LPG Cylinder New Rule:LPG Cylinder New Rule:

LPG Cylinder New Rule: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में ईंधन की आपूर्ति में आने वाली रुकावटों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार देश में तरल पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी और प्राकृतिक गैस का एक बड़ा रणनीतिक भंडार तैयार करने की व्यापक योजना पर विचार कर रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने के लिए घरेलू ईंधन उपभोक्ताओं से एक मामूली अतिरिक्त शुल्क वसूलने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से मंजूर हो जाता है तो आने वाले समय में आपके रसोई बजट में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए इस प्रस्ताव के तहत प्रति किलोग्राम एलपीजी पर एक निश्चित शुल्क लगाने की सिफारिश की गई है। इसके लागू होने से आम घरों में इस्तेमाल होने वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 18 रुपये तक का इजाफा संभव है। वहीं दूसरी ओर पाइप के जरिए घरों तक पहुंचने वाली प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी के बिल में भी लगभग दो प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

LPG Cylinder New Rule: एलपीजी और पीएनजी पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा तैयार की गई इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर गैस का एक विशाल आपातकालीन स्टॉक तैयार करना है। मंत्रालय ने अपने मसौदे में रसोई गैस पर 1.29 रुपये प्रति किलोग्राम का अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी पर 1.43 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर का शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया है।

अगर सरकार इस प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगा देती है तो देश के लगभग सभी घरेलू एलपीजी ग्राहकों को प्रति सिलेंडर लगभग 18 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। आमतौर पर उपयोग में आने वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमत में यह वृद्धि सीधे तौर पर लागू होगी। हालांकि इस विषय पर अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाकी है और विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया जारी है।

प्रस्तावित दरों के प्रभाव को देखें तो यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नजर नहीं आती है, लेकिन करोड़ों उपभोक्ताओं के सम्मिलित योगदान से एक बड़ा कोष तैयार किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इस मामूली शुल्क के माध्यम से उपभोक्ताओं पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डाले बिना एक विशाल और सुरक्षित राष्ट्रीय कोष का निर्माण किया जा सकता है।

पाइप्ड गैस का उपयोग करने वाले शहरी परिवारों के लिए भी मासिक बिल में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। औसतन दो प्रतिशत की इस वृद्धि से पीएनजी उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर बहुत मामूली प्रभाव पड़ेगा। सरकार का तर्क है कि इस प्रक्रिया से जमा होने वाला राजस्व पूरी तरह से देश की ऊर्जा संरचना को सुरक्षित बनाने में ही निवेश किया जाएगा।

वैश्विक संकट और भारत की ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता

हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में लगातार बने हुए तनावपूर्ण माहौल और वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने दुनिया भर की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। भारत अपनी आवश्यकता का अधिकांश कच्चा तेल और गैस विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर किसी भी प्रकार की अनिश्चितता भारत की आंतरिक आपूर्ति व्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर देती है।

विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में उत्पन्न होने वाली बाधाएं भारत के ईंधन आयात को सीधे प्रभावित करती हैं। जब भी इन मार्गों पर तनाव बढ़ता है, तब न केवल ईंधन की आपूर्ति में देरी होती है बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतें भी तेजी से उछलती हैं। इस प्रकार की स्थितियों से निपटने के लिए देश के पास अपना स्वयं का मजबूत आपातकालीन स्टॉक होना अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।

पूर्व में घटित वैश्विक घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार अब केवल तात्कालिक आपूर्ति पर निर्भर रहने के बजाय दीर्घकालिक सुरक्षा घेरा तैयार करना चाहती है। यदि देश में गैस का पर्याप्त रणनीतिक भंडार उपलब्ध होगा तो वैश्विक संकट के समय भी घरेलू बाजार में किल्लत या कीमतों में अचानक होने वाले भारी उछाल से आम जनता को बचाया जा सकेगा।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन स्थिति में गैस की उपलब्धता बनाए रखना किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बुनियादी शर्त होती है। उद्योग धंधों को सुचारू रूप से चलाने और घरेलू जरूरतों को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए रणनीतिक भंडार का निर्माण समय की मांग बन चुका है।

शुल्क से राजस्व जुटाने और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की रणनीति

सरकार की गणना के अनुसार इस प्रस्तावित शुल्क के माध्यम से हर साल लगभग 1.5 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में अरबों रुपये जुटाए जाने का अनुमान है। इस प्राप्त राशि का उपयोग पूरी तरह से समर्पित गैस भंडारण सुविधाओं के निर्माण और संबंधित अवसंरचना को विकसित करने में किया जाएगा।

मौजूदा खपत के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह बात सामने आती है कि एलपीजी पर लगाए जाने वाले शुल्क से सालाना लगभग 460 मिलियन डॉलर की आय हो सकती है। वहीं दूसरी ओर पीएनजी और अन्य औद्योगिक प्राकृतिक गैस पर प्रस्तावित शुल्क के जरिए प्रतिवर्ष लगभग 1 अरब डॉलर जुटाने की संभावना जताई गई है।

जुटाई गई इस विशाल धनराशि का सीधा इस्तेमाल किसी अन्य सरकारी खर्चे में करने के बजाय केवल रणनीतिक भंडार के लिए अवसंरचना खड़ी करने में होगा। इसमें बड़े पैमाने पर भूमिगत भंडारण गुफाएं, विशाल क्रायोजेनिक टैंक और गैस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से भेजने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार शामिल है। इस रणनीति के तहत सरकार घरेलू और विदेशी निजी कंपनियों के साथ मिलकर भी बुनियादी ढांचे के विकास पर काम कर सकती है। इस कोष की मदद से भारत में गैस भंडारण की ऐसी क्षमता विकसित की जाएगी जो दुनिया के विकसित देशों के मानकों के अनुरूप हो और संकट के समय त्वरित राहत प्रदान कर सके।

अगले एक दशक में 42 अरब डॉलर के भारी निवेश की योजना

भारत सरकार ने देश के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने के लिए अगले दस वर्षों का एक व्यापक विजन तैयार किया है। इस दस वर्षीय योजना के अंतर्गत लगभग 42 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और नए रणनीतिक भंडारों के निर्माण पर किया जाना तय किया गया है। इस विशाल परियोजना के पूरा होने के बाद देश में एलपीजी और एलएनजी दोनों के विशाल सुरक्षित स्टॉक उपलब्ध होंगे। अनुमान के अनुसार भारत को अपनी भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए लगभग 90 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी और लगभग 40 लाख टन एलपीजी के भंडारण की तत्काल आवश्यकता महसूस हो रही है।

इतने बड़े पैमाने पर गैस को सुरक्षित रखना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए आधुनिक तकनीक और अत्यधिक सुरक्षित भंडारण केंद्रों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि इस दस वर्षीय योजना में विशाल पूंजीगत व्यय की व्यवस्था की गई है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सरकार की योजना यह भी है कि देश में कम से कम दो महीने की घरेलू एलपीजी खपत और लगभग डेढ़ महीने की एलएनजी खपत के बराबर का सुरक्षित स्टॉक हर समय बना रहे। इससे किसी भी प्रकार की अंतरराष्ट्रीय आपात स्थिति या समुद्री नाकेबंदी के दौरान भी देश की दैनिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी।

LPG Cylinder New Rule: कच्चे तेल और गैस के वर्तमान रणनीतिक भंडार की स्थिति

अगर भारत में रणनीतिक ईंधन भंडारण की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो देश के पास कच्चे तेल का तो कुछ हद तक सुरक्षित स्टॉक मौजूद है, लेकिन गैस के मामले में स्थिति अभी भी काफी नाजुक है। वर्तमान में भारत के पास सरकार के स्वामित्व वाला लगभग 53.3 लाख टन रणनीतिक कच्चे तेल का भूमिगत भंडार उपलब्ध है।

इसके अतिरिक्त सरकार लगभग 65 लाख टन की अतिरिक्त क्षमता वाले कच्चे तेल के भंडारों का निर्माण विभिन्न चरणों में करवा रही है। हालांकि जब बात एलपीजी और एलएनजी की आती है तो देश के पास इस प्रकार का कोई समर्पित और अलग से रणनीतिक भंडार मौजूद नहीं है। वर्तमान में उपलब्ध गैस का स्टॉक मुख्य रूप से वाणिज्यिक तेल कंपनियों के डिपो और टर्मिनलों तक ही सीमित है।

भारत दुनिया में एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक और उपभोक्ता देश है। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशी बाजारों से खरीदता है। गैस के क्षेत्र में भी आयात पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है, जो देश को वैश्विक झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है।

यही कारण है कि पेट्रोलियम मंत्रालय अब कच्चे तेल की तर्ज पर गैस के लिए भी समर्पित और विशाल रणनीतिक भंडार स्थापित करने पर गंभीरता से काम कर रहा है। जब यह व्यवस्था लागू हो जाएगी तो भारत गैस सुरक्षा के मामले में भी काफी हद तक आत्मनिर्भर और सुरक्षित हो जाएगा।

इसके अतिरिक्त सरकार लगभग 65 लाख टन की अतिरिक्त क्षमता वाले कच्चे तेल के भंडारों का निर्माण विभिन्न चरणों में करवा रही है। हालांकि जब बात एलपीजी और एलएनजी की आती है तो देश के पास इस प्रकार का कोई समर्पित और अलग से रणनीतिक भंडार मौजूद नहीं है। वर्तमान में उपलब्ध गैस का स्टॉक मुख्य रूप से वाणिज्यिक तेल कंपनियों के डिपो और टर्मिनलों तक ही सीमित है।

भारत दुनिया में एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक और उपभोक्ता देश है। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशी बाजारों से खरीदता है। गैस के क्षेत्र में भी आयात पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई है, जो देश को वैश्विक झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है। यही कारण है कि पेट्रोलियम मंत्रालय अब कच्चे तेल की तर्ज पर गैस के लिए भी समर्पित और विशाल रणनीतिक भंडार स्थापित करने पर गंभीरता से काम कर रहा है। जब यह व्यवस्था लागू हो जाएगी तो भारत गैस सुरक्षा के मामले में भी काफी हद तक आत्मनिर्भर और सुरक्षित हो जाएगा।

LPG Cylinder New Rule: आम उपभोक्ताओं के बजट और दैनिक जीवन पर संभावित असर

प्रस्तावित शुल्क लागू होने की स्थिति में आम मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के मासिक बजट पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। एक सामान्य परिवार में औसतन हर महीने या डेढ़ महीने में एक एलपीजी सिलेंडर की खपत होती है। ऐसे में सिलेंडर की कीमत में 18 रुपये की बढ़ोतरी से वार्षिक बजट में मामूली इजाफा दर्ज किया जाएगा। यदि हम रसोई बजट के दृष्टिकोण से देखें तो 18 रुपये की यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा बड़ी नहीं लगती, लेकिन महंगाई के मौजूदा दौर में हर अतिरिक्त खर्च आम आदमी की जेब पर असर डालता है। हालांकि ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक प्रकार का सुरक्षा प्रीमियम है जो भविष्य के बड़े झटकों से बचाने का काम करेगा।

यदि भविष्य में किसी अंतरराष्ट्रीय युद्ध या संकट के कारण वैश्विक बाजार में गैस के दाम दो गुने या तीन गुने हो जाते हैं, तो उस समय देश का रणनीतिक भंडार आम जनता को कीमतों के उस भीषण झटके से बचाएगा। रणनीतिक भंडार से सब्सिडी वाली दर पर गैस जारी कर बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखा जा सकेगा। दूसरी तरफ औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए पीएनजी की दरों में होने वाली दो प्रतिशत की वृद्धि से उत्पादन लागत में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि व्यवसाय जगत भी इस बात से सहमत है कि अनिश्चित आपूर्ति के जोखिम से निपटने के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय भंडार का होना उनके दीर्घकालिक व्यावसायिक हितों के लिए भी फायदेमंद है।

इस प्रस्तावित नीति पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में लिया जाएगा, जहां आम जनता के हितों और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया जाएगा। यदि यह शुल्क लागू होता है तो सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि एकत्रित होने वाले एक-एक रुपये का पारदर्शी और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल हो ताकि देश में एक मजबूत, आधुनिक और सुरक्षित गैस अवसंरचना का निर्माण किया जा सके जो किसी भी वैश्विक अनिश्चितता के समय भारत की रसोई को निर्बाध रूप से रोशन रख सके।

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