Mor Kali Recipe: सुबह के नाश्ते में हर कोई स्वादिष्ट हल्का और सुपाच्य खाना चाहता है। रोज पराठे पूरी या पोहा खाकर ऊब जाने पर नया विकल्प तलाशना स्वाभाविक है। तमिलनाडु की पारंपरिक डिश मोर कली इस जरूरत को पूरा करती है। चावल के आटे और छाछ से बनी यह डिश पाचन के लिहाज से बेहद हल्की मानी जाती है। तमिलनाडु के घरों में इसे सुबह के नाश्ते या शाम के स्नैक के रूप में खाया जाता है। खट्टा-नमकीन स्वाद और तड़के की खुशबू इसे आकर्षक बनाती है। सेहत के प्रति जागरूक लोग कम तेल वाले पौष्टिक भोजन के लिए इसे पसंद करते हैं।

घर की साधारण सामग्री से मिनटों में तैयार होने वाली यह डिश समय और स्वाद दोनों का ध्यान रखती है। सही तरीके से बनाने पर परिवार को नया दक्षिण भारतीय स्वाद आसानी से दिया जा सकता है।

मोर कली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री तैयार करें

तमिलनाडु की इस डिश के लिए मुख्य रूप से चावल का आटा इस्तेमाल होता है। एक कप चावल का आटा और तीन कप ताजा छाछ या पतला दही लें। छाछ का हल्का खट्टापन व्यंजन का आधार बनता है और अनोखा स्वाद देता है। तड़के के लिए एक छोटा चम्मच राई दो छोटे चम्मच चना दाल और एक छोटा चम्मच उड़द दाल रखें। दो सूखी लाल मिर्च दो बारीक कटी हरी मिर्च दस से बारह करी पत्ते और एक चौथाई छोटा चम्मच हींग भी चाहिए। पकाने के लिए तिल का तेल नारियल तेल या सरसों का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं। पारंपरिक स्वाद के लिए नारियल या तिल का तेल बेहतर रहता है।

अंत में स्वादानुसार नमक और परोसते समय थोड़ा शुद्ध देसी घी मिलाया जाता है। ताजी सामग्री चुनने से स्वाद और खुशबू दोनों निखरते हैं।

Mor Kali Recipe: चावल के आटे और छाछ का स्मूथ घोल तैयार करें

मोर कली को नरम और बिना गांठों वाला बनाने के लिए घोल सही होना जरूरी है। बड़े गहरे बाउल में एक कप छाना हुआ चावल का आटा निकालें। धीरे-धीरे तीन कप छाछ या पतला दही मिलाएं। चम्मच या व्हिस्कर से लगातार चलाते रहें ताकि आटे की गुठलियां न बनें। स्वादानुसार नमक डालकर तब तक फेंटें जब तक चिकना और पतला घोल न बन जाए। घोल ज्यादा गाढ़ा होने पर पकाते समय गांठे बनने का खतरा रहता है।

छाछ बहुत ज्यादा खट्टी या फीकी न हो हल्का खट्टापन स्वाद को दोगुना करता है। घोल तैयार होने के बाद दो मिनट के लिए छोड़ दें ताकि आटा छाछ को अच्छी तरह सोख ले। सही कंसिस्टेंसी से डिश एकदम परफेक्ट बनती है।

दक्षिण भारतीय पारंपरिक तड़का कैसे तैयार करें

घोल तैयार होने के बाद गहरी कढ़ाई या भारी तले वाले पैन में दो बड़े चम्मच तेल डालकर मध्यम आंच पर गरम करें। तेल गरम होने पर सरसों के दाने डालें और उन्हें चटकने दें। राई चटकने के बाद चना दाल और उड़द दाल डालें। धीमी आंच पर दालों को हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद सूखी लाल मिर्च बारीक कटी हरी मिर्च करी पत्ते और चुटकी भर हींग डालें। हींग और करी पत्ते की खुशबू आने पर मसालों को हल्का चलाएं।

दालों का कुरकुरापन मोर कली के नरम टेक्सचर के साथ अच्छा कॉम्बिनेशन बनाता है। तड़का बनाते समय दालें जलने न दें नहीं तो स्वाद कड़वा हो सकता है। सुनहरा तड़का तैयार होते ही अगला कदम शुरू करें।

Mor Kali Recipe: कढ़ाई में घोल पकाने और गाढ़ा करने की सही तकनीक

तड़का तैयार होते ही आंच एकदम धीमी कर दें। पहले से बनाया घोल कढ़ाई में डालें। स्पैटुला या कड़छी से बिना रुके लगातार चलाते रहें। मध्यम आंच पर लगातार चलाना जरूरी है क्योंकि चावल का आटा गर्म होते ही तली में बैठने लगता है और गांठे बन सकती हैं। जैसे-जैसे मिश्रण गर्म होगा वह गाढ़ा होने लगेगा और रंग हल्का बदलेगा। आठ से दस मिनट पकाने के बाद घोल हलवे की तरह सिमटने लगता है।

पूरी तरह पक जाने पर यह कढ़ाई के किनारों को छोड़ने लगता है और ऊपर हल्की चमक आ जाती है। इस अवस्था में पहुंचने पर मोर कली तैयार समझें। सही समय और लगातार चलाने से टेक्सचर एकदम सही आता है।

परोसने के तरीके और स्वास्थ्य संबंधी लाभ जानें

मोर कली अच्छी तरह पक जाने के बाद गैस बंद करें और सर्विंग बाउल या प्लेट में निकाल लें। गरमा-गरम परोसते समय ऊपर से एक छोटा चम्मच शुद्ध देसी घी डालें। चाहें तो भुनी मूंगफली या फ्राई किए करी पत्ते भी सजावट और कुरकुरेपन के लिए डाल सकते हैं। यह डिश पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद मानी जाती है। छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को ठंडा रखते हैं और पाचन दुरुस्त करते हैं। चावल का आटा शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।

कम तेल और बिना नुकसानदायक मसालों के बनने से यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए सुरक्षित और पौष्टिक है। सुबह की भागदौड़ में जल्दी तैयार होने वाला यह विकल्प बहुत काम आता है।

Mor Kali Recipe: रेसिपी को और बेहतर बनाने के व्यावहारिक सुझाव

घोल हमेशा स्मूथ रखें ताकि पकाते समय गांठे न बनें। आंच नियंत्रित रखें ज्यादा तेज आंच पर मिश्रण चिपक सकता है। पहली बार बनाते समय छोटी मात्रा में आजमाएं। छाछ की खटास अपनी पसंद के अनुसार एडजस्ट करें। तड़के में दालों को सही भूनें ताकि कुरकुरापन बना रहे। बची हुई मोर कली को फ्रिज में रखकर बाद में हल्के से गरम करके खा सकते हैं। मेहमानों के लिए यह जल्दी बनने वाला नाश्ता सुविधाजनक है। इन छोटी बातों का ध्यान रखने से हर बार सफल और स्वादिष्ट नतीजा मिलता है।

नाश्ते में विविधता लाने और साधारण भोजन से हटकर कुछ नया आजमाने के लिए मोर कली आदर्श रेसिपी है। छाछ और चावल के आटे का हल्का संयोजन पेट को तृप्त करता है और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। बनाने की प्रक्रिया सरल है जिसे कोई भी घर पर आसानी से दोहरा सकता है। परिवार को स्वस्थ और स्वादिष्ट दक्षिण भारतीय नाश्ते का स्वाद चखाने के लिए इस आसान रेसिपी को रसोई में जरूर आजमाएं। सही विधि अपनाने पर यह डिश बार-बार बनाने लायक बन जाती है।

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