Chaurchan 2026: बिहार और झारखंड में चौठचंद्र पर्व का विशेष स्थान है। इसे मिथिलांचल में मिनी छठ भी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार व्रत से परिवार में सुख-समृद्धि और संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। बुद्धि, शिक्षा और बाधाओं के हटने की भी बात कही जाती है।
ये धार्मिक विश्वास हैं, गारंटी नहीं। मिथिला पंचांग के अनुसार गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:30 से दोपहर 12:58 बजे तक रहेगा।चौठचंद्र 2026, चौठचंद्र पूजा मुहूर्त, मिथिला चौठचंद्र, गणेश चंद्र पूजा बिहार, चौथचंद्र व्रत महत्व
Chaurchan 2026: पर्व किस दिन और क्यों मनाया जाता है
चौठचंद्र का अर्थ चतुर्थी तिथि का चांद है। यह भाद्रपद यानी भादो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को देखा जाने वाला चंद्र है। मैथिल परंपरा में इस दिन गणेश जी और चंद्रमा दोनों की आराधना होती है। शास्त्रों के अनुसार गणेश का जन्म चतुर्थी के मध्याह्न में हुआ माना जाता है इसलिए पूजा का समय दोपहर के करीब रखा गया है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
मिथिला पंचांग के अनुसार भगवान गणेश की पूजा सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक शुभ मानी गई है। स्थानीय सूर्योदय के अंतर से मिनटों का फर्क पड़ सकता है। भक्त अपने क्षेत्र के पंचांग से समय मिला लें। चंद्र अर्घ्य का समय चांद दिखाई देने पर होता है।
Chaurchan 2026: चंद्र दर्शन की अलग मान्यता
आमतौर पर चतुर्थी का चांद देखना अशुभ माना जाता है। मैथिल संप्रदाय में चौठचंद्र के दिन चंद्र दर्शन शुभ और मंगलकारी बताया जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्र देखने से झूठा कलंक नहीं लगता। यह क्षेत्रीय परंपरा सामान्य गणेश चतुर्थी वाले निषेध से अलग है।
कलंक से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार चतुर्थी का चांद देखने से आरोप लग सकता है। श्रीमद्भागवत महापुराण से जुड़ी कथा में श्रीकृष्ण पर स्यमन्तक मणि चुराने का आरोप लगा था। कहा जाता है द्वापर में उन्होंने चतुर्थी का चांद देखा था। नारद जी ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से कलंक नहीं लगता और लगा हो तो दूर हो जाता है। यह कथा आस्था का हिस्सा है।
Chaurchan 2026: पकवान और पूजा सामग्री
इस दिन खीर यानी चावल-गुड़, गुड़ वाली पूड़ी अगर संभव हो, पिरुकिया यानी गुझिया और मीठी टिकरी जैसे पारंपरिक पकवान बनते हैं। भोग चंद्र देव को लगाया जाता है। सामग्री बांस के सूप में रखकर आंगन में पूजन के लिए रखी जाती है। दूध, दही, फल, सिंदूर, तिल, सुपारी, चंदन, शुद्ध जल, शंख, नया वस्त्र, अक्षत, दुर्वा, बेलपत्र, सफेद फूल, केले व आम के पत्ते, कलश और दीप भी पूजा में प्रयुक्त होते हैं।
चौठचंद्र 2026 बिहार-झारखंड की मैथिल परंपरा का पर्व है जिसमें गणेश पूजा और चंद्र अर्घ्य साथ होते हैं। गणेश पूजा का मुहूर्त सुबह 11:30 से दोपहर 12:58 बजे तक बताया गया है।
सामान्य चतुर्थी निषेध के विपरीत यहां चंद्र दर्शन शुभ माना जाता है। खीर, पिरुकिया और टिकरी जैसे पकवान बांस के सूप में रखकर आंगन में भोग लगता है। सुख-समृद्धि और कलंक दूर होने की बातें धार्मिक मान्यताएं हैं। भक्त स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर पूजा कर सकते हैं।
Read More Here
- टीवीएस रोनिन ने जुलाई में पल्सर और अपाचे को पीछे छोड़ा, 200-350 सीसी में सबसे ज्यादा बिक्री
- हरियाणा में केएमपी एक्सप्रेसवे किनारे बसेगा नमो सिटी, 9 हजार एकड़ में गुरुग्राम जैसा शहर
- UP Panchayat Election 2026: नवंबर तक कराने का दबाव, आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं
- UP Crime: रायबरेली लेखपाल मामले पर अखिलेश यादव का हमला, तत्काल निलंबन की मांग




5 टिप्पणियाँ