Jharkhand Ministers Death: झारखंड की राजनीति में रविवार सुबह एक दुखद खबर सामने आई है। राज्य सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और गिरिडीह से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन हो गया। मात्र 54 वर्ष की आयु में हृदयाघात के कारण उनका देहांत हुआ, जिसने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के साथ ही एक बार फिर वह चर्चा तेज हो गई है जो झारखंड की सियासत में पहले भी उठती रही है हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्रित्व काल में यह चौथा मौका है जब किसी कैबिनेट मंत्री की मृत्यु हुई हो। इनमें से तीन मंत्रियों का सीधा नाता शिक्षा विभाग से रहा है, जो इसे और भी संवेदनशील बना देता है। सुदिव्य कुमार सोनू का सफर एक साधारण कार्यकर्ता से मंत्री पद तक पहुंचने की मिसाल रहा है, और उनके अचानक चले जाने से जेएमएम और सरकार दोनों को गहरा झटका लगा है।
Jharkhand Ministers Death: साधारण कार्यकर्ता से मंत्री पद तक का सफर
सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। शुरुआती दिनों में वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करते थे, दीवारों पर नारे लिखते और गांव-गांव पार्टी का झंडा लेकर प्रचार करते थे। वर्ष 1989 में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और धीरे-धीरे संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करते गए। 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद वह पार्टी के भीतर विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाते हुए जिला अध्यक्ष के पद तक पहुंचे।
चुनावी राजनीति में संघर्ष और आखिरकार जीत
चुनावी मैदान में सुदिव्य कुमार सोनू का रास्ता आसान नहीं रहा। 2009 में उन्होंने पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से किस्मत आजमाई, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके पांच साल बाद 2014 के चुनाव में भी वह जीत हासिल नहीं कर सके और दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा और 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें फिर टिकट दिया गया, जिसमें उन्होंने गिरिडीह सीट पर जीत दर्ज की। 2024 के चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बचाई और लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए, जिसके बाद हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
मंत्री पद पर रहते हुए संभाले कई अहम विभाग
मंत्री बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू के पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अलावा पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य तथा नगर विकास एवं आवास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व रहा। इतने विभागों की जिम्मेदारी संभालना उनकी प्रशासनिक क्षमता और पार्टी नेतृत्व के भरोसे को दर्शाता है। उनके निधन से न केवल गिरिडीह क्षेत्र बल्कि पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोग उन्हें एक जमीनी और जनता से जुड़े नेता के रूप में याद कर रहे हैं, जिसने अपने क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास किए।
हेमंत सरकार में मंत्रियों की मौत का अजीब संयोग
हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री रहते हुए यह चौथी बार है जब किसी मंत्री का निधन हुआ है, और यह संयोग राजनीतिक हलकों में गहरी चर्चा का विषय बन गया है। इससे पहले मधुपुर के विधायक और मंत्री हाजी हुसैन अंसारी का 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद निधन हुआ था। इसके बाद डुमरी से विधायक और स्कूली शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो का अप्रैल 2023 में चेन्नई में इलाज के दौरान देहांत हुआ, जो लंबे समय से फेफड़े की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। फिर अगस्त 2025 में घाटशिला के विधायक और स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का निधन हुआ, जिस पर राज्य में शोक भी घोषित किया गया था। अब सुदिव्य कुमार सोनू के जाने के साथ यह सिलसिला चौथी बार दोहराया गया है।
Jharkhand Ministers Death: शिक्षा विभाग से जुड़ा संयोग बना चर्चा का विषय
गौरतलब है कि इन चार मंत्रियों में से तीन का सीधा संबंध शिक्षा विभाग से रहा है। जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग संभाल रहे थे, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री थे। महज साढ़े तीन साल के भीतर शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों की मृत्यु होना एक असामान्य और दुखद संयोग है, हालांकि इसे किसी विशेष कारण या दावे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह पूरी तरह इत्तेफाक है, लेकिन इसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में स्वाभाविक रूप से हो रही है।
सुदिव्य कुमार सोनू को अंतिम विदाई देने के लिए रविवार को गिरिडीह में बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं। एक सामान्य कार्यकर्ता से मंत्री पद तक का उनका सफर पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और मेहनत का प्रमाण रहा है। उनके निधन से जेएमएम ने एक अनुभवी और जमीनी नेता खोया है, तो वहीं हेमंत सोरेन सरकार को भी राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से गहरा नुकसान पहुंचा है। आने वाले दिनों में गिरिडीह सीट पर उपचुनाव को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं, जैसा कि पहले हुए मंत्रियों के निधन के बाद देखा गया था।
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