गणेश आरती (जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
अंधन को आंख देत कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥

गणेश आरती का महत्व

किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ अथवा नई शुरुआत से पहले गणेश जी की आरती करने की परंपरा है, क्योंकि वे विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्य देव माने जाते हैं। बुधवार तथा गणेश चतुर्थी के दिन इस आरती का विशेष महत्व है।

आरती विधि

गणेश जी को दूर्वा, मोदक/लड्डू और सिंदूर अर्पित करके घी का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक आरती गाएं। आरती के अंत में परिक्रमा करके प्रसाद वितरित करें।

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