मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam, Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat

मंत्र का अर्थ

हे त्रिनेत्रधारी शिव, हम आपकी पूजा करते हैं, आप हमें मृत्यु के बंधन से खीरे के फल की तरह सहज मुक्त करें।

जाप कब और कैसे करें

इसका जाप सोमवार, महाशिवरात्रि अथवा किसी गंभीर बीमारी या संकट के समय विशेष रूप से किया जाता है।

मंत्र जाप के लाभ

दीर्घायु, आरोग्य एवं अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है, रोग-दोष दूर होते हैं।

जाप विधि

  • प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ आसन पर बैठें, मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा में रखें।
  • रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला से जाप करें, एक माला में 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
  • जाप के दौरान मन को एकाग्र रखें तथा शुद्ध उच्चारण का प्रयास करें।

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