Morni Hills Trip: दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए हर वीकेंड पर मसूरी, नैनीताल या शिमला जैसे दूरदराज के हिल स्टेशनों का रुख करना एक आम आदत बन चुका है। लेकिन अगर आप इस बार भीड़भाड़ से दूर किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जो राजधानी से ज्यादा दूर भी न हो और जहां आपको पहाड़, हरियाली, झीलें और शांत माहौल सबकुछ एक साथ मिल जाए, तो हरियाणा की यह खूबसूरत जगह आपकी तलाश को खत्म कर सकती है। हम बात कर रहे हैं मोरनी हिल्स की, जो पंचकूला जिले में स्थित हरियाणा का इकलौता हिल स्टेशन है और दिल्ली से महज ढाई सौ किलोमीटर की दूरी पर बसा है। जब काम के तनाव से उकताए लोग सुकून की तलाश में निकलते हैं, तो क्या यह जगह उनकी उम्मीदों पर खरी उतर पाती है?
सफर की थकान और वीकेंड की भागदौड़ के बीच जब कोई ऐसी जगह मिल जाए जहां प्रकृति अपनी पूरी खूबसूरती के साथ बाहें फैलाए खड़ी हो, तो मन अपने आप प्रफुल्लित हो उठता है। दिल्ली से गाड़ी उठाते ही कुछ घंटों का सफर तय करके शिवालिक पहाड़ियों की गोद में पहुंचना किसी जादुई अहसास से कम नहीं होता। आखिर क्या खास है इस इकलौते पहाड़ी ठिकाने में और क्यों पर्यटकों का रुझान तेजी से इस तरफ बढ़ रहा है, यह जानने के लिए इस सफर के हर पन्ने को पलटना बेहद दिलचस्प हो जाता है।
Morni Hills Trip: कहां बसा है मोरनी हिल्स और कैसे पहुंचें यहां
हरियाणा के पंचकूला जिले की सीमा के भीतर शिवालिक पहाड़ियों की श्रृंखलाओं के बीच मोरनी हिल्स स्थित है। समुद्र तल से लगभग चार हजार से लेकर चार हजार एक सौ संतावन फीट की ऊंचाई पर बसा यह हिल स्टेशन अपनी घुमावदार सड़कों और प्राकृतिक छटा के लिए जाना जाता है। दिल्ली से इसकी कुल दूरी करीब ढाई सौ से दो सौ सत्तर किलोमीटर के आसपास है, जिसे तय करने में निजी वाहन या कैब से लगभग पांच घंटे का वक्त लग जाता है। जब आप दिल्ली के एक्सप्रेसवे से निकलकर हरियाणा के रास्तों से होते हुए पहाड़ी इलाकों में प्रवेश करते हैं, तो ड्राइविंग का रोमांच अपने चरम पर होता है।
जानकार बताते हैं कि अगर आप वीकेंड की छुट्टियों का पूरा आनंद लेना चाहते हैं, तो सुबह तड़के ही दिल्ली से निकल जाना सबसे समझदारी भरा कदम होता है। रास्ते में ट्रैफिक और शहर की व्यस्तता से बचने का यह सबसे अच्छा तरीका है, जिससे आप तय समय से पहले अपनी मंजिल पर पहुंच सकते हैं। मोरनी गांव खुद एक पहाड़ी ढलान पर आबाद है, जहां से चारों तरफ फैली हरियाली और दूर-दूर तक फैले पहाड़ों के सिलसिले पर्यटकों का मन मोह लेते हैं। चीड़ के लंबे पेड़ों के साथ-साथ नीम, पीपल, जामुन और अमलतास के पेड़ इस पूरे इलाके की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।
टिक्कर ताल की झीलें और कैंपिंग का रोमांच
मोरनी हिल्स की बात हो और वहां की मशहूर झीलों का जिक्र न आए, ऐसा होना लगभग नामुमकिन है। इस इलाके में टिक्कर ताल के नाम से दो बड़ी और खूबसूरत झीलें मौजूद हैं, जिनके बीचों-बीच एक छोटा सा पहाड़ खड़ा हुआ है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों झीलें एक-दूसरे से अलग होने के बावजूद अपने पानी का स्तर लगभग एक समान बनाए रखती हैं, जो अपने आप में एक अनोखा प्राकृतिक आश्चर्य है। इन झीलों के आसपास का शांत वातावरण पर्यटकों को घंटों तक वहीं बैठने के लिए मजबूर कर देता है।
टिक्कर ताल परिसर में केवल घूमना ही नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब रहकर कैंपिंग करने का मजा ही कुछ और है। जो लोग तारों भरे आसमान के नीचे रात बिताना चाहते हैं, उनके लिए यहां कैंपिंग की बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, झील के पास ही ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए भी कई ऐसे रास्ते हैं जो रोमांच से भरे हुए हैं। मामले कुछ इस तरह से हैं कि यहां आने वाला हर शख्स अपनी पसंद के हिसाब से सुकून या रोमांच दोनों में से किसी एक को चुन सकता है।
प्राचीन इतिहास और संस्कृति की अनूठी झलक
केवल प्राकृतिक खूबसूरती ही नहीं, बल्कि मोरनी हिल्स अपने आंचल में इतिहास के कई अनछुए पन्ने भी समेटे हुए है। अगर आपको घूमने के साथ-साथ ऐतिहासिक और पुरानी जगहों को नजदीक से देखना पसंद है, तो यहां आपको प्राचीन किलों के अवशेष भी देखने को मिल जाएंगे। टिक्कर ताल के बिल्कुल किनारे पर एक बेहद पुराना मंदिर भी स्थित है, जिसके भीतर त्रिमूर्ति की प्रतिमा स्थापित है। इतिहास के जानकारों के अनुसार यह मंदिर करीब बारहवीं सदी का है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गवाही देता है।
इन पुरानी धरोहरों को देखना और उनके इतिहास के बारे में जानना पर्यटकों के लिए एक अलग ही अनुभव होता है। भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी से दूर जब कोई इतिहास के इन शांत पन्नों के बीच वक्त बिताता है, तो उसे एक अजीब सा मानसिक ठहराव मिलता है। स्थानीय संस्कृति और वास्तुकला की यह झलक मोरनी को सिर्फ एक आम हिल स्टेशन से कहीं ज्यादा ऊपर उठा देती है। यह जगह उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो इतिहास और प्रकृति का एक साथ लुत्फ उठाना चाहते हैं।
Morni Hills Trip: ठहरने के विकल्प और खानपान की व्यवस्था
किसी भी ट्रिप पर जाने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि रात में रुका कहां जाए और खाने-पीने का बंदोबस्त कैसा होगा। मोरनी हिल्स में इस बात को लेकर आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि यहां बजट और सुविधा के हिसाब से कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। हरियाणा पर्यटन निगम का प्रसिद्ध माउंटेन क्वेल टूरिस्ट रिजॉर्ट यहीं पर स्थित है, जहां ठहरने की तमाम आधुनिक सुविधाएं मिल जाती हैं। इसके अलावा, टिक्कर ताल के पास भी यात्रियों की सुविधा के लिए कमरे, लकड़ी की बनी लॉग हट्स और डॉर्मिटरी की पुख्ता व्यवस्था की गई है।
खानपान की बात करें तो यहां स्थानीय जायके के साथ-साथ सामान्य और स्वादिष्ट भोजन आसानी से उपलब्ध हो जाता है। रिजॉर्ट्स और ढाबों पर मिलने वाला गरमागरम खाना इस ठंडे पहाड़ी मौसम में सोने पर सुहागा का काम करता है। पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग लगातार इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में जुटे रहते हैं, ताकि किसी भी आगंतुक को असुविधा का सामना न करना पड़े।
दिल्ली के पास स्थित मोरनी हिल्स वीकेंड की थकान मिटाने और प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताने के लिए एक बेहतरीन ठिकाना है। कम बजट में पहाड़ी वादियों का लुत्फ उठाने का यह मौका उन लोगों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है जो दूर पहाड़ों पर जाने का वक्त नहीं निकाल पाते। अगर आप भी इस बार अपनी छुट्टियों को खास बनाना चाहते हैं, तो बिना देर किए अपना बैग उठाइए और इस खूबसूरत सफर पर निकल पड़िए। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है, और अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में पर्यटन विभाग यहां और क्या नई सुविधाएं जोड़ने जा रहा है।