NCDC Amendment Bill 2026: केंद्र सरकार सोमवार को नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी NCDC अमेंडमेंट बिल 2026 लोकसभा में पेश करने जा रही है। इस बिल का मुख्य मकसद NCDC को सहकारी क्षेत्र के लिए फंडिंग में ज्यादा लचीलापन देना है। प्रस्तावित बदलावों के बाद NCDC सिर्फ सहकारी समितियों के जरिए ही नहीं बल्कि सहकारी विकास से जुड़े अन्य संस्थानों को भी सीधे लोन और ग्रांट दे सकेगा। शर्त यह रहेगी कि रकम का इस्तेमाल कोऑपरेटिव कामों के लिए ही हो। इससे सहकारी क्षेत्र तक वित्तीय मदद पहुंचाने का दायरा पहले से व्यापक हो जाएगा।
NCDC Amendment Bill 2026: NCDC क्या है और अभी क्या काम करता है?
नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना 1963 में नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एक्ट 1962 के तहत हुई थी। फिलहाल NCDC कृषि उपज, खाद्य सामग्री और अन्य अधिसूचित वस्तुओं के उत्पादन, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, स्टोरेज तथा एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कार्यक्रमों की योजना, प्रचार और वित्तपोषण करता है। इनमें सहकारी समितियों की अहम भूमिका रहती है। सरकार अब इसी दायरे को बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
बिल पास होने पर NCDC की भूमिका कैसे बदलेगी?
प्रस्तावित संशोधन में NCDC की भूमिका को सिर्फ सहकारी समितियों के जरिए चलने वाले कार्यक्रमों से आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है। अब वह कोऑपरेटिव डेवलपमेंट से जुड़े कार्यक्रमों तक अपनी मदद पहुंचा सकेगा। सीधे उन संस्थाओं को भी लोन और ग्रांट मिल सकेगा जो खुद रजिस्टर्ड कोऑपरेटिव सोसाइटी नहीं हैं लेकिन सहकारी क्षेत्र के विकास में काम कर रही हैं। राज्य सरकार की एजेंसियां, वैधानिक संस्थाएं और स्पेशलाइज्ड संस्थाएं भी इसमें शामिल हो सकती हैं।
NCDC Amendment Bill 2026: क्या NCDC निवेश भी कर सकेगा?
बिल में NCDC को कोऑपरेटिव और कोऑपरेटिव डेवलपमेंट से जुड़ी अन्य संस्थाओं के शेयर कैपिटल में हिस्सा लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। सरकार का कहना है कि सहकारी समितियां आगे भी NCDC की मुख्य लाभार्थी रहेंगी। बदलाव का उद्देश्य सिर्फ उन संस्थागत रास्तों को बढ़ाना है जिनके जरिए सहकारी क्षेत्र तक वित्तीय सहायता पहुंचाई जा सके।
फूडस्टफ्स और इंडस्ट्रियल गुड्स में क्या बदलाव?
बिल में “फूडस्टफ्स” की परिभाषा बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थ भी शामिल हो सकेंगे। इंडस्ट्रियल गुड्स से जुड़ी मौजूदा भौगोलिक पाबंदी हटाने का भी प्रस्ताव है। इससे ऐसी गतिविधियों के लिए NCDC की सहायता जगह की सीमा से बंधी नहीं रहेगी। NCDC को अपने कामकाज के लिए जरूरी अतिरिक्त अधिकार भी दिए जा सकते हैं।
सरकार क्यों ला रही है ये बदलाव?
सरकार ने इन बदलावों को सहकारी क्षेत्र के लगातार फैलते दायरे से जोड़ा है। जून 2021 में सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद कोऑपरेटिव सेक्टर में कई तरह की संस्थाओं की भागीदारी बढ़ी है। बिल के स्टेटमेंट ऑफ ऑब्जेक्ट्स एंड रीजन के अनुसार सहकारी क्षेत्र अब पहले से ज्यादा विविध हो चुका है। इसलिए NCDC को ऐसा कानूनी ढांचा देने की जरूरत है जिससे वह बदलती जरूरतों के हिसाब से समय पर और सीधे वित्तीय मदद दे सके।
NCDC Amendment Bill 2026: पहले भी हुए हैं संशोधन
NCDC एक्ट में इससे पहले 1973, 1974 और 2002 में भी संशोधन हो चुके हैं। उन बदलावों के जरिए NCDC के फंड के स्रोत बढ़ाने और उसकी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए थे। नया बिल इसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए सहकारी क्षेत्र की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है।
NCDC अमेंडमेंट बिल 2026 सहकारी क्षेत्र को वित्तीय मदद पहुंचाने के तरीके को और लचीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सीधे लोन-ग्रांट और सीमित निवेश की अनुमति से गैर-पारंपरिक संस्थान भी सहकारी विकास में शामिल हो सकेंगे। फूडस्टफ्स की परिभाषा और भौगोलिक पाबंदी हटने से गतिविधियों का दायरा बढ़ेगा। सहकारी समितियां मुख्य लाभार्थी बनी रहेंगी। बिल पारित होने के बाद NCDC बदलते सहकारी परिदृश्य के अनुसार बेहतर तरीके से काम कर सकेगा।
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