JSSC CGL Protest: रांची की सड़कों पर प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों और झारखंड सरकार के बीच भरोसे की जंग अब बेहद तीखी होती जा रही है। एक तरफ जहाँ सरकार यह दावा कर रही है कि वह छात्रों की मांगों पर पूरी गंभीरता से सकारात्मक कदम उठा रही है और उच्च स्तर पर बैठकों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ आक्रोशित छात्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ’25 रटे-रटाए बहानों’ की एक पूरी सूची सार्वजनिक कर दी है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का सीधा और स्पष्ट आरोप है कि सरकार किसी भी प्रकार का ठोस और निर्णायक फैसला लेने के बजाय केवल लंबे आश्वासन और नई तारीखें देकर मामले को टालने का प्रयास कर रही है। राज्य में लगातार बढ़ रहे इस तनाव के बीच प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
JSSC CGL Protest: सरकार के वादों के जवाब में छात्रों ने खोला मोर्चा
हाल ही में राज्य सरकार की एक मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह जानकारी साझा की थी कि सरकार जेएसएससी-सीजीएल समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार लाने को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में छात्र प्रतिनिधियों के साथ वार्ता के दो दौर सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं और सीआईडी जांच के साथ-साथ न्यायिक निगरानी तथा आईआईटी एवं आईआईएम के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय परीक्षा सुधार समिति के गठन पर काम चल रहा है।
हालांकि, सरकार के इन दावों के विपरीत जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच से जुड़े छात्रों ने एक के बाद एक सरकार के 25 ऐसे बयानों और बहानों की सूची जारी कर दी है, जिन्हें वे खोखला करार दे रहे हैं। छात्रों द्वारा जारी की गई इस सूची में उन तमाम रटे-रटाए जवाबों को शामिल किया गया है, जैसे कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है, संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की गई है, अभ्यर्थियों की मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार किया जा रहा है, और सही समय आने पर उचित निर्णय लिया जाएगा। छात्रों का कहना है कि वे पिछले कई सालों से लगातार ऐसे ही गोलमोल जवाब सुनते आ रहे हैं, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य रहते हैं।
सचिवालय और विधानसभा घेराव के बाद अब सीएम हाउस के अल्टीमेटम से हड़कंप
राजधानी रांची में जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो हाल ही में हुए विधानसभा घेराव के प्रदर्शन के बाद से छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। भले ही धरना स्थल पर प्रदर्शनकारी छात्रों की संख्या में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखा जा रहा हो, लेकिन अभ्यर्थियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्दबाजी में कोई संतोषजनक और ठोस रास्ता नहीं निकाला, तो वे मुख्यमंत्री आवास का सीधा घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।
छात्रों के इस आक्रामक रुख और खुफिया तंत्र से मिल रहे इनपुट्स के बाद रांची जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरे इलाके को एक तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासन लगातार छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है, लेकिन युवा वर्ग अब किसी भी आश्वासन के चक्रव्यूह में फंसने को तैयार नहीं है।
JSSC CGL Protest: परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग और आगे की राजनीतिक हलचल
छात्र नेताओं का दोटूक कहना है कि जेएसएससी-सीजीएल जैसी प्रमुख परीक्षाओं में हुए कथित फर्जीवाड़े, गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों में किसी भी प्रकार की लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार भले ही नब्बे दिनों के भीतर जांच प्रक्रिया पूरी करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिला रही हो, लेकिन अभ्यर्थियों की जिद है कि जब तक विवादित परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द करके इस पूरी भर्ती प्रणाली को पारदर्शी नहीं बनाया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन किसी न किसी रूप में अनवरत जारी रहेगा।
राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है और विपक्षी दल भी इस मामले में सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा तय करने में एक बड़ा कारक साबित हो सकता है।
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