PM E-Drive Yojana: सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना की अवधि बढ़ा दी है। अब यह योजना 31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी। भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक गाड़ियों को तेजी से अपनाना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना और देश में ईवी निर्माण को मजबूत करना है। कुल व्यय 11 हजार 900 करोड़ रुपये रखा गया है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वालों को राहत मिलेगी।

योजना विस्तार की समय सीमा

संशोधित प्रावधानों के तहत एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 तक पंजीकृत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सब्सिडी मिलेगी। दो साल के विस्तार से खरीदारों और निर्माताओं दोनों को स्थिरता मिलेगी। योजना लंबे समय तक लागू रहने से बाजार में विश्वास बढ़ेगा। ईवी अपनाने की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। घरेलू उद्योग को भी फायदा पहुंचेगा।

PM E-Drive Yojana: सब्सिडी की दर और अधिकतम सीमा

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर 2500 रुपये प्रति किलोवाट घंटा की दर से सब्सिडी दी जाएगी। एक वाहन पर अधिकतम सीमा 5000 रुपये तय की गई है। यह लाभ उन्हीं वाहनों पर मिलेगा जिनकी एक्स-फैक्टरी कीमत 1.5 लाख रुपये तक हो। सब्सिडी अधिकतम राशि या गाड़ी की एक्स-फैक्टरी कीमत के 15 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। लागत कम होने पर दर की समीक्षा भी हो सकती है।

कितने वाहनों को मिलेगा लाभ

योजना के तहत कुल 45 लाख 79 हजार 120 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को सहायता दी जाएगी। इसके लिए सरकार ने 2767 करोड़ रुपये का बजट रखा है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बजट कम है। पहले प्रति किलोवाट घंटा 5000 रुपये और प्रति वाहन अधिकतम 10 हजार रुपये की सब्सिडी मिलती थी। अब दर और सीमा दोनों घटाई गई हैं।

फंड लिमिट और समाप्ति की शर्तें

यह योजना फंड लिमिट के आधार पर चलाई जाएगी। कुल बजट 11900 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा। अगर 31 मार्च 2028 से पहले निर्धारित राशि या उसके किसी हिस्से का बजट खत्म हो जाता है तो संबंधित हिस्से को बंद किया जा सकता है। उसके बाद नए दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे। खरीदारों को समय रहते लाभ उठाना होगा।

PM E-Drive Yojana: सब्सिडी में बदलाव की संभावना

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रति किलोवाट घंटा मिलने वाली सब्सिडी की समय-समय पर समीक्षा की जा सकती है। गाड़ियों की लागत में कमी आने पर सब्सिडी राशि में बदलाव पर विचार संभव है। यह प्रावधान बाजार की स्थिति के अनुसार लचीलापन बनाए रखेगा। निर्माताओं को लागत कम करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। लंबे समय में योजना आत्मनिर्भर बनेगी।

घरेलू निर्माण और इंफ्रा पर जोर

योजना का एक प्रमुख लक्ष्य देश में ईवी के निर्माण को मजबूत करना है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। इससे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की उपलब्धता और सुविधा बढ़ेगी। युवा और पहली बार खरीदने वाले ग्राहक आसानी से ईवी अपना सकेंगे। पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

PM E-Drive Yojana: खरीदारों के लिए राहत का मतलब

5000 रुपये तक की सब्सिडी से स्कूटर और बाइक की कीमत में कमी आएगी। एक्स-फैक्टरी 1.5 लाख तक की सीमा में ज्यादातर एंट्री लेवल ईवी कवर हो जाएंगे। रिमूवेबल बैटरी वाले मॉडल भी लाभ के दायरे में आ सकते हैं। योजना विस्तार से बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। ग्राहक लंबे समय तक सब्सिडी का फायदा उठा सकेंगे।

पीएम ई-ड्राइव योजना को 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर 2500 रुपये प्रति किलोवाट घंटा और अधिकतम 5000 रुपये सब्सिडी मिलेगी। कुल 45 लाख से अधिक वाहनों को सहायता दी जाएगी। बजट 11900 करोड़ रुपये का है। फंड खत्म होने पर योजना का संबंधित हिस्सा बंद हो सकता है। घरेलू निर्माण और चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होगा। ईवी अपनाने वालों को राहत जारी रहेगी।

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