Sawan Pradosh Vrat: 10 अगस्त 2026 को सावन माह का दूसरा सोमवार पड़ रहा है। हिंदू धर्म में सावन सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
इस बार यह दिन और भी शुभ हो गया है क्योंकि सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है। दोनों ही व्रत भगवान शिव को समर्पित हैं। इस दुर्लभ योग में शिवलिंग पर सही चीजों का अर्पण करने से विशेष कृपा मिलने की बात कही जाती है। भक्त इस दिन भोलेनाथ की पूजा में विशेष श्रद्धा दिखाते हैं।
Sawan Pradosh Vrat: सावन सोमवार और प्रदोष का शुभ संयोग
सावन माह में सोमवार के दिन उपवास रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन की आराधना से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। जब यही सोमवार प्रदोष तिथि पर आता है तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। इस संयोग को अत्यंत शुभ माना जाता है। भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होने के साथ कुंडली में चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत होती है। भक्त इस दिन मंदिरों में जाकर या घर पर शिवलिंग की पूजा करते हैं।
शिवलिंग पर दूध का अभिषेक
इस शुभ योग में शिवलिंग का दूध से अभिषेक करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे अविवाहित जातकों को मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। दूध से जलाभिषेक करने से भाग्य भी मजबूत होता है। शुद्ध दूध का इस्तेमाल करके अभिषेक करने से पूजा का फल मिलता है। भक्त इस विधि को श्रद्धापूर्वक अपनाते हैं।
Sawan Pradosh Vrat: भांग धतूरा और फूलों का अर्पण
सावन सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर भांग, धतूरा और आक के फूल चढ़ाने की परंपरा है। ये चीजें भगवान शिव को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। इनके अर्पण से जीवन की रुकावटें और परेशानियां दूर होने की मान्यता है। शुद्ध और साफ सामग्री का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।
शहद और तिल का महत्व
शिवलिंग पर शहद चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। तिल अर्पित करने से शनि दोष के अशुभ प्रभाव कम होने की बात कही जाती है। साथ ही आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलने की मान्यता भी है। दोनों चीजों का सही तरीके से अर्पण करने से पूजा पूर्ण होती है।
Sawan Pradosh Vrat: बेलपत्र शमी पत्ते और अक्षत
शिवलिंग पर बिना कटे-फटे और साफ बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। बेलपत्र भोलेनाथ को बेहद प्रिय है। इसके अलावा शमी के पत्ते भी चढ़ाने की सलाह दी जाती है। अक्षत यानी बिना टूटे चावल भी जरूर अर्पित करें। अक्षत चढ़ाने से चंद्रमा मजबूत होता है और चंद्र दोष का प्रभाव कम होता है। ये सामग्री आसानी से उपलब्ध होती है।
सोम प्रदोष का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त को सुबह 8 बजे शुरू होगी। इसका समापन 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगा। सोमवार को प्रदोष पूजा का मुहूर्त शाम 7 बजकर 9 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल को भगवान शिव की पूजा के लिए उत्तम समय माना जाता है। इस दौरान पूजा करने से विशेष फल मिलने की मान्यता है।
Sawan Pradosh Vrat: सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
जब प्रदोष तिथि सोमवार को पड़ती है तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। सफेद रंग की चीजों का दान करने से चंद्र दोष दूर होने और चंद्रमा की कृपा मिलने की बात कही जाती है। भक्त इस दिन सफेद वस्त्र या खाद्य सामग्री का दान भी करते हैं।
सावन के दूसरे सोमवार पर प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए विशेष अवसर लेकर आया है। 10 अगस्त को शिवलिंग पर दूध, भांग-धतूरा, शहद, तिल, बेलपत्र, शमी पत्ते और अक्षत का अर्पण करने से शुभ फल मिलने की मान्यता है। प्रदोष पूजा का मुहूर्त शाम सात बजे से रात साढ़े नौ बजे तक रहेगा। सोम प्रदोष के दिन भगवान शिव की कृपा और चंद्रमा की मजबूती पर जोर दिया जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत और पूजा के माध्यम से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने का प्रयास करते हैं। यह संयोग सावन माह को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
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