ताज़ा खबर
दूरदर्शन का इतिहास: 1959 में दिल्ली से प्रयोग के तौर पर शुरुआत, 1982 में रंगीन हुआ टीवी, ऐसे बदला भारत का प्रसारण What Is the UN Human Rights Council? Members, Universal Periodic Review and India’s Role आसियान क्या है: 1967 में बना 11 देशों का संगठन, भारत की एक्ट ईस्ट नीति में क्यों है सबसे अहम BREAKING: I4C and CERT-In issue alert for Indian banks regarding AI based cyberattacks and theft BREAKING: I4C और CERT-In ने भारतीय बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए एआई साइबर अलर्ट जारी किया Kamakhya Temple Guwahati: History, Ambubachi Mela, Darshan and Visitor Guide BREAKING: परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में पंजाब सरकार और इंसाफ कमेटी के बीच समझौता हुआ नई गाड़ी का बीमा: थर्ड पार्टी अनिवार्य, ओन डैमेज, ऐड-ऑन और शोरूम के बाहर से बीमा लेने की जानकारी
ट्रेंडिंग
धर्म

शुक्रवार को ये उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा मिलने की मान्यता, धन-समृद्धि के लिए ऐसे करें पूजा

शुक्रवार को ये उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा मिलने की मान्यता, धन-समृद्धि के लिए ऐसे करें पूजा

सारांश

  • सनातन हिंदू धर्म परंपरा में सप्ताह के प्रत्येक वार का संबंध किसी विशिष्ट देवी-देवता, ग्रह और ऊर्जा से माना गया है।
  • इसके अतिरिक्त, उत्तर भारत और पश्चिमी भारत के कई क्षेत्रों में महिलाएं शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत और पूजन भी बड़े नियम-संयम के साथ करती हैं।
  • भोग के रूप में मां लक्ष्मी को सफेद रंग की मिष्ठान्न, विशेष रूप से गाय के दूध से बनी खीर, मखाना, बताशे अथवा नारियल का नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
  • इसके साथ ही, शुक्रवार के दिन पहली रोटी गौमाता के लिए निकालने और गाय को हरा चारा, आटा व गुड़ खिलाने की लोक परंपरा भी प्रचलित है।

सनातन हिंदू धर्म परंपरा में सप्ताह के प्रत्येक वार का संबंध किसी विशिष्ट देवी-देवता, ग्रह और ऊर्जा से माना गया है। पंचांग व्यवस्था के अनुसार शुक्रवार का दिन विशेष रूप से धन, ऐश्वर्य, वैभव और भौतिक सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माता महालक्ष्मी को समर्पित है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी शुक्रवार का कारक ग्रह शुक्र माना जाता है, जो सौंदर्य, आकर्षण, कला और आर्थिक संपन्नता का प्रतीक है। यही कारण है कि भारतीय परिवारों में शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से आराधना, व्रत और विशेष धार्मिक अनुष्ठान करने की सुदीर्घ परंपरा चली आ रही है।

धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं में यह उल्लेख मिलता है कि जिस घर में स्वच्छता, अनुशासन, आपसी प्रेम और सकारात्मक वातावरण बना रहता है, वहां माता लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। शुक्रवार के दिन किए जाने वाले विशिष्ट उपाय, जैसे संध्याकालीन दीपदान, सफेद वस्तुओं का दान, महालक्ष्मी मंत्रों का जप और भगवान विष्णु के साथ युगल पूजन, साधक के जीवन में सुख-शांति और मानसिक संतोष का संचार करते हैं। यद्यपि ये सभी अनुष्ठान धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित हैं, किंतु जीवन में अनुशासन, शुचिता और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने में इनका बड़ा व्यावहारिक महत्व माना जाता है।

शुक्रवार को किसकी करें आराधना: मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और संतोषी माता का महत्व

शुक्रवार के दिन मुख्य रूप से माता महालक्ष्मी की उपासना की जाती है। पुराणों के अनुसार, मां लक्ष्मी चंचल स्वभाव की मानी जाती हैं, किंतु जब उनकी आराधना उनके पति भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ की जाती है, तो वे उस स्थान पर स्थायी रूप से निवास करती हैं। इसलिए कई श्रद्धालु शुक्रवार को ‘लक्ष्मीनारायण’ के युगल स्वरूप की पूजा करते हैं, जिससे परिवार में आर्थिक संपन्नता के साथ-साथ नैतिक संतुलन और पारिवारिक सौहार्द बना रहे।

इसके अतिरिक्त, उत्तर भारत और पश्चिमी भारत के कई क्षेत्रों में महिलाएं शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत और पूजन भी बड़े नियम-संयम के साथ करती हैं। संतोषी माता को भगवान श्रीगणेश की पुत्री माना गया है और उनकी उपासना से जीवन में संतोष, धैर्य और पारिवारिक सुख की प्राप्ति का विश्वास रखा जाता है। संतोषी माता के व्रत में खट्टी वस्तुओं के सेवन और स्पर्श से पूरी तरह परहेज करने का विशेष नियम होता है।

स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा: घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल की तैयारी

धार्मिक मान्यताओं में स्वच्छता को सीधे तौर पर ‘लक्ष्मी के आगमन’ का पहला द्वार माना गया है। ऐसा विश्वास है कि अव्यवस्था, गंदगी और अंधकार वाले स्थानों से नकारात्मक ऊर्जा पनपती है, जिससे परिवार में अशांति और दरिद्रता का वास होता है। इसलिए शुक्रवार की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर घर के मुख्य द्वार और आंगन को जल से धोकर साफ करने की परंपरा है।

घर के प्रवेश द्वार पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक का पावन चिह्न बनाना और ताजे फूलों की रंगोली सजाना अत्यंत शुभकारी माना जाता है। पूजा स्थल की तांबे या पीतल की मूर्तियों को गंगाजल और पंचामृत से स्वच्छ कर एक लाल या पीले रेशमी वस्त्र पर माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करना चाहिए। वातावरण को पवित्र और सुगंधित बनाने के लिए गुलाब, मोगरा या चंदन की धूप बत्ती का उपयोग मानसिक शांति प्रदान करने वाला होता है।

शुक्रवार की पूजा का शास्त्रीय विधान: अर्पण, नैवेद्य और आरती

शुक्रवार के दिन पूजा करने वाले जातक को सुबह नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ, अधिमानतः सफेद या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा की चौकी पर माता लक्ष्मी के सम्मुख शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें। मां लक्ष्मी को लाल या गुलाबी कमल का पुष्प, गुलाब की माला, अक्षत, रोली और इत्र अर्पित करना विशेष रूप से प्रिय माना गया है।

भोग के रूप में मां लक्ष्मी को सफेद रंग की मिष्ठान्न, विशेष रूप से गाय के दूध से बनी खीर, मखाना, बताशे अथवा नारियल का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान मन में किसी भी प्रकार का द्वेष, तनाव या क्रोध न रखें। सम्पूर्ण विधि-विधान के पश्चात कर्पूर जलाकर माता लक्ष्मी की आरती गाएं और परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद का वितरण करें।

महालक्ष्मी मंत्र और श्रीसूक्त का पाठ: मानसिक एकाग्रता का साधन

मंत्र साधना को सनातन परंपरा में ईश्वरीय चेतना से जुड़ने का सबसे सरल और शक्तिशाली माध्यम माना गया है। शुक्रवार के दिन पूजा करते समय मां लक्ष्मी के बीज मंत्र “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” अथवा “ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः” का कमलगट्टे या स्फटिक की माला से 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

यदि समय उपलब्ध हो, तो ऋग्वेदोक्त ‘श्रीसूक्त’ अथवा ‘कनकधारा स्तोत्र’ का सस्वर पाठ करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से घर में धन की कमी दूर होती है और साधक के आंतरिक भय व दरिद्रता का नाश होता है। मंत्र जप करते समय वाणी की शुद्धता और मन की स्थिरता सबसे अनिवार्य शर्त है।

सफेद वस्तुओं का दान और गोसेवा: पुण्य संचय की प्राचीन परंपरा

शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह और मां लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए सफेद और मीठी वस्तुओं के दान का विशेष महत्व बताया गया है। सामर्थ्यानुसार जरूरतमंदों या निर्धन कन्याओं को चावल, दूध, मिश्री, चीनी, दही, सफेद वस्त्र और सुगंधित पदार्थों का दान करना चाहिए। भारतीय दर्शन में दान का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक फल प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशीलता और सहायता की भावना को जीवित रखना है।

इसके साथ ही, शुक्रवार के दिन पहली रोटी गौमाता के लिए निकालने और गाय को हरा चारा, आटा व गुड़ खिलाने की लोक परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि गाय में तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का अंश समाहित होता है, अतः गोसेवा करने से समस्त ग्रह दोष शांत होते हैं और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा तथा संपन्नता का विस्तार होता है।

संध्याकालीन दीपदान: घर के मुख्य द्वार पर जलाएं घी का दीपक

शास्त्रों में गोधूलि वेला यानी सूर्यास्त के ठीक बाद के समय को माता लक्ष्मी के पृथ्वी पर विचरण का काल माना गया है। इसलिए शुक्रवार की शाम को घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर और घर के मंदिर में गाय के घी का चौमुखा या एकमुखी दीपक प्रज्वलित करने का विधान है।

तुलसी के पौधे के समीप भी संध्या के समय घी का दीपक जलाने से वास्तु दोषों का निवारण होने की मान्यता है। दीप प्रज्वलित करते समय अग्नि सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें और दीपक को किसी सुरक्षित और खुले स्थान पर ही स्थापित करें। संध्या के समय घर में मधुर ध्वनि में घंटानाद और शंखनाद करने से वातावरण की नकारात्मक तरंगें नष्ट होती हैं।

निष्कर्ष

शुक्रवार का दिन भक्ति, श्रद्धा, शुचिता और सकारात्मक संकल्पों के समन्वय का पावन अवसर है। मां लक्ष्मी की विधिवत आराधना, मंत्र जप, गोसेवा और जरूरतमंदों की निस्वार्थ सहायता जैसे उपाय न केवल व्यक्ति के मन को शांति और आत्मबल प्रदान करते हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। यह ध्यान रखना भी उतना ही अनिवार्य है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ ईमानदारी से किया गया कठोर परिश्रम, विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन और सही निर्णय ही जीवन में वास्तविक आर्थिक प्रगति और सफलता का स्थायी आधार बनते हैं।

यह भी पढ़ें

लेखक

Netsha Singh

नेत्शा सिंह डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं। वे सरकारी योजनाओं, आपका पैसा, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल न्यूज़ लेखन में उन्हें लगभग एक साल का अनुभव है; इससे पहले वे खबर नगरी और ऑनलाइन ताज़ा खबर के साथ काम कर चुकी हैं और यूट्यूब पर समसामयिक विषयों पर कंटेंट भी बनाती हैं।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X