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Census 2027: लद्दाख समेत पहाड़ी राज्यों के दुर्गम इलाकों से पहली डिजिटल जनगणना का पहला चरण शुरू, जानें सेल्फ-एन्यूमरेशन और नई सुविधाओं की पूरी जानकारी

Census 2027: लद्दाख समेत पहाड़ी राज्यों के दुर्गम इलाकों से पहली डिजिटल जनगणना का पहला चरण शुरू, जानें सेल्फ-एन्यूमरेशन और नई सुविधाओं की पूरी जानकारी
Census 2027
Census 2027: भारत में बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 का पहला चरण आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। देश के इतिहास में पहली बार यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है, जिससे डेटा की सटीकता और तेजी सुनिश्चित हो सके। इस बार नागरिकों के लिए सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अभियान की शुरुआत लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सुदूर और बर्फबारी से प्रभावित होने वाले दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों से की गई है, ताकि कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के कारण काम प्रभावित न हो। इन चिन्हित दुर्गम क्षेत्रों के नागरिक 17 अगस्त से 31 अगस्त तक आधिकारिक पोर्टल पर अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं, जिसके बाद प्रगणक घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे।
यह जनगणना स्वतंत्र भारत की आठवीं और देश की 16वीं जनगणना है, जो प्रशासनिक और विकास योजनाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा इस बार कुल 40 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो वर्ष 2011 की पिछली जनगणना की तुलना में 11 अधिक हैं। पहली बार जाति से जुड़ा प्रश्न एक खुले प्रारूप में शामिल किया गया है, जिसमें नागरिक बिना किसी पूर्व-निर्धारित सूची के अपनी जाति का नाम दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा, माता-पिता का विवरण, स्थायी पता और नागरिक पहचान से जुड़े कई नए और व्यापक प्रश्न भी इस बार की प्रश्नावली में जोड़े गए हैं।

Census 2027: बर्फबारी वाले विषम पर्वतीय इलाकों से शुरुआत करने का रणनीतिक कारण

पहाड़ी और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड शुरू होते ही जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। भारी बर्फबारी के कारण मुख्य सड़कों से संपर्क टूट जाता है और कई गांव महीनों तक अलग-थलग पड़े रहते हैं। इसी प्राकृतिक चुनौती और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने इन संवेदनशील क्षेत्रों में समय से पहले जनगणना का काम पूरा करने की योजना बनाई है। देश के अन्य सभी मैदानी और सामान्य इलाकों में जनगणना का नियमित चरण फरवरी 2027 से प्रारंभ होगा, जबकि वर्तमान अग्रिम चरण केवल बर्फबारी से प्रभावित होने वाले दुर्गम इलाकों के लिए ही लागू किया गया है।
प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नागरिकों को आधिकारिक वेब पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर अपना विवरण दर्ज करने का विकल्प दिया गया है। सेल्फ-एन्यूमरेशन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद सिस्टम एक विशेष रेफरेंस आईडी जनरेट करेगा। नागरिकों को यह आईडी सुरक्षित रखनी होगी और सितंबर महीने में जब प्रगणक घर-घर सत्यापन के लिए आएंगे, तब उन्हें यह आईडी दिखानी होगी। जनगणना का यह विशेष मोबाइल एप्लिकेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में काम करने में सक्षम है, जिससे दूरदराज के कम नेटवर्क वाले इलाकों में भी कर्मचारियों को आंकड़े दर्ज करने में कोई परेशानी नहीं होगी। इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी नागरिक से कोई ओटीपी नहीं मांगा जाएगा, जिससे सुरक्षा बनी रहे।

Census 2027: लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के अंतिम सीमावर्ती गांवों तक डिजिटल पहुंच

डिजिटल जनगणना का यह पहला चरण लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती व अत्यंत चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों को व्यापक रूप से कवर कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, लद्दाख के सात जिलों में रहने वाले लगभग 2.74 लाख लोग और जम्मू-कश्मीर के 16 जिलों के करीब 88.1 लाख नागरिक इस अग्रिम चरण का हिस्सा बनेंगे। जनगणना कर्मचारियों की विशेष टीमें ज़ांस्कर घाटी के विषम क्षेत्रों से लेकर लेह जिले के यिंगचेन गांव तक पहुंचेंगी, जहां मात्र 11 लोग निवास करते हैं। इसके साथ ही समुद्र तल से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे चांगथांग के हानले गांव में भी डेटा कलेक्शन का काम शुरू कर दिया गया है।
लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी अमित शर्मा के अनुसार, इन बर्फबारी वाले सभी इलाकों में मोबाइल ऐप के जरिए पूरी तरह पेपर-लेस जनगणना आयोजित की जा रही है। अत्यधिक ऊंचाई वाले सामरिक क्षेत्रों, जहां सैन्य और सुरक्षा बलों की उपस्थिति रहती है, वहां समन्वय बनाने के लिए विशेष चार्ज अधिकारियों की तैनाती की गई है। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी दूरस्थ और कठिन चोटी पर केवल एक परिवार भी रहता होगा, तो भी जनगणना कर्मचारी वहां तक पहुंचेंगे और हर एक नागरिक का सही डेटा सिस्टम में दर्ज करेंगे।

Census 2027: हिमाचल प्रदेश के कौमिक गांव से लेकर दुर्गम घाटियों तक की विस्तृत तैयारी

हिमाचल प्रदेश की विषम भौगोलिक स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने बड़े पैमाने पर तैयारियां पूरी की हैं। राज्य में स्पीति घाटी स्थित 15,049 फीट ऊंचे कौमिक गांव सहित तीन प्रमुख जिलों के 6,903 विषम और कठिन इलाकों को इस चरण के लिए चिन्हित किया गया है। कड़ाके की सर्दी और बर्फबारी की शुरुआत से पहले काम निपटाने के लिए राज्य भर में 20,390 प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की विशाल टीम तैनात की गई है, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
हिमाचल प्रदेश की प्रधान जनगणना अधिकारी दीप शिखा शर्मा ने बताया कि स्थानीय निवासी ‘सेंसस 2027-पीई’ मोबाइल ऐप या आधिकारिक वेब पोर्टल के माध्यम से अपना सेल्फ-एन्यूमरेशन पूरा कर सकते हैं। इसके बाद प्राप्त रेफरेंस आईडी को प्रगणक के भौतिक सत्यापन के समय दिखाना अनिवार्य होगा। नेटवर्क की समस्या से निपटने के लिए ऐप को ऑफलाइन कार्य करने योग्य बनाया गया है, जिससे दूरदराज की घाटियों में डेटा पहले स्थानीय रूप से सेव हो जाएगा और नेटवर्क मिलते ही केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाएगा।

Census 2027: उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों और धार्मिक धामों में अलग व्यवस्था

उत्तराखंड के पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों जैसे उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के 131 गांवों में जनगणना का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। इसके अलावा गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 52 हजार लोगों को इस अग्रिम चरण में कवर किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में काम करने वाली टीमों को मौसम संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड की जनगणना निदेशक इवा श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों का पालन करने के लिए सैन्य और अर्धसैनिक बलों की यूनिट्स में जनसंख्या की गणना कागजी मोड पर की जाएगी। बाद में इस फिजिकल डेटा को विशेष चार्ज अधिकारियों के कार्यालयों में डिजिटल रूप से फीड किया जाएगा। इस दोहरी व्यवस्था से राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित होगा और आंकड़ों की सटीकता और गोपनीयता भी बनी रहेगी।

Census 2027: खुले प्रारूप में जातिगत विवरण और जनगणना की नई विशेषताएं

जनगणना 2027 कई मायनों में ऐतिहासिक और बदलाव लाने वाली साबित होने जा रही है। इस बार प्रश्नावली में शामिल प्रश्न संख्या 10 के तहत नागरिकों से पहली बार जाति से जुड़ी जानकारी खुले प्रारूप (Open Format) में मांगी जा रही है। इसका तात्पर्य यह है कि नागरिक बिना किसी पूर्व-निर्धारित सरकारी सूची या विकल्पों के अपनी बताई गई जाति को सीधे दर्ज करा सकेंगे। यह नया प्रावधान लंबे समय से जारी सामाजिक चर्चाओं और विभिन्न समुदायों की मांगों के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जातिगत विवरण के अलावा, प्रश्नावली में माता-पिता का पूरा विवरण, स्थायी पते की विस्तृत जानकारी और नागरिक पहचान से जुड़े नए प्रश्न जोड़े गए हैं। इन व्यापक विवरणों से देश की जनसांख्यिकी का एक अधिक सटीक और उपयोगी चित्र तैयार होगा। सरकार का मानना है कि इस डेटा का उपयोग भविष्य में सामाजिक-आर्थिक नीतियों, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के बेहतर खाके तैयार करने में किया जाएगा।

Census 2027: साइबर फ्रॉड से बचाव और नागरिकों से सहयोग की प्रशासनिक अपील

जनगणना के इस डिजिटल अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए अधिकारियों ने नागरिकों से सक्रिय सहयोग की अपील की है। इसके साथ ही बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ी को देखते हुए प्रशासन ने साइबर फ्रॉड से सतर्क रहने की सख्त चेतावनी भी जारी की है। नागरिकों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जनगणना की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोई बैंक विवरण, संवेदनशील निजी जानकारी या मोबाइल पर आया हुआ ओटीपी नहीं मांगा जाता है।
प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को विशेष क्यूआर कोड युक्त आधिकारिक पहचान पत्र जारी किए गए हैं। नागरिक घर आए कर्मचारी के पहचान पत्र पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करके उनकी सत्यता की जांच कर सकते हैं। इस अग्रिम चरण के सफल संचालन से प्राप्त अनुभवों और सीख का उपयोग फरवरी 2027 में शेष भारत में शुरू होने वाले मुख्य चरण के दौरान किया जाएगा, जिससे देश की इस सबसे बड़ी सांख्यिकी कवायद को बिना किसी त्रुटि के संपन्न कराया जा सके।

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लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

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