परिचय

नवरात्रि की अष्टमी अथवा नवमी तिथि पर 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, इसे कन्या पूजन कहते हैं।

शुभ मुहूर्त एवं समय

अष्टमी या नवमी तिथि के प्रातःकाल कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • कन्याओं हेतु आसन
  • जल व तौलिया (पैर धोने हेतु)
  • रोली-अक्षत
  • हलवा-पूरी-चना (भोग हेतु)
  • उपहार/दक्षिणा

पूजा विधि (चरण दर चरण)

  1. कन्याओं का स्वागत करके उनके पैर धोएं।
  2. आसन पर बिठाकर तिलक करें, हाथ में मौली बांधें।
  3. हलवा-पूरी-चने का भोग खिलाएं।
  4. भेंट/दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा करें।

मंत्र

मुख्य मंत्र: ॐ कुमार्यै नमः

लाभ एवं महत्व

देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल मिलता है।

सावधानियां

कन्याओं के साथ आदरपूर्ण व्यवहार करें, उन्हें भूखा या अपमानित न भेजें।

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