Ganga Aarti: गंगा आरती (ॐ जय गंगे माता)

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता।
जो नित तुमको ध्यावत, मनवांछित फल पाता॥

चम्पा चमेली बेला, वैजयन्ती माला।
मुक्ता हार शीश पर, सजत मृगमद टीका॥

शंकर के निज आश्रय, ब्रह्मा के तुम कमली।
विष्णुपदी सुरसरि तुम, त्रिपथगा हो निर्मली॥

हरि पद कमल विनिर्गत, तुम ही हो जग तारिणी।
शिव जटा में शोभित, नाम पतित पावनी॥

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता॥

गंगा आरती का महत्व (Ganga Aarti)

काशी, हरिद्वार व अन्य गंगा तटों पर प्रतिदिन संध्या समय होने वाली गंगा आरती विश्वप्रसिद्ध है। मान्यता है कि गंगा स्नान व आरती से समस्त पाप धुल जाते हैं और आत्मा को शांति मिलती है।

यह भी पढ़ें: Shri Ganesh Chalisa – सम्पूर्ण श्री गणेश चालीसाShiv Chalisa – शिव चालीसाShri Durga Chalisa – सम्पूर्ण श्री दुर्गा चालीसा

About The Author