Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मूल मुद्दा चुनावी प्रक्रिया और SIR से जुड़े सवालों पर केंद्रित था लेकिन तीन अक्टूबर को हुई घटनाओं के बाद महिला पत्रकारों की शिकायत के साथ दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग प्रमुख हो गई। पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।
दो अक्टूबर से जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR से जुड़े मामलों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा सिविल सोसाइटी और छात्र संगठनों से जुड़े लोग भी इसमें शामिल रहे। तीन अक्टूबर को कपिल सिब्बल, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण समेत कई लोग मार्च में शामिल हुए। पुलिस ने मार्च को रोकते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी और जंतर मंतर इलाके में प्रतिबंध आदेश लागू थे।
Jantar Mantar Protest: प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई और पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
जंतर मंतर पर दो अक्टूबर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR से जुड़े मामलों और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। तीन अक्टूबर को कपिल सिब्बल, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण भी मार्च में शामिल हुए। पुलिस ने मार्च रोकते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया।
दिल्ली पुलिस का स्पष्ट कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और नई दिल्ली के जंतर मंतर क्षेत्र में प्रतिबंध आदेश लागू थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ा। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तीन एफआईआर दर्ज कीं। इनमें सरकारी आदेश की अवहेलना, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा और गैरकानूनी तरीके से जमा होने जैसे आरोपों से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। दो एफआईआर संसद मार्ग थाने और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
एसीपी विवेक भगत का नाम कैसे जुड़ा?
इसी प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि वह हिरासत में लिए जा रहे प्रदर्शनकारियों की कवरेज कर रही थीं। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर एसीपी विवेक भगत से सवाल किया। आरोप है कि इसके बाद उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई और उन्हें धक्का दिया गया। इस शिकायत की जांच अभी जारी है।
चार अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। इस घटनाक्रम के बाद विरोध का फोकस ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से हटकर पुलिस की भूमिका और एसीपी विवेक भगत के खिलाफ कार्रवाई पर केंद्रित हो गया।
Jantar Mantar Protest: मुद्दा इस्तीफे से एफआईआर की मांग तक कैसे पहुंचा?
मूल प्रदर्शन का केंद्र ज्ञानेश कुमार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोप थे। महिला पत्रकार की शिकायत के बाद पुलिस की भूमिका और एसीपी विवेक भगत के खिलाफ कार्रवाई नया मुद्दा बन गया। प्रदर्शन से जुड़े संगठनों ने शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मामला सामने आने के बाद पुलिस की ओर से कहा गया कि पहले शिकायत की जांच की जाएगी और उसके बाद एफआईआर पर फैसला होगा। इसी बात को लेकर प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मामले को लेकर पुलिस पर अपने अधिकारी को बचाने के आरोप भी लगाए गए हैं हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब यह विवाद केवल जंतर मंतर के प्रदर्शन या ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं रहा बल्कि पुलिस कार्रवाई और पत्रकारों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई है।
एसीपी विवेक भगत कौन हैं और पहले क्या हुआ था?
विवेक भगत दिल्ली पुलिस में एसीपी के पद पर तैनात हैं। इससे पहले बीस जुलाई दो हजार छब्बीस में भी जंतर मंतर से जुड़े एक अलग प्रदर्शन के दौरान उनका नाम सामने आया था। उस समय प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प में वह घायल हुए थे। उनके सिर कंधे और हाथ पैर में चोट लगने की जानकारी दी गई थी।
इस पृष्ठभूमि के कारण वर्तमान शिकायतों पर ध्यान केंद्रित हो गया है। प्रदर्शन से जुड़े संगठनों और पत्रकारों की ओर से तुरंत कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है। पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपकर निष्पक्षता का दावा किया है।
Jantar Mantar Protest: अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस पूरे मामले में दो समानांतर मुद्दे चल रहे हैं। एक तरफ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और दूसरी तरफ विवेक भगत के खिलाफ महिला पत्रकारों से कथित बदसलूकी पर एफआईआर की मांग। क्राइम ब्रांच की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों पर क्या कानूनी कार्रवाई होती है। इसलिए अभी किसी आरोप को तथ्य के तौर पर नहीं बल्कि शिकायत और आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
जंतर मंतर प्रदर्शन में यह बदलाव दर्शाता है कि एक मुद्दे पर शुरू हुआ विरोध कैसे घटनाक्रम के साथ नए आयाम ले सकता है। पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही पर सवाल उठने से पूरा मामला अब जांच के अधीन है। क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति साफ होगी। प्रदर्शनकारियों और संबंधित पक्षों की मांगों के बीच दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
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