श्री राम आरती (आरती कीजै रघुवर जी की)

आरती कीजै रघुवर जी की। पतित पावन सीता पति की॥
सुंदर रूप मनोहर सूरत। सांवरि सूरत नैन विशाला॥
घन जिमि आभा तन की सोभा। लखि पुनि पुनि निज छबि मुसकाला॥
अवधपुरी के तुम हो राजा। सकल जगत में तुम्हरी माया॥
सिय के प्रीतम प्राणनाथ तुम। भक्तन के तुम हो सुखदाता॥
दशरथ के तुम हो सुत प्यारे। भरत लखन शत्रुघ्न दुलारे॥
जय जय जय श्रीरामचन्द्र प्रभु। जय जय जय सिया राम दुलारे॥
आरती कीजै रघुवर जी की। पतित पावन सीता पति की॥

श्री राम आरती का महत्व

भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम माने जाते हैं। उनकी आरती करने से घर में सुख-समृद्धि, मर्यादा और पारिवारिक सामंजस्य बना रहता है। प्रातः एवं संध्या पूजा में यह आरती विशेष रूप से गाई जाती है, विशेषकर रामनवमी और दीपावली के अवसर पर।

आरती विधि

श्रीराम दरबार (राम-सीता-लक्ष्मण-हनुमान) के सम्मुख घी का दीपक जलाएं, धूप-अगरबत्ती करें, फूल अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक आरती गाकर घंटी बजाएं। आरती के बाद परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

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