरी आदत छोड़ने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करते हैं, जैसे गुस्सा, आलस, झूठ, तंबाकू या फिजूलखर्ची। यह संकल्प त्योहार को व्यक्तिगत रूप से भी सार्थक बनाता है।

औजार, किताबें और वाहन की पूजा

जिस साधन से रोजी-रोटी चलती है, उसका सम्मान करने के लिए दशहरे पर शस्त्र, औजार, मशीन, किताबें और वाहन की पूजा की जाती है। पूजा से पहले इन्हें साफ करें। यह परंपरा मेहनत और काम के प्रति सम्मान सिखाती है।

क्या न करें

  • रावण दहन या मेले में भीड़ के बीच लापरवाही न करें
  • प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर पत्ते या पौधे न तोड़ें
  • संरक्षित पक्षियों को पकड़कर दर्शन कराने वालों को बढ़ावा न दें
  • पटाखों और आग से जुड़े नियमों का पालन करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या दशहरे पर खरीदारी शुभ है?

परंपरा में दशहरे को नई खरीदारी और नए काम के लिए शुभ माना जाता है। बजट का ध्यान रखकर ही खरीदारी करें।

दशहरे पर घर में कौन सा पाठ किया जाता है?

कई परिवार रामायण के सुंदरकांड, राम रक्षा स्तोत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। पाठ अपनी श्रद्धा और परिवार की परंपरा के अनुसार चुनें। बच्चों को रामायण की कथा सुनाना भी इस दिन की अच्छी परंपरा है।

स्रोत: भारत सरकार, संसदीय कार्य मंत्रालय: 2026 अवकाश कैलेंडर, Tirth: Hindu Festivals 2026। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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