PM Kisan Yojana: किसानों के लिए खेती-किसानी का काम हमेशा से ही अनिश्चितताओं और चुनौतियों से भरा रहा है। ऊपर से जब बात बच्चों की उच्च शिक्षा की आती है, तो कई बार आर्थिक तंगी होनहार युवाओं के सपनों की राह में एक बड़ा रोड़ा बन जाती है। ऐसे ही परिवारों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना एक बड़ा संबल बनकर सामने आ रही है। इस योजना के तहत अब पात्र विद्यार्थियों को हर महीने मिलने वाली आर्थिक मदद को बढ़ा दिया गया है, जिससे किसानों और खेतिहार मजदूरों के बच्चों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
क्या आपके घर में भी कोई ऐसा छात्र है जो पैसों की कमी के कारण कॉलेज या यूनिवर्सिटी की फीस भरने में परेशान हो रहा है? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की साबित हो सकती है। राज्य के मेधावी विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई इस खास योजना के तहत अब हर महीने सीधे पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जो पहले महज तीन हजार रुपये हुआ करती थी। इस वित्तीय मदद से बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने में काफी आसानी होगी।
PM Kisan Yojana: कौन उठा सकता है इस छात्रवृत्ति का फायदा?
इस योजना का लाभ पाने के लिए सरकार ने कुछ बुनियादी शर्तें तय की हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य है। सबसे पहली और अहम शर्त यह है कि छात्र का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। इसके साथ ही, विद्यार्थी के माता-पिता का किसान होना या फिर पंजीकृत खेतिहार मजदूर होना भी आवश्यक है। चूंकि यह छात्रवृत्ति पूरी तरह से मेधावी छात्रों के लिए बनाई गई है, इसलिए अकादमिक रिकॉर्ड को लेकर भी कड़े मानक रखे गए हैं।
शैक्षणिक प्रदर्शन के मामले में सामान्य राज्य बोर्ड से बारहवीं कक्षा की परीक्षा पास करने वाले छात्रों के पास कम से कम सत्तर प्रतिशत अंक होने चाहिए। वहीं, अगर छात्र ने सीबीएसई या आईसीसीई बोर्ड से पढ़ाई पूरी की है, तो अंकों का यह पैमाना पचासी प्रतिशत तक रखा गया है। इसके अलावा, जो युवा अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन यानी स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं, उनके ग्रेजुएशन में भी कम से कम सत्तर प्रतिशत अंक होना अनिवार्य माना गया है।
आवेदन के लिए जरूरी कागजात और प्रक्रिया
मामला कुछ इस तरह से है कि इस छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन रखी गई है। आवेदन करने वाले छात्र के पास आधार कार्ड, मूल निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पिछली कक्षा की मार्कशीट और बैंक खाते का पूरा विवरण होना चाहिए। इसके अलावा, किसान होने के प्रमाण के रूप में खतौनी या किसान बही की जरूरत पड़ती है, जबकि खेतिहार मजदूरों के लिए संबंधित श्रम कार्ड मांगा जाता है।
दस्तावेजों को जुटाने के बाद छात्रों को अपने संबंधित कॉलेज या शिक्षण संस्थान के प्रशासनिक कार्यालय से आवेदन फॉर्म प्राप्त करना होगा। फॉर्म को बहुत सावधानी से भरकर और सभी जरूरी दस्तावेजों की फोटोकॉपी साथ लगाकर उसे अपने स्कूल या कॉलेज के प्रधानाचार्य अथवा नोडल अधिकारी से प्रमाणित करवाना बेहद जरूरी है। सत्यापन की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस फॉर्म को क्षेत्रीय मंडी परिषद कार्यालय या वहां बनाए गए छात्रवृति काउंटर पर जमा करना होता है, जहां से रसीद लेना बिल्कुल न भूलें।
PM Kisan Yojana: आगे की राह और उम्मीदें
जानकार बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में पैसों की तंगी के कारण उच्च शिक्षा बीच में ही छोड़ देने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम नहीं है। ऐसे में इस योजना की राशि बढ़ाए जाने से परिवारों में एक नई उम्मीद जगी है। हालांकि, ऑफलाइन प्रक्रिया होने के कारण कई बार छात्रों को फॉर्म जमा करने में थोड़ी भागदौड़ का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन मिलने वाली यह आर्थिक मदद इस मेहनत को सार्थक कर देती है।
इस योजना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो सिस्टम किसानों के घर के दीये बुझने नहीं देता। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में कितने अधिक से अधिक जरूरतमंद छात्र इस छात्रवृत्ति का लाभ उठाने के लिए आगे आते हैं। मामले की आगे की आधिकारिक जानकारी और अपडेट्स अभी आनी बाकी हैं, जिन पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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