विष्णु आरती (ॐ जय जगदीश हरे)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं मूरख फल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे॥

विष्णु आरती का महत्व

यह आरती लगभग हर हिंदू घर में प्रत्येक शुभ कार्य के अंत में गाई जाती है। भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार माने जाते हैं, अतः इनकी आरती से जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि आती है। एकादशी व गुरुवार के दिन यह विशेष फलदायी है।

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