New Fielding Coach of Team India: भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम में श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी बदलाव देखने को मिला है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट के अनुभवी चेहरा रहे सुभदीप घोष को भारतीय राष्ट्रीय पुरुष क्रिकेट टीम का नया फील्डिंग कोच नियुक्त किया है। यह फैसला जिम्बाब्वे दौरे के समापन के बाद लिया गया है, जहां पूर्व फील्डिंग कोच टी. दिलीप का कार्यकाल समाप्त हो गया था और बोर्ड ने उनके अनुबंध को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया। सुभदीप घोष का कार्यकाल 15 अगस्त 2026 से श्रीलंका के गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच के साथ आधिकारिक तौर पर प्रारंभ हो जाएगा।
असम और रेलवे के पूर्व क्रिकेटर रहे सुभदीप घोष पिछले कई सालों से भारतीय क्रिकेट के सिस्टम में कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ के रूप में निरंतर सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में लंबे समय तक अपनी सेवाएं देने के साथ-साथ वे इंडिया-ए, भारतीय महिला क्रिकेट टीम और इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स तथा कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी बड़ी फ्रेंचाइजियों के साथ भी कार्य कर चुके हैं। उनकी यह नियुक्ति भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के उस दृष्टिकोण को भी दर्शाती है, जिसमें वे घरेलू संरचना में सिद्ध हो चुके अनुभवी भारतीय कोचों को राष्ट्रीय टीम के साथ जोड़ने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
श्रीलंका दौरा भारतीय क्रिकेट टीम के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के नए चक्र के लिहाज से यह सीरीज बेहद अहम है। ऐसे में टीम प्रबंधन ने सहयोगी स्टाफ के पुनर्गठन को तेजी से पूरा किया है। सुभदीप घोष अब बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल के साथ मिलकर भारतीय खिलाड़ियों की फील्डिंग को नए स्तर पर ले जाने का कार्य करेंगे।
श्रीलंका टेस्ट सीरीज से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट टीम का बड़ा फैसला
भारतीय क्रिकेट टीम के फील्डिंग विभाग में यह बदलाव एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर आया है। भारतीय टीम को 15 अगस्त से श्रीलंका की धरती पर गॉल अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच खेलना है। दो टेस्ट मैचों की इस सीरीज के लिए भारतीय टीम का कोचिंग स्टाफ अब पूरी तरह से नए कलेवर में दिखाई देगा। मुख्य कोच गौतम गंभीर की अगुवाई में टीम इंडिया एक नई रणनीति और ऊर्जा के साथ मैदान पर उतरने की तैयारी कर रही है।
फील्डिंग कोच के रूप में टी. दिलीप का कार्यकाल भारतीय क्रिकेट के लिए काफी सफल माना जाता रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों के बीच कैचिंग और ग्राउंड फील्डिंग के मानकों को काफी ऊंचा उठाया था। ड्रेसिंग रूम में मैच के बाद ‘बेस्ट फील्डर मेडल’ देने की परंपरा भी उन्हीं के समय लोकप्रिय हुई थी। हालांकि जिम्बाब्वे दौरे के बाद बोर्ड ने सपोर्ट स्टाफ के अनुबंधों की समीक्षा की और टी. दिलीप के साथ-साथ रयान टेन डोएशेट की विदाई का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके बाद बीसीसीआई ने सुभदीप घोष की विशेषज्ञता और उनके विशाल अनुभव को देखते हुए उन पर भरोसा जताया है।
सुभदीप घोष का आगमन भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के लिए भी एक नया अनुभव होगा। बोर्ड अधिकारियों का मानना है कि घोष का घरेलू और जूनियर स्तर के खिलाड़ियों के साथ काम करने का लंबा अनुभव राष्ट्रीय टीम के युवा खिलाड़ियों के लिए बेहद मददगार साबित होगा। गॉल की स्पिन-अनुकूल और कठिन परिस्थितियों में क्लोज-इन कैचिंग का महत्व बढ़ जाता है, जहां नए फील्डिंग कोच की रणनीतियों की पहली परीक्षा होगी।
New Fielding Coach of Team India: गौतम गंभीर के कोचिंग स्टाफ में शामिल हुए सुभदीप घोष
भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर अपने पूरे सपोर्ट स्टाफ को एक मजबूत और कुशल आकार देने में जुटे हैं। सुभदीप घोष के शामिल होने से गंभीर का कोचिंग ढांचा अब पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है। इस स्टाफ में सितांशु कोटक बल्लेबाजी कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज मोर्ने मोर्केल गेंदबाजी विभाग की देखरेख कर रहे हैं।
सुभदीप घोष और मुख्य कोच गौतम गंभीर के बीच का तालमेल काफी पुराना और मजबूत रहा है। इंडियन प्रीमियर लीग में दोनों ही दिग्गजों ने कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ एक ही सेटअप में काम किया है। ऐसे में गंभीर को सुभदीप घोष की कार्यप्रणाली और उनकी कोचिंग क्षमताओं का बहुत अच्छे से अंदाजा है। सपोर्ट स्टाफ में इस आपसी समझ का फायदा सीधे तौर पर भारतीय टीम के खिलाड़ियों को मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
फील्डिंग आज के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जीत-हार का अंतर तय करने वाला सबसे बड़ा कारक बन चुकी है। सितांशु कोटक के तकनीकी मार्गदर्शन और मोर्ने मोर्केल के तेज गेंदबाजी अनुभवों के साथ सुभदीप घोष की फील्डिंग तकनीक का समावेश टीम इंडिया के समग्र प्रदर्शन को और अधिक संतुलित बनाएगा। यह त्रिकोणीय सपोर्ट सिस्टम गॉल टेस्ट मैच से पहले टीम के अभ्यास सत्रों में लागू कर दिया जाएगा।
राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी से लेकर आईपीएल तक का समृद्ध अनुभव
सुभदीप घोष कोई नया नाम नहीं हैं, बल्कि वे पिछले छह से सात वर्षों से भारतीय क्रिकेट पारिस्थितिकी तंत्र में पर्दे के पीछे रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जब भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी यानी एनसीए के प्रमुख थे, तब सुभदीप घोष ने वहां फील्डिंग कोच के रूप में कई युवा प्रतिभाओं को तराशा था। एनसीए में बिताए गए इस समय ने उन्हें देश भर के उदीयमान खिलाड़ियों के साथ जुड़ाव बनाने और उनकी शारीरिक क्षमताओं को समझने का बेहतरीन मौका दिया।
एनसीए के अलावा घोष ने इंडिया-ए टीम के कई विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों को फील्डिंग की बारीक तकनीकें सिखाई हैं। वे भारतीय महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के साथ भी एक फील्डिंग कोच के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। महिलाओं की टीम के साथ उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय महिला खिलाड़ियों के ग्राउंड कवरेज और डायरेक्ट हिट के आंकड़ों में काफी सुधार दर्ज किया गया था।
फ्रेंचाइजी क्रिकेट की बात करें तो सुभदीप घोष का अनुभव काफी समृद्ध रहा है। वे आईपीएल की प्रमुख टीमों दिल्ली कैपिटल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के डगआउट का हिस्सा रह चुके हैं। टी20 क्रिकेट के अति-प्रतिस्पर्धी माहौल में जहां एक-एक रन बचाना और दबाव के क्षणों में कैच पकड़ना मैच का पासा पलट देता है, वहां घोष ने आधुनिक फील्डिंग ड्रिल और बायोमैकेनिक्स का बेहतरीन इस्तेमाल करके अपनी पहचान बनाई थी। उनका यह बहुआयामी अनुभव अब टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के काम आएगा।
New Fielding Coach of Team India: 17 फर्स्ट-क्लास मैचों के अनुभव से राष्ट्रीय कोच बनने तक का सफर
सुभदीप घोष के एक खिलाड़ी से लेकर राष्ट्रीय टीम के कोचिंग स्टाफ तक पहुंचने का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। 57 वर्षीय सुभदीप घोष ने अपने खेल करियर के दौरान घरेलू स्तर पर असम और रेलवे टीमों का प्रतिनिधित्व किया है। वे मुख्य रूप से एक विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में मैदान पर उतरते थे, जिससे उन्हें स्वाभाविक रूप से गेंद की लाइन और फील्डिंग पोजीशनिंग की बारीक समझ हासिल हुई।
घोष के प्रथम श्रेणी क्रिकेट करियर की शुरुआत 1994-95 के घरेलू क्रिकेट सत्र से हुई थी। उन्होंने 1994 से 2004 के बीच अपने 10 साल लंबे करियर में कुल 17 फर्स्ट-क्लास मैच और 17 लिस्ट-ए मैच खेले। हालांकि उनका खिलाड़ी के तौर पर करियर बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन मैदान पर उनकी उपस्थिति और खेल की समझ हमेशा से बेहतरीन मानी जाती थी। संन्यास लेने के बाद उन्होंने तुरंत कोचिंग का रुख किया और खुद को एक तकनीकी रूप से सक्षम कोच के रूप में स्थापित किया।
वे एक समय असम की रणजी टीम के मुख्य कोच की भूमिका भी सफलता पूर्वक निभा चुके हैं। असम जैसी उभरती हुई टीम को घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और वहां के स्थानीय खिलाड़ियों के कौशल को सुधारना उनकी शुरुआती कोचिंग सफलताओं में से एक था। इसके बाद ही बीसीसीआई ने उनके काम को पहचाना और उन्हें केंद्रीय अनुबंध के तहत एनसीए और अन्य राष्ट्रीय टीमों के साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की थी।
असम क्रिकेट एसोसिएशन ने जाहिर की खुशी और जताया गर्व
सुभदीप घोष की इस ऐतिहासिक नियुक्ति के बाद असम क्रिकेट एसोसिएशन यानी एसीए में भारी उत्साह का माहौल है। एसीए के शीर्ष अधिकारियों ने इस खबर की आधिकारिक पुष्टि करते हुए सुभदीप घोष को बधाई दी है। संघ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि सुभदीप ने पिछले कई वर्षों में भारतीय क्रिकेट की विभिन्न आयु-वर्ग की टीमों के साथ जिस निष्ठा और समर्पण के साथ काम किया है, यह पद उसी का प्रतिफल है।
असम क्रिकेट संघ का मानना है कि राज्य के किसी पूर्व खिलाड़ी का भारतीय पुरुष सीनियर टीम के मुख्य सपोर्ट स्टाफ में चुना जाना पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। इससे न केवल असम बल्कि पूरे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों और स्थानीय कोचों को यह विश्वास मिलेगा कि वे अपनी मेहनत और लगन के दम पर भारतीय क्रिकेट के सबसे ऊंचे मंच तक पहुंच सकते हैं।
घोष की इस उपलब्धि पर पूर्व खिलाड़ियों और कोचों ने भी उन्हें शुभकामनाएं भेजी हैं। असम के क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि सुभदीप ने हमेशा कम संसाधनों में भी बेहतरीन परिणाम देने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने जिस तरह से एनसीए में राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में काम किया और फिर आईपीएल टीमों के अंतरराष्ट्रीय सितारों को कोचिंग दी, उससे उनका दृष्टिकोण बेहद पेशेवर हो चुका है जो भारतीय टीम के लिए फायदेमंद होगा।
New Fielding Coach of Team India: गॉल टेस्ट के साथ शुरू होगी सुभदीप घोष की नई चुनौती
भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू हो रही दो मैचों की टेस्ट सीरीज से सुभदीप घोष के नए अध्याय की शुरुआत होगी। पहला टेस्ट मैच गॉल के ऐतिहासिक मैदान पर खेला जाना है, जो अपनी खास पिच और मौसम की परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। उपमहाद्वीप की ऐसी परिस्थितियों में जहां स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम होती है, वहां स्लिप और सिली पॉइंट जैसे क्लोज-इन स्थानों पर फील्डिंग करने वाले खिलाड़ियों की मुस्तैदी मैच का परिणाम तय करती है।
भारतीय टीम में कैचिंग दक्षता को लगातार बनाए रखना सुभदीप घोष की प्राथमिकताओं में से एक होगा। टेस्ट क्रिकेट में अक्सर देखा गया है कि आधे-अधूरे मौकों को लपकना टीम की जीत का आधार बनता है। सुभदीप घोष को अब भारतीय टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों जैसे रोहित शर्मा, विराट कोहली और युवा प्रतिभाओं के साथ मिलकर फील्डिंग सेशंस की योजना बनानी होगी ताकि गॉल और उसके बाद की सीरीज में कैच ड्रॉप की दर को न्यूनतम रखा जा सके।
इसके अलावा आधुनिक दौर के क्रिकेट में खिलाड़ियों की फिटनेस और थ्रोइंग तकनीक पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि चोट लगने की संभावना कम से कम रहे। सुभदीप घोष अपने पिछले अनुभवों का उपयोग करते हुए भारतीय खिलाड़ियों के लिए व्यक्तिगत फील्डिंग ड्रिल तैयार करेंगे। उनकी कोशिश होगी कि टी. दिलीप द्वारा स्थापित उच्च मानकों को बनाए रखते हुए उसमें अपनी नई तकनीकों और रणनीतियों को भी शामिल किया जाए।
श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में सुभदीप घोष का शामिल होना एक सुविचारित और रणनीतिक कदम माना जा रहा है। असम के इस पूर्व क्रिकेटर ने पिछले एक दशक में अपने काम, समर्पण और तकनीकी दक्षता के बल पर राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी से लेकर आईपीएल और अब सीनियर भारतीय टीम तक का सफर तय किया है। सितांशु कोटक, मोर्ने मोर्केल और मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ उनकी यह जुगलबंदी भारतीय टीम को गॉल टेस्ट में एक नई मजबूती प्रदान करेगी। यह नियुक्ति न केवल सुभदीप घोष के करियर का एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि यह भारत के घरेलू कोचिंग ढांचे की मजबूती को भी रेखांकित करती है। आगामी टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की फील्डिंग में आने वाले बदलावों पर अब पूरे क्रिकेट जगत की नजरें टिकी रहेंगी।
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