UP News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जिले के महुली गांव में भारी बारिश के चलते करीब 100 साल पुराना जर्जर मकान अचानक ढह गया। 6 अगस्त 2026 की तड़के हुए इस भीषण हादसे में मकान के मलबे में दबकर एक ही परिवार के 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जिस समय यह घटना घटी, उस वक्त पूरा परिवार गहरी नींद में सो रहा था। इस दुखद घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा और कोहराम पसरा हुआ है।
प्रतापगढ़ मकान हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत बचाव दल की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला गया। हालांकि अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने परिवार के छह सदस्यों को मृत घोषित कर दिया। इस घटना में परिवार का केवल एक युवक ही भाग्यवश सुरक्षित बच पाया है।
तड़के दो बजे अचानक भरभराकर गिरा मकान
यह दर्दनाक हादसा प्रतापगढ़ के महुली गांव में 6 अगस्त की रात करीब दो बजे हुआ। गांव निवासी प्रमोद श्रीवास्तव का परिवार अपने पुराने पैतृक मकान में सो रहा था।
लगातार हो रही बारिश के कारण जर्जर हो चुका यह 100 साल पुराना मकान अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गया। तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े।
UP News: ग्रामीणों और पुलिस ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
चीख-पुकार मचते ही ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम को सूचना दी। प्रशासनिक अमला तुरंत राहत सामग्री के साथ मौके पर पहुंचा।
पुलिस, दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर भारी मलबे को हटाने का काम शुरू किया। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालकर तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने 6 लोगों को मृत घोषित किया
अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने परिवार के छह सदस्यों को मृत घोषित कर दिया। मलबे में दबने से किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
मृतकों की पहचान 60 वर्षीय प्रमोद श्रीवास्तव, उनकी पत्नी रीता, बेटे नितिन, बहू माधुरी और दो मासूम बच्चों माधव व अद्विक के रूप में हुई है।
UP News: परिवार का एक सदस्य हादसे में बाल-बाल बचा
इस भयावह हादसे में प्रमोद श्रीवास्तव के 28 वर्षीय पुत्र अमन की जान बाल-बाल बच गई। हादसे के वक्त वह मकान के ऐसे हिस्से में थे जो पूरी तरह क्षतिग्रस्त नहीं हुआ।
अमन को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। चिकित्सकों के अनुसार उनकी शारीरिक स्थिति पूरी तरह सामान्य और स्वस्थ है, लेकिन सदमे में हैं।
जर्जर मकानों पर भारी बारिश का असर
प्रतापगढ़ जिले में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश पुरानी इमारतों के लिए काल बन रही है। नमी के कारण पुरानी दीवारें कमजोर हो रही हैं।
महुली गांव की यह इमारत काफी पुरानी थी और बारिश के पानी के निरंतर रिसाव ने इसकी नींव को पूरी तरह खोखला कर दिया था।
UP News: जिले में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
प्रतापगढ़ में बारिश के कारण जर्जर इमारतों और जलभराव से जुड़े हादसे पहले भी सामने आ चुके हैं। हाल ही में पट्टी तहसील में कच्चा मकान ढहने से एक किसान घायल हुआ था।
इसके अलावा करीब 10 दिन पहले 10 फीट गहरे पानी भरे गड्ढे में गिरने से 5 साल की मासूम बच्ची मानसी की जान चली गई थी।
जिला प्रशासन ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
घटना के बाद जिला प्रशासन ने प्रभावित स्थल का निरीक्षण किया है। राजस्व टीम को नुकसान का आकलन करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को नियमानुसार आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
UP News: जर्जर इमारतों को लेकर बढ़ी चिंताएं
इस दुखद घटना ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में मौजूद पुरानी व जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के मौसम में ऐसे मकान बेहद खतरनाक साबित होते हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे बारिश के दौरान जर्जर और पुराने ढांचों में रहने से बचें ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
प्रतापगढ़ के महुली गांव में हुआ यह दर्दनाक हादसा पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत दुखद है, जिसने एक ही झटके में हंसते-खेलते परिवार की तीन पीढ़ियों को खत्म कर दिया। 100 साल पुराने जर्जर मकान के ढहने से हुई छह लोगों की मौत प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। मानसून के दौरान जीर्ण-शीर्ण इमारतों की समय पर पहचान और सुरक्षात्मक कदम उठाना बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन को चाहिए कि वह जर्जर मकानों का सर्वे कराकर त्वरित कार्रवाई करे और पीड़ित परिवार के एकमात्र जीवित सदस्य अमन को हर संभव प्रशासनिक व आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।
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