श्री दुर्गा चालीसा (Shri Durga Chalisa)

दोहा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥

चौपाई

शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रुप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रगट भई कालिका अवतारा। सर्जा नाश किया सब गारा॥
जय जय जय जगदम्ब भवानी। सब में ज्योति तुम्हारी समानी॥
शक्ति रूप को कोई नहिं जाना। महिमा अमित न जात बखाना॥

दुर्गा चालीसा का महत्व एवं पाठ विधि (Shri Durga Chalisa Path Vidhi)

नवरात्रि के नौ दिनों में तथा प्रत्येक मंगलवार-शुक्रवार को माता दुर्गा की चालीसा का पाठ किया जाता है। लाल पुष्प व कुमकुम अर्पित करके श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भय, रोग एवं शत्रु-बाधा दूर होती है तथा साहस व सुरक्षा की प्राप्ति होती है।

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