परिचय

नवरात्रि, गृह प्रवेश अथवा किसी भी बड़ी पूजा से पहले कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाती है, जो देवी-देवताओं के आह्वान का प्रतीक है।

शुभ मुहूर्त एवं समय

नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि के प्रातःकाल, अमावस्या के तुरंत बाद कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त होता है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • मिट्टी का कलश/तांबे का कलश
  • आम के पत्ते
  • नारियल
  • मौली (कलावा)
  • जौ बोने हेतु मिट्टी व जौ के बीज
  • गंगाजल
  • रोली/कुमकुम
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • धूपबत्ती व अगरबत्ती
  • घी का दीपक
  • कपूर
  • नारियल
  • फल एवं मिठाई
  • पान का पत्ता व सुपारी
  • लाल/पीला वस्त्र

पूजा विधि (चरण दर चरण)

  1. मिट्टी के पात्र में जौ बोएं।
  2. कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, सिक्का, अक्षत डालें।
  3. कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें।
  4. ऊपर नारियल रखकर मौली बांधें।
  5. कलश को जौ वाले पात्र के मध्य स्थापित करें और देवी का आह्वान करें।

मंत्र

मुख्य मंत्र: ॐ कलशाय नमः

लाभ एवं महत्व

घर में देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है, पूजा का संकल्प सफल होता है।

सावधानियां

कलश स्थापना के बाद नौ दिनों तक अखंड ज्योति व कलश की स्वच्छता बनाए रखें।

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