Treks to Avoid During Monsoon in India: मानसून के मौसम में भारत के पहाड़ हरे-भरे हो जाते हैं। झरने भर जाते हैं और नजारे बेहद खूबसूरत लगते हैं। लेकिन यही मौसम ट्रेकिंग के लिए सबसे जोखिम भरा भी साबित होता है। भारी बारिश से लैंडस्लाइड, अचानक बाढ़, उफनती नदियां, कम दृश्यता और फिसलन भरे रास्ते बन जाते हैं। अनुभवी ट्रेकर्स भी इन स्थितियों में फंस सकते हैं। जून से सितंबर के बीच इन खास रूट्स पर जाने से पहले सोच लेना चाहिए। कई लोकप्रिय ट्रेक्स इस दौरान टालने योग्य माने जाते हैं। यहां छह ऐसे प्रसिद्ध ट्रेक्स की जानकारी दी जा रही है जो मानसून में बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
हैम्टा पास ट्रेक हिमाचल प्रदेश में ज्यादा जोखिम
हैम्टा पास हिमाचल प्रदेश का एक सुंदर क्रॉसओवर ट्रेक है। यह हरे-भरे कुल्लू वैली को लाहौल के बंजर इलाकों से जोड़ता है। मानसून में यह रास्ता खास तौर पर खतरनाक हो जाता है। ट्रेकर्स को उफनती नदियां, कीचड़ भरे रास्ते और फिसलन वाले पत्थरों वाले हिस्से मिलते हैं। लगातार बारिश और कोहरे से दृश्यता कम हो जाती है। पानी पार करने वाले स्थान बारिश के बाद और तेज तथा अनिश्चित हो जाते हैं। इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। पहुंचने वाले सड़कों पर लैंडस्लाइड भी अभियान को रोक या देरी कर सकती है। मौसम के हिसाब से मध्य जून से जुलाई शुरुआत तक ही जाना बेहतर माना जाता है।
Treks to Avoid During Monsoon in India: वैली ऑफ फ्लावर्स उत्तराखंड में सावधानी जरूरी
वैली ऑफ फ्लावर्स मानसून में ही अपने चरम खिलने पर पहुंचती है। हजारों पर्यटक हर साल यहां आते हैं लेकिन यात्रा में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल तक पहुंचने वाला रास्ता陡ढ पहाड़ी सड़कों से गुजरता है जो लैंडस्लाइड के प्रति संवेदनशील हैं। लगातार बारिश पत्थर के रास्तों को फिसलन भरा बना देती है। उफनती नदियां और नाले चुनौती बढ़ा देते हैं। मौसम खराब होने पर अधिकारी कभी-कभी एक्सेस निलंबित कर देते हैं। आधिकारिक मौसम और ट्रेल एडवाइजरी जरूर जांच लें। बिना तैयारी के यहां जाना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक में मौसम अचानक बदलता है
कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक भारत के सबसे खूबसूरत अल्पाइन ट्रेक्स में गिना जाता है। यहां झीलें, विशाल घास के मैदान और नाटकीय पहाड़ी नजारे मिलते हैं। लेकिन मानसून में मौसम तेजी से बदल सकता है। भारी बारिश घास वाले ढलानों को फिसलन भरा बना देती है। बादल छा जाने से दृश्यता काफी कम हो जाती है। नाले पार करना ज्यादा खतरनाक हो जाता है। दूरदराज के कैंपसाइट्स तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है अगर मौसम बिगड़ जाए। ऊंचाई और लंबे ट्रेकिंग दिनों की वजह से यह रूट स्थिर मौसम वाले समय में ही करना चाहिए। मानसून में जोखिम काफी बढ़ जाता है।
Treks to Avoid During Monsoon in India: रूपकुंड ट्रेक उत्तराखंड में लैंडस्लाइड का डर
रूपकुंड ट्रेक अपने रहस्यमय कंकाल झील के लिए जाना जाता है। इसमें陡ढ चढ़ाई, चट्टानी इलाका और ऊंचाई वाले हिस्से शामिल हैं। हाल के वर्षों में पारिस्थितिकी कारणों से रूपकुंड तक पहुंच प्रतिबंधित रही है लेकिन आसपास के ट्रेकिंग रूट्स मानसून में कमजोर रहते हैं। भारी बारिश से लैंडस्लाइड, ढीली चट्टानें और फिसलन भरे रास्तों की संभावना बढ़ जाती है। घना कोहरा दृश्यता कम कर देता है जिससे खुले पहाड़ी हिस्सों में नेविगेशन मुश्किल हो जाता है। यात्रा से पहले लेटेस्ट एक्सेस नियमों की जांच जरूर कर लें। बिना जानकारी के जाना खतरनाक साबित हो सकता है।
सांदकफू ट्रेक पश्चिम बंगाल में कीचड़ और जोंक की समस्या
सांदकफू ट्रेक माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा, ल्होत्से और मकालू के शानदार नजारों के लिए मशहूर है। पूर्वी भारत के लोकप्रिय हाइकिंग रूट्स में यह शामिल है। मानसून में लगातार बारिश जंगली रास्तों को कीचड़ भरा और फिसलन वाला बना देती है। जोंक का प्रकोप आम हो जाता है। घने बादल पहाड़ी नजारों को ढक लेते हैं जो ट्रेकर्स को आकर्षित करते हैं। ट्रेलहेड तक पहुंचने वाली सड़कों पर भी लैंडस्लाइड का असर पड़ सकता है। सबसे अच्छा अनुभव शरद या वसंत ऋतु में होता है। मानसून में यह ट्रेक टालना ही समझदारी है।
Treks to Avoid During Monsoon in India: पिन पार्वती पास ट्रेक हिमाचल में सबसे कठिन और जोखिम भरा
पिन पार्वती पास ट्रेक भारत के सबसे कठिन हिमालयी अभियानों में गिना जाता है। इसमें उत्कृष्ट फिटनेस और ऊंचाई वाले ट्रेकिंग का अनुभव जरूरी है। मानसून में इसे करने से जोखिम काफी बढ़ जाता है। रास्ते में ग्लेशियर क्रॉसिंग, तेज बहने वाली नदियां,陡ढ चढ़ाई और दूरदराज के कैंपसाइट्स हैं। भारी बारिश से नाले तेजी से उफन सकते हैं। अस्थिर ढलानें लैंडस्लाइड और चट्टान गिरने के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। इतने रिमोट इलाके में बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। अनुकूल मौसम में और अनुभवी ट्रेकिंग ऑपरेटर्स के मार्गदर्शन में ही इसे करना चाहिए।
मानसून पहाड़ों को हरा-भरा बनाता है लेकिन ट्रेकिंग के लिए कई खतरे लेकर आता है। हैम्टा पास, वैली ऑफ फ्लावर्स, कश्मीर ग्रेट लेक्स, रूपकुंड, सांदकफू और पिन पार्वती पास जैसे लोकप्रिय रूट्स इस दौरान लैंडस्लाइड, उफनते पानी, फिसलन और कम दृश्यता की वजह से जोखिम भरे हो जाते हैं। जून से सितंबर के बीच इन ट्रेक्स को स्थगित करना बेहतर रहता है। हमेशा आधिकारिक मौसम पूर्वानुमान और ट्रेल स्थिति की जांच करें। अनुभवी गाइड के साथ और उचित तैयारी करके ही पहाड़ों का रुख करें। सुरक्षा को प्राथमिकता देकर ही प्रकृति का आनंद लिया जा सकता है। सूखे महीनों में ये ट्रेक्स कहीं ज्यादा सुरक्षित और सुखद अनुभव देते हैं।
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