Dimagi Naxal Party: देश की सियासत में हाल ही में उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद अब एक और डिजिटल राजनीतिक पहल ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। इसका नाम है ‘दिमागी नक्सल पार्टी’, जिससे अब तक लाखों लोग जुड़ चुके हैं। दरअसल 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसके तुरंत बाद इंस्टाग्राम पर इसी नाम से एक नया पेज सामने आया। महज 24 घंटों के भीतर इस पेज ने एक लाख से अधिक और दो दिन के भीतर 1.8 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जोड़ लिए। हालांकि यह कोई आधिकारिक या मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री के भाषण के तंज से उपजी एक सोशल मीडिया पहल भर है।
Dimagi Naxal Party: पीएम मोदी के भाषण से मिला नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि देश ने जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद को तो काफी हद तक पीछे धकेल दिया है, लेकिन कुछ ‘दिमागी नक्सली’ अब भी वैचारिक स्तर पर युवाओं को गुमराह करने और देश में अशांति फैलाने की फिराक में हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि ऐसे लोगों को पहचानकर उन्हें अलग-थलग किया जाए। प्रधानमंत्री के इस बयान ने तुरंत ही राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी जोरदार बहस छेड़ दी, जिसके बाद इसी शब्द के नाम पर एक नई डिजिटल पहचान बनकर सामने आई।
इंस्टाग्राम और एक्स पर तेजी से बढ़ी लोकप्रियता

‘Dimagi Naxal Party’ नाम से बना यह इंस्टाग्राम पेज देखते ही देखते इंटरनेट पर तहलका मचाने में कामयाब रहा। इसके साथ ही X प्लेटफॉर्म पर भी “दिमागी नक्सल जनता पार्टी” के नाम से एक अकाउंट बनाया गया, जिसके सात हजार से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। पार्टी के इंस्टाग्राम और X दोनों प्लेटफॉर्म के बायो में इसका मोटो “सोचो। रिसर्च करो। विरोध करो।” बताया गया है। इंस्टाग्राम बायो में यह भी उल्लेख किया गया है कि पार्टी के संस्थापक “एक दिमागी भारतीय” हैं, जबकि सह-संस्थापक “56 इंच वाले” व्यक्ति बताए गए हैं।
भगत सिंह की विचारधारा का दावा करती है पार्टी
इस डिजिटल हैंडल की पोस्ट्स के अनुसार पार्टी खुद को स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की विचारधारा का अनुयायी बताती है। एक पोस्ट में लिखा गया है कि वे भगत सिंह के अनुयायी हैं और अगर उनके अकाउंट सस्पेंड करने या उन्हें देशद्रोही करार देने की कोशिश की गई, तो यह सीधे तौर पर भगत सिंह का ही अपमान माना जाएगा। हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस पेज को असल में किसने और कब बनाया, लेकिन जानकारी के अनुसार पार्टी का X अकाउंट अगस्त 2026 में ही अस्तित्व में आया था।
जानी-मानी हस्तियों को कर रहा है फॉलो
यह डिजिटल हैंडल इंस्टाग्राम पर कई चर्चित और मुखर हस्तियों को फॉलो करता नजर आता है। इनमें हास्य कलाकार कुणाल कामरा, श्याम रंगीला, यूट्यूबर ध्रुव राठी, अभिनेता प्रकाश राज, फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप, अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार शामिल हैं। इन नामों की मौजूदगी ने भी इस पेज को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलों और चर्चाओं को जन्म दिया है, जिससे इसकी लोकप्रियता और तेजी से बढ़ती चली गई।
कॉकरोच जनता पार्टी से हो रही तुलना
सोशल मीडिया विश्लेषक इस नई पहल की तुलना हाल ही में सुर्खियों में रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी सीजेपी से कर रहे हैं। गौरतलब है कि सीजेपी भी देश के मुख्य न्यायाधीश की एक कथित टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई थी और महज दस दिनों के भीतर इसके फॉलोअर्स की संख्या दो करोड़ के आंकड़े को पार कर गई थी। इस तरह की डिजिटल राजनीतिक पहलों का तेजी से वायरल होना यह दर्शाता है कि किस तरह सोशल मीडिया आज राजनीतिक असंतोष और व्यंग्य को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
साइबर हमले के दावे के बीच पेज हुआ ऑफलाइन
तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच सोमवार को पार्टी के आधिकारिक X हैंडल @DNJP_India से एक पोस्ट के जरिए दावा किया गया कि उनके इंस्टाग्राम पेज पर साइबर हमले शुरू हो गए हैं। इस पोस्ट में कहा गया कि इंस्टाग्राम पर उनके खिलाफ हमला शुरू हो चुका है और यह देखना बाकी है कि क्या उनकी आवाज दबाने में सफलता मिल पाती है या नहीं। इस दावे के कुछ ही समय बाद ‘Dimagi Naxal Party’ का इंस्टाग्राम पेज पूरी तरह ऑफलाइन हो गया और फिलहाल यह अनुपलब्ध दिखाई दे रहा है। ऑफलाइन होने से पहले पेज ने कई स्टोरीज के जरिए साइबर हमले का शिकार होने का दावा किया था।
विपक्ष का पीएम मोदी के बयान पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर विपक्ष पूरी तरह हमलावर हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें दिमागी नक्सल कहलाने पर गर्व है। उन्होंने इस शब्द को अर्बन नक्सल, आंदोलनजीवी और टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे पुराने विशेषणों का ही एक नया रूप बताया। वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस बयान को प्रधानमंत्री की हताशा का स्पष्ट संकेत करार दिया है, जिससे यह विवाद राजनीतिक स्तर पर और गहराता चला गया।
Dimagi Naxal Party: सरकार की ओर से आया स्पष्टीकरण
विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेताओं को दिमागी नक्सल नहीं कहा था। रिजिजू के अनुसार यह शब्द केवल उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया, जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, भारतीय संविधान को नहीं मानते, अलगाववादियों के साथ खड़े होकर अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं और पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की मंशा रखते हैं।
‘दिमागी नक्सल पार्टी’ का उदय यह दर्शाता है कि किस तरह प्रधानमंत्री के एक बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई डिजिटल राजनीतिक पहचान को जन्म दे दिया। कॉकरोच जनता पार्टी की तरह ही इसकी तेज लोकप्रियता और उसके बाद साइबर हमले के दावों के बीच पेज का अचानक गायब हो जाना, इस पूरे घटनाक्रम को और रहस्यमय बना देता है। विपक्ष और सरकार के बीच जारी बयानबाजी से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है, जबकि सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही।
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