सरस्वती आरती (जय सरस्वती माता)

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनि, त्रिभुवन विख्याता॥
चंद्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पड़ी अज्ञान भवन में, ज्ञान चिराग दिया॥
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता॥

सरस्वती आरती का महत्व

बसंत पंचमी तथा विद्यारंभ संस्कार के अवसर पर माता सरस्वती की यह आरती गाई जाती है। विद्या, बुद्धि और कला की प्राप्ति के लिए विद्यार्थी नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं।

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