परिचय

नवरात्रि के नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक) की पूजा विधि-विधान से की जाती है।

शुभ मुहूर्त एवं समय

प्रतिपदा से नवमी तक, प्रतिदिन प्रातः व संध्या पूजा की जाती है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • कलश स्थापना सामग्री
  • देवी के नौ स्वरूपों की तस्वीरें/मूर्ति
  • लाल चुनरी
  • नारियल
  • गंगाजल
  • रोली/कुमकुम
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • धूपबत्ती व अगरबत्ती
  • घी का दीपक
  • कपूर
  • नारियल
  • फल एवं मिठाई
  • पान का पत्ता व सुपारी
  • लाल/पीला वस्त्र

पूजा विधि (चरण दर चरण)

  1. प्रतिपदा को कलश स्थापना करें।
  2. प्रतिदिन देवी के संबंधित स्वरूप की पूजा करें।
  3. दुर्गा सप्तशती अथवा दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
  4. अष्टमी/नवमी को कन्या पूजन करें।
  5. नवमी अथवा दशमी को व्रत का पारण करके कलश विसर्जन करें।

मंत्र

मुख्य मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे (नवार्ण मंत्र)

लाभ एवं महत्व

शक्ति, साहस व सुरक्षा की प्राप्ति होती है, घर में सुख-समृद्धि आती है।

सावधानियां

व्रत के दौरान सात्विकता बनाए रखें, तामसिक भोजन से पूर्णतः परहेज करें।

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