Pickles and Papad Diabetes Risk: डायबिटीज या प्रीडायबिटीज वाले लोग अक्सर चावल, रोटी, ब्रेड या मिठाइयों पर ध्यान देते हैं। लेकिन थाली में रखे छोटे-छोटे साथी जैसे अचार, पापड़ और चटनी अक्सर नजरअंदाज रह जाते हैं। ये स्वाद, क्रंच और विविधता बढ़ाते हैं। सवाल यह है कि क्या ये साइड डिश भी खाने के बाद ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं। जवाब सीधा अच्छा या बुरा कहकर नहीं दिया जा सकता। इनकी सामग्री, बनाने का तरीका, खाई जाने वाली मात्रा और पूरे भोजन की संरचना सब कुछ मायने रखता है।
कुछ चटनियों में फाइबर, हेल्दी फैट या जड़ी-बूटियां होती हैं तो कुछ में चीनी या नमक ज्यादा। पापड़ और अचार भी तरह-तरह के होते हैं।
छोटे साथी भी कर सकते हैं असर
भारतीय भोजन में अचार, पापड़ और चटनी लगभग हर थाली का हिस्सा होते हैं। ये स्वाद बढ़ाते हैं लेकिन डायबिटीज के लिहाज से इन पर कम ध्यान दिया जाता है। मुख्य भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर तो नजर रहती है। लेकिन ये छोटी चीजें भी ग्लाइसेमिक रिस्पॉन्स को थोड़ा बहुत बदल सकती हैं। खासकर जब इन्हें ज्यादा मात्रा में खाया जाए। पोस्ट मील ब्लड शुगर यानी खाने के बाद ग्लूकोज का स्तर कई बातों पर निर्भर करता है। सिर्फ एक चीज को दोषी ठहराना सही नहीं। पूरे भोजन के कॉम्बिनेशन को समझना जरूरी है। सही चुनाव से इनका असर कम किया जा सकता है।
Pickles and Papad Diabetes Risk: सामग्री और बनाने के तरीके का महत्व
अचार में अक्सर तेल, नमक और कभी-कभी चीनी या गुड़ डाला जाता है। घर का बना अचार बाजार वाले से अलग हो सकता है। ज्यादा तेल और नमक वाले अचार से सोडियम बढ़ता है जो कुल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। पापड़ उड़द या चावल के आटे से बनते हैं और इन्हें तला या भुना जाता है। तलने से कैलोरी और फैट बढ़ जाता है। चटनियों में हरी चटनी में धनिया पुदीना होता है जो फाइबर देता है। लेकिन नारियल या मीठी चटनी में चीनी हो सकती है। तैयारी का तरीका तय करता है कि ये कितना असर डालेंगे। कम तेल कम नमक वाले विकल्प बेहतर रहते हैं। घर पर बनाकर कंट्रोल रखना आसान होता है।
मात्रा तय करती है असर की तीव्रता
छोटी मात्रा में अचार या पापड़ खाने से ब्लड शुगर पर बड़ा फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर रोज दो-तीन पापड़ या ज्यादा अचार लिया जाए तो कैलोरी और कार्ब का योग बढ़ जाता है। चटनी की एक बड़ी कटोरी भी शुगर स्पाइक में योगदान दे सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पोर्शन साइज बहुत महत्वपूर्ण है। थाली में इन्हें सजाने के बजाय सीमित मात्रा में लेना चाहिए। पूरे भोजन में रोटी या चावल की मात्रा कम रखकर बैलेंस बनाया जा सकता है। ज्यादा मात्रा में लेने से पोस्ट मील ग्लूकोज प्रभावित हो सकता है। संयम रखना सबसे अच्छी रणनीति है।
Pickles and Papad Diabetes Risk: कुछ विकल्प फायदेमंद भी हो सकते हैं
हरी चटनी में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो पाचन में मदद करते हैं। टमाटर या लहसुन वाली चटनी में कम कैलोरी रहती है। भुने हुए पापड़ तलने वाले से बेहतर होते हैं। कम नमक वाले अचार या सिरके वाले विकल्प सोडियम कम रखते हैं। ये चीजें भोजन में विविधता लाती हैं और संतुष्टि देती हैं। सही तरीके से चुने जाने पर ये डाइट को बोझिल नहीं बनातीं। जड़ी-बूटियों वाली चटनियां स्वाद के साथ कुछ पोषक तत्व भी देती हैं। बाजार के पैकेट बंद उत्पादों में लेबल जरूर देखें। घर का बना हमेशा बेहतर नियंत्रण देता है।
पूरे भोजन के साथ देखें प्रभाव
अकेले अचार या पापड़ को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अगर थाली में सब्जी दाल सलाद और प्रोटीन हो तो कुल ग्लाइसेमिक लोड कम रहता है। सिर्फ चावल और अचार के कॉम्बिनेशन से शुगर ज्यादा बढ़ सकता है। फाइबर युक्त सब्जियां और दाल के साथ लेने पर असर कम होता है। हर व्यक्ति की बॉडी अलग तरह से रिस्पॉन्स करती है। ब्लड शुगर मॉनिटर करके खुद का पैटर्न समझा जा सकता है। नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से सही रणनीति बनाई जा सकती है। छोटे बदलाव बड़े फर्क ला सकते हैं।
Pickles and Papad Diabetes Risk: डायबिटीज में कैसे करें सही चुनाव?
डायबिटीज वाले लोगों को इन साथियों को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं। बस समझदारी से चुनें। कम तेल वाले भुने पापड़, हरी चटनी और सीमित अचार बेहतर विकल्प हैं। मीठी चटनी और तले पापड़ से बचें। नमक की मात्रा पर ध्यान दें क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी रहता है। भोजन के साथ पानी या छाछ लेने से भी मदद मिलती है। लंबी अवधि में निरंतरता बनाए रखना जरूरी है। विशेषज्ञ की सलाह लेकर व्यक्तिगत प्लान बनाना सबसे अच्छा रहता है। स्वाद और सेहत दोनों को बैलेंस किया जा सकता है।
अचार, पापड़ और चटनी भारतीय भोजन के अभिन्न अंग हैं लेकिन डायबिटीज में इनके असर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनका प्रभाव सामग्री तैयार करने के तरीके और खाई जाने वाली मात्रा पर निर्भर करता है। कुछ विकल्प फाइबर और स्वाद देते हैं तो कुछ शुगर या नमक बढ़ा सकते हैं। सही पोर्शन और संतुलित थाली के साथ इनका सेवन किया जा सकता है। पूरी तरह बंद करने की बजाय समझदारी भरा चुनाव बेहतर है। नियमित निगरानी और विशेषज्ञ सलाह से ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखा जा सकता है। छोटे साथी भी सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं तो भोजन का आनंद सेहत के साथ बना रहता है।
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