परिचय

वैशाख मास की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है, यह बिना मुहूर्त देखे किए जाने वाला स्वयंसिद्ध शुभ दिन है।

शुभ मुहूर्त एवं समय

पूरा दिन ही शुभ माना जाता है, फिर भी प्रातःकाल पूजा करना उत्तम है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • विष्णु-लक्ष्मी प्रतिमा
  • सोना/चांदी (खरीदारी हेतु)
  • जौ व चावल
  • पीले पुष्प
  • गंगाजल
  • रोली/कुमकुम
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • धूपबत्ती व अगरबत्ती
  • घी का दीपक
  • कपूर
  • नारियल
  • फल एवं मिठाई
  • पान का पत्ता व सुपारी
  • लाल/पीला वस्त्र

पूजा विधि (चरण दर चरण)

  1. प्रातः स्नान करके विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें।
  2. जौ व चावल का दान करें।
  3. नई वस्तु या आभूषण की खरीदारी करें (शुभ मानी जाती है)।
  4. गरीबों को अन्न-धन का दान करें।

मंत्र

मुख्य मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

लाभ एवं महत्व

किए गए पुण्य कार्य व निवेश का फल अक्षय (कभी न घटने वाला) मिलता है।

सावधानियां

इस दिन किसी से विवाद न करें, दान-पुण्य व सात्विक कार्यों पर ध्यान दें।

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