PM Modi Fourth Party Audit: देश की सार्वजनिक परियोजनाओं में क्वालिटी को लेकर लगातार आ रही शिकायतों ने अब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिंतित कर दिया है। मंगलवार को हुई मासिक प्रगति बैठक में पीएम मोदी ने केंद्र के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों के सामने एक तीखा सवाल रख दिया, क्या अब देश को चौथी पार्टी से ऑडिट कराने की जरूरत पड़ने वाली है? ये सवाल सुनते ही बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सन्नाटा पसर गया।
दरअसल, निर्माण कार्यों और सरकारी प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता से जुड़ी खबरें लगातार सामने आती रही हैं, और यही बात पीएम मोदी को नागवार गुजरी। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि सिस्टम इस तरह काम नहीं करेगा। आखिर वो कौन सी वजहें रहीं जिनकी वजह से प्रधानमंत्री को ये कड़ा रुख अपनाना पड़ा?
PM Modi Fourth Party Audit: थर्ड-पार्टी ऑडिट पर उठे सवाल
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने एक अहम बात कही, जो सुनने में भले ही सामान्य लगे लेकिन असल में गहरी चिंता जाहिर करती है। उन्होंने कहा कि काम की गुणवत्ता जांचने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट कराना एक आम प्रचलित तरीका है, लेकिन शायद ये अब उतना असरदार साबित नहीं हो रहा जितनी उससे उम्मीद की जाती है।
यही वजह रही कि उन्होंने सीधे सवाल उठा दिया कि क्या अब चौथी पार्टी से ऑडिट कराने की नौबत आ गई है। जानकार बताते हैं कि इस तरह का बयान किसी सामान्य समीक्षा बैठक में कम ही सुनने को मिलता है, इसलिए इसे प्रशासनिक हलकों में गंभीरता से लिया जा रहा है। मामला कुछ इस तरह से बनता दिख रहा है कि आने वाले वक्त में क्वालिटी चेक की पूरी व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।
नौ राज्यों में फैले छह बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा
इस मासिक प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़े कुल छह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की विस्तार से समीक्षा की। ये सभी प्रोजेक्ट्स नौ अलग-अलग राज्यों में फैले हुए हैं और इनकी कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है, यानी आर्थिक रूप से भी ये परियोजनाएं देश के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं।
समीक्षा के दौरान पीएम मोदी ने एक महत्वपूर्ण बात पर जोर दिया कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अलग-अलग टुकड़ों या पैकेज के रूप में देखने की बजाय, इन्हें एक इंटीग्रेटेड सिस्टम की तरह देखा और मॉनिटर किया जाना चाहिए। यानी सिर्फ एक हिस्से पर काम पूरा हो जाना काफी नहीं, बल्कि पूरी परियोजना को आपस में जोड़कर देखने की जरूरत है।
रफ्तार के साथ क्वालिटी पर भी जोर
पीएमओ की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में इस बैठक की एक अहम बात सामने रखी गई। बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि काम की रफ्तार के साथ-साथ क्वालिटी से भी कोई समझौता नहीं होना चाहिए। ये दोनों चीजें साथ-साथ चलनी चाहिए, न कि एक की कीमत पर दूसरी को नजरअंदाज किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने मंत्रालयों, राज्य सरकारों और परियोजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों को साफ निर्देश दिया कि वे आधुनिक टेक्नोलॉजी को अपनाएं। हर स्तर पर क्वालिटी की गारंटी और निगरानी को और मजबूत बनाने पर भी खास जोर दिया गया, ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने न आएं।
बिजली और ट्रांसमिशन को लेकर दी खास नसीहत
बैठक के दौरान पावर सेक्टर से जुड़े एक प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए पीएम मोदी ने एक दिलचस्प उदाहरण के जरिए अपनी बात समझाई। उन्होंने कहा कि सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ा देना ही काफी नहीं है, जब तक उसके लिए जरूरी ट्रांसमिशन क्षमता तैयार न हो।
उन्होंने इसे बांध और नहर के उदाहरण से जोड़कर समझाया जिस तरह नहरें बनाए बिना सिर्फ बांध बना देने से मनचाहा नतीजा नहीं मिलता, ठीक उसी तरह बिजली उत्पादन और उसकी सप्लाई व्यवस्था को साथ-साथ मजबूत करना जरूरी है। ये बात सुनने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन तकनीकी नजरिए से ये पूरे पावर सेक्टर की प्लानिंग के लिए एक अहम संदेश है।
PM Modi Fourth Party Audit: आम जनता के लिए क्यों अहम है ये बैठक
इस तरह की समीक्षा बैठकें भले ही दिल्ली के गलियारों में होती हों, लेकिन इनका सीधा असर देश भर के आम नागरिकों पर पड़ता है। सड़क, रेलवे और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं हर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी होती हैं। अगर इन प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता की कमी रह जाती है, तो इसका खामियाजा आखिरकार जनता को ही भुगतना पड़ता है।
देखने पर लगता है कि प्रधानमंत्री का ये सख्त रुख सिर्फ इन छह प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पूरे सिस्टम को एक साफ संदेश दिया गया है कि क्वालिटी में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की इस समीक्षा बैठक ने सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। चौथी पार्टी ऑडिट की जरूरत पर उठाई गई बात आने वाले समय में नीतिगत बदलाव की शुरुआत भी बन सकती है। रफ्तार और क्वालिटी दोनों पर बराबर जोर देने का उनका संदेश साफ तौर पर बताता है कि सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है, और अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस दिशा में अगला कदम क्या उठाती है।
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