मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः, तत्सवितुर्वरेण्यं, भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात्॥

Om Bhur Bhuvah Swah, Tat Savitur Varenyam, Bhargo Devasya Dheemahi, Dhiyo Yo Nah Prachodayat

मंत्र का अर्थ

हे सृष्टिकर्ता सूर्यदेव, आप हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें, हम आपके तेज का ध्यान करते हैं।

जाप कब और कैसे करें

गायत्री मंत्र का जाप प्रातः सूर्योदय के समय अथवा संध्या समय करना सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।

मंत्र जाप के लाभ

बुद्धि, एकाग्रता एवं आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है।

जाप विधि

  • प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ आसन पर बैठें, मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा में रखें।
  • रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला से जाप करें, एक माला में 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
  • जाप के दौरान मन को एकाग्र रखें तथा शुद्ध उच्चारण का प्रयास करें।

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